Friday, October 2

रांची में झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद और यूनिसेफ की ओर से दो दिवसीय राज्य स्तरीय तकनीक-आधारित शिक्षा (एडटेक) रोडमैप परामर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन, यूनिसेफ झारखंड की प्रमुख डॉ कनिनिका मित्रा और यूनिसेफ की शिक्षा विशेषज्ञ पारुल शर्मा ने किया। इसका उद्देश्य राज्य में डिजिटल शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए आगे की राह तय करना है।

डिजिटल शिक्षा की स्थिति और प्राथमिकताओं पर मंथन

उद्घाटन सत्र में राज्य में डिजिटल शिक्षा की वर्तमान स्थिति, इसकी संभावनाओं और भविष्य की प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में झारखंड में तकनीक आधारित शिक्षा को और प्रभावी बनाने के लिए जरूरी कदमों पर भी चर्चा हुई।

“विश्व से सीखें, झारखंड को संवारें”

शशि रंजन ने कहा कि अन्य देशों में तकनीक-आधारित शिक्षा के उपयोग से सीख लेते हुए झारखंड को भी सुविचारित तरीके से भविष्य की तैयारी करनी चाहिए। उन्होंने डिजिटल शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाने की जरूरत पर जोर दिया। उनके अनुसार, यह रोडमैप झारखंड के हर बच्चे को, चाहे वह कहीं भी रहता हो, गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षा तक पहुंचने में मदद करेगा और भविष्य के लिए एक मजबूत व शिक्षित पीढ़ी तैयार करेगा।

समावेशी पहुंच पर जोर

यूनिसेफ झारखंड की प्रमुख डॉ कनिनिका मित्रा ने कहा कि डिजिटल पहल विकसित करते समय सोच के केंद्र में अंतिम छोर होना चाहिए। उन्होंने ऐसी बच्ची को ध्यान में रखने की बात कही, जो अलग भाषा बोलती हो, गरीब या एकल-अभिभावक परिवार से आती हो और जिसे डिजिटल संसाधनों तक पहुंच में कई बाधाओं का सामना करना पड़ता हो। उन्होंने दूरदराज के गांव की उस लड़की का उदाहरण दिया, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी अच्छी नहीं है और परिवार के पास स्मार्टफोन नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना होगा कि वह भी डिजिटल शिक्षा से जुड़े।

डॉ मित्रा ने यह भी कहा कि रोडमैप में शिक्षा, तकनीक, समावेशन, सुरक्षा और संस्थागत व्यवस्थाओं का समग्र एकीकरण जरूरी है, ताकि तैयार होने वाला दस्तावेज हर बच्चे की वास्तविक परिस्थितियों और सीखने की जरूरतों के प्रति उत्तरदायी हो।

इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षकों की तैयारी पर चर्चा

दो दिवसीय कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने राज्य की तकनीक-आधारित शिक्षा पहलों, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षकों की क्षमता और डिजिटल पेडागॉजी से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की। डेटा प्रणालियों तथा समान और सुरक्षित डिजिटल पहुंच से जुड़े अवसरों और चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

कार्यक्रम में आइटी फॉर चेंज, बेंगलुरु के विशेषज्ञ गुरुमूर्ति कासीनाथन और नेहा शर्मा विशेषज्ञ फैसिलिटेटर के रूप में शामिल हुए। डिजिटल शिक्षा को अधिक समावेशी, सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिए विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के बीच विचारों का आदान-प्रदान हुआ। इसमें कम लागत वाले टैबलेट के उपयोग से दूरस्थ क्षेत्रों में सीखने को बढ़ावा देने और शिक्षकों के लिए इंटरैक्टिव डिजिटल पाठ योजनाएं विकसित करने जैसे सुझाव भी सामने आए।

इसे भी पढ़े – LPU में आखिर क्यों भड़के छात्र? किसकी थी साजिश ?

Share.
Next Story
“एक कचौड़ी, दो समोसा… इन मर्दों का क्या भरोसा”…दिल्ली में गूंज रहे नारों के पीछे क्या है पूरी कहानी?
Exit mobile version