Friday, October 2

होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और छोटे कारोबारी प्रतिष्ठानों में घरेलू सिलेंडर इस्तेमाल करने का दावा; राज्य के 10 जिलों में सर्वे के बाद कार्रवाई की तैयारी

 झारखंड में घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर मामला एक बार फिर गंभीर होता दिखाई दे रहा है। राज्य के अलग-अलग जिलों में होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, ठेले और कैफे जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में घरेलू LPG सिलेंडरों के इस्तेमाल की शिकायतों के बाद प्रशासनिक स्तर पर निगरानी और कार्रवाई की बात सामने आई है।

हाल में सामने आए एक सर्वे के मुताबिक, झारखंड के 10 प्रमुख जिलों और शहरों में 1,576 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में घरेलू LPG सिलेंडर के इस्तेमाल की पहचान किए जाने का दावा किया गया है। इस सूची में रांची सबसे ऊपर बताई गई है, जहां 749 प्रतिष्ठानों में घरेलू सिलेंडर के व्यावसायिक उपयोग का दावा किया गया है। ये आंकड़े एक गैर-सरकारी संगठन द्वारा किए गए सर्वे पर आधारित हैं, इसलिए इन्हें प्रशासन की ओर से अंतिम रूप से सत्यापित आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।

रांची में सबसे ज्यादा प्रतिष्ठानों का दावा

सर्वे के अनुसार रांची में 749 ऐसे प्रतिष्ठान चिन्हित किए गए हैं, जहां घरेलू LPG सिलेंडर का व्यावसायिक इस्तेमाल किए जाने का दावा किया गया है।

इसके बाद धनबाद में 378, पूर्वी सिंहभूम में 168, हजारीबाग में 65, जमशेदपुर में 33, पश्चिमी सिंहभूम में 33, सरायकेला-खरसावां में 31, पलामू में 20 और गढ़वा में 14 प्रतिष्ठानों का उल्लेख किया गया है। उपलब्ध रिपोर्ट में राज्य के 10 जिलों/शहरों में कुल 1,576 प्रतिष्ठानों की बात कही गई है।

यहां ध्यान रखना जरूरी है कि ये संख्या सर्वे में चिन्हित प्रतिष्ठानों की है, न कि दोष सिद्ध होने वाले मामलों की। किसी प्रतिष्ठान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई से पहले संबंधित विभाग को जांच और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

घरेलू सिलेंडर का व्यावसायिक इस्तेमाल क्यों है मामला?

घरेलू LPG सिलेंडर रियायती घरेलू आपूर्ति व्यवस्था का हिस्सा हैं। इन्हें होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में इस्तेमाल करने का मामला नियमों के तहत अलग से देखा जाता है।

व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए अलग श्रेणी के LPG सिलेंडर उपलब्ध हैं। घरेलू और व्यावसायिक LPG की आपूर्ति व्यवस्था अलग होने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना भी है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए निर्धारित आपूर्ति का गलत तरीके से व्यावसायिक इस्तेमाल न हो।

केंद्र सरकार ने भी घरेलू LPG में डायवर्जन रोकने के लिए आज अक्टूबर 2026 से सब्सिडी वाले घरेलू LPG रिफिल के लिए बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण को लागू किया है। सरकार के मुताबिक इससे वास्तविक उपभोक्ताओं तक सब्सिडी पहुंचाने और घरेलू सिलेंडरों के व्यावसायिक/औद्योगिक इस्तेमाल की रोकथाम में मदद मिलेगी।

आज से LPG व्यवस्था में एक और बड़ा बदलाव

घरेलू LPG को लेकर कार्रवाई की चर्चा ऐसे समय हो रही है जब 1 अक्टूबर से घरेलू LPG उपभोक्ताओं के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की व्यवस्था लागू हुई है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, जिन उपभोक्ताओं का बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण पहले ही पूरा हो चुका है, उन्हें दोबारा प्रक्रिया करने की जरूरत नहीं है। प्रमाणीकरण डिलीवरी के समय, गैस एजेंसी के शोरूम या संबंधित तेल कंपनी के मोबाइल ऐप के जरिए किया जा सकता है।

सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य पात्र उपभोक्ताओं को सब्सिडी वाला LPG उपलब्ध कराना और डुप्लीकेट या अपात्र कनेक्शन तथा घरेलू सिलेंडरों के डायवर्जन को रोकना है।

कमर्शियल LPG सिलेंडर और घरेलू सिलेंडर में अंतर

इस मामले को समझने के लिए घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर के बीच अंतर जानना भी जरूरी है।

घरों में सामान्य तौर पर 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू LPG सिलेंडर इस्तेमाल किया जाता है, जबकि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए 19 किलोग्राम वाला कमर्शियल सिलेंडर प्रमुख रूप से इस्तेमाल होता है।

1 अक्टूबर 2026 को रांची में 14.2 किलो घरेलू LPG की कीमत ₹999.50 पर स्थिर रही, जबकि 19 किलो कमर्शियल LPG की कीमत बढ़कर ₹3,004.50 हो गई। यानी घरेलू और व्यावसायिक सिलेंडर की कीमतों में बड़ा अंतर बना हुआ है।

