Wednesday, October 14

दो साल पहले पहुंची थी बिजली, कुछ ही समय बाद बिगड़ी आपूर्ति; करीब 100 परिवारों के सामने अब भी रोशनी का इंतजार

लातेहार सदर प्रखंड के पेशरार पंचायत का रेका गांव आज भी बिजली जैसी बुनियादी सुविधा के लिए जूझ रहा है। करीब दो साल पहले गांव में बिजली का ढांचा तैयार होने और घरों तक कनेक्शन पहुंचने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब उनके घर भी रोशनी से जगमगाएंगे। गांव में बिजली के पोल लगाए गए, तार खींचे गए और घरों के बाहर मीटर भी लगाए गए। लेकिन यह व्यवस्था लंबे समय तक टिक नहीं सकी।

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली आने के बाद भी आपूर्ति लगातार बाधित रहती थी। कभी बिजली आती तो कभी कई-कई घंटे तक गायब रहती। इसी बीच करीब एक वर्ष पहले बिजली आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई, जिसके बाद अब तक गांव में नियमित बिजली बहाल नहीं हो सकी है। शाम होते ही रेका गांव अंधेरे में डूब जाता है।

करीब 600 की आबादी, फिर भी रोशनी से दूर

पेशरार पंचायत के रेका गांव में करीब 100 परिवार रहते हैं। गांव की आबादी लगभग 600 बताई जाती है। यहां आदिवासी और दलित समुदाय के परिवारों के साथ-साथ आदिम जनजाति के लोग भी रहते हैं। ऐसे में बिजली की सुविधा का लगातार बंद रहना ग्रामीणों के लिए सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी गंभीर समस्या बन गया है।

बिजली नहीं रहने के कारण बच्चों की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है। शाम के बाद पढ़ाई के लिए ग्रामीणों को वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। वहीं, मोबाइल चार्ज करने से लेकर घरेलू कामकाज तक में परेशानी होती है। रात के समय गांव में पर्याप्त रोशनी नहीं रहने से ग्रामीणों की मुश्किल और बढ़ जाती है।

घरों के बाहर मीटर, लेकिन अंदर अंधेरा

रेका गांव की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि यहां बिजली पहुंचाने के लिए जरूरी ढांचा पहले से मौजूद है। घरों के बाहर बिजली के मीटर लगे हैं, पोल खड़े हैं और तार भी बिछे हुए हैं, लेकिन इन सबके बावजूद घरों में रोशनी नहीं पहुंच रही।

ग्रामीणों के लिए यह स्थिति सरकारी व्यवस्था की तस्वीर जैसी बन गई है। जिस बिजली कनेक्शन को गांव के विकास और बेहतर जीवन की शुरुआत माना गया था, वही व्यवस्था अब लंबे समय से बंद पड़ी है। बिजली के पोल और मीटर ग्रामीणों को उस उम्मीद की याद दिलाते हैं, जो बिजली आने के साथ जगी थी।

शिकायतों के बावजूद नहीं बदली स्थिति

ग्रामीणों के अनुसार बिजली की समस्या को लेकर संबंधित स्तर पर कई बार जानकारी दी गई और आपूर्ति बहाल करने की मांग की गई। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। ग्रामीणों का कहना है कि शुरुआत में बिजली की आंख-मिचौली चलती रही और बाद में आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई।

ग्रामीणों की मांग है कि विभाग गांव की बिजली व्यवस्था की जांच कर यह पता लगाए कि आखिर आपूर्ति बंद होने का वास्तविक कारण क्या है। साथ ही खराब लाइन, उपकरण या अन्य तकनीकी समस्या होने पर उसे जल्द ठीक कर नियमित बिजली उपलब्ध कराई जाए।

विकास के दावों के बीच बुनियादी सुविधा का इंतजार

रेका गांव की स्थिति यह सवाल भी खड़ा करती है कि जब बिजली पहुंचाने के लिए पोल, तार और मीटर लगाए जा चुके हैं, तो फिर ग्रामीणों को लगातार अंधेरे में क्यों रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें किसी विशेष सुविधा की जरूरत नहीं है, वे सिर्फ इतना चाहते हैं कि जिस बिजली कनेक्शन का इंतजार उन्होंने वर्षों किया, वह नियमित रूप से उनके घरों तक पहुंचे।

फिलहाल रेका गांव के लोगों की निगाहें बिजली विभाग और प्रशासन पर टिकी हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि लंबे समय से बंद पड़ी बिजली व्यवस्था को जल्द दुरुस्त कर गांव को दोबारा रोशन किया जाएगा।

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