इसी कीमत के अंतर के कारण व्यावसायिक प्रतिष्ठानों द्वारा घरेलू सिलेंडर का इस्तेमाल करना आपूर्ति व्यवस्था और नियमों के लिहाज से महत्वपूर्ण मुद्दा बन जाता है।

पहले भी रांची में हो चुकी है कार्रवाई

घरेलू LPG के गलत इस्तेमाल का मामला झारखंड में नया नहीं है। मार्च 2026 में रांची के एदलहातु इलाके में जिला प्रशासन ने छापेमारी कर घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों के अवैध भंडारण तथा रिफिलिंग से जुड़ी गतिविधियों का खुलासा किया था। कार्रवाई के दौरान सिलेंडर और रिफिलिंग उपकरण बरामद किए गए थे।

इसके अलावा ओरमांझी क्षेत्र में भी अप्रैल 2026 में अवैध गैस रिफिलिंग और कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई की गई थी, जहां एक प्रतिष्ठान से कई कमर्शियल LPG सिलेंडर जब्त किए गए थे।

इन घटनाओं से स्पष्ट है कि प्रशासन की निगरानी सिर्फ घरेलू सिलेंडर के व्यावसायिक इस्तेमाल तक सीमित नहीं है, बल्कि अवैध रिफिलिंग, भंडारण और कालाबाजारी जैसी गतिविधियां भी जांच के दायरे में हैं।

जांच में क्या-क्या देखा जा सकता है?

अगर किसी व्यावसायिक प्रतिष्ठान में घरेलू सिलेंडर इस्तेमाल होने की शिकायत मिलती है तो जांच के दौरान यह देखा जा सकता है कि सिलेंडर किस कनेक्शन से जुड़ा है, उसका उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है और क्या वहां LPG की अवैध रिफिलिंग या भंडारण भी हो रहा है।

इसके अलावा गैस सिलेंडरों की संख्या, दस्तावेज, खरीद और आपूर्ति से जुड़े रिकॉर्ड तथा प्रतिष्ठान के संचालन की स्थिति की भी जांच की जा सकती है।

किसी प्रतिष्ठान के खिलाफ कार्रवाई तभी अंतिम मानी जाएगी जब संबंधित विभाग की जांच में नियमों का उल्लंघन स्थापित हो।

सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर मामला

घरेलू LPG सिलेंडर का गलत तरीके से व्यावसायिक इस्तेमाल केवल सब्सिडी या कीमत का मामला नहीं है। बड़े पैमाने पर खाना पकाने वाले प्रतिष्ठानों में गैस सिलेंडर, रेगुलेटर, पाइप और चूल्हे का इस्तेमाल होता है। अगर सिलेंडर का भंडारण या रिफिलिंग नियमों के विपरीत तरीके से किया जाता है तो आग और गैस रिसाव जैसी दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।

इसी वजह से अवैध रिफिलिंग और गलत तरीके से LPG के इस्तेमाल पर प्रशासन समय-समय पर छापेमारी करता रहा है।

अब आगे क्या होगा?

राज्य में सामने आए 1,576 प्रतिष्ठानों के आंकड़े के बाद सबसे अहम कदम उनका प्रशासनिक सत्यापन होगा। यदि जांच में किसी प्रतिष्ठान पर घरेलू LPG का व्यावसायिक इस्तेमाल पाया जाता है, तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

साथ ही LPG कंपनियों और स्थानीय प्रशासन के स्तर पर यह भी देखा जा सकता है कि घरेलू कनेक्शनों से जुड़े सिलेंडर किस तरह व्यावसायिक गतिविधियों तक पहुंच रहे हैं।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में 1,576 प्रतिष्ठानों का आंकड़ा सर्वे के आधार पर सामने आया है। इसलिए इसे यह कहकर पेश करना सही नहीं होगा कि इन सभी प्रतिष्ठानों को कानूनन दोषी पाया जा चुका है। अंतिम कार्रवाई जांच और आधिकारिक सत्यापन के बाद ही तय होगी।

एक नजर में

  • राज्य: झारखंड
  • सर्वे में चिन्हित प्रतिष्ठान: 1,576
  • जिन क्षेत्रों का दावा: 10 जिले/शहर
  • रांची: 749 प्रतिष्ठान
  • धनबाद: 378 प्रतिष्ठान
  • पूर्वी सिंहभूम: 168 प्रतिष्ठान
  • हजारीबाग: 65 प्रतिष्ठान
  • पलामू: 20 प्रतिष्ठान
  • गढ़वा: 14 प्रतिष्ठान
  • मुख्य मुद्दा: घरेलू LPG का व्यावसायिक इस्तेमाल
  • आज अक्टूबर से बदलाव: सब्सिडी वाले घरेलू LPG रिफिल के लिए बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण की व्यवस्था
  • आगे की प्रक्रिया: शिकायतों/सर्वे के आधार पर प्रशासनिक जांच और सत्यापन
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SURBHI SHIPRA is a news editor, content writer , and graphic designer with experience in digital journalism and online media . she specializes in editing news ,articles, content writing, fact-checking , and creating engaging digital content . Along with editorial work, She designs eye-catching graphic and YouTube thumbnails . She is committed to delivering accurate, informative , and reader- focused content with creativity and professionalism. currently working as a journalist at Jharkhand Digital

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