नई दिल्ली/रांची। आज सोमवार को झारखंड में JPSC और JSSC की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और धांधली की जांच की मांग को लेकर दायर याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई की और झारखंड सरकार,केंद्र सरकार, झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को नोटिस जारी किया है। अदालत ने संबंधित पक्षों से मामले पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।
किसने दाखिल यह याचिका?
बता दे याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की ओर से अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दाखिल की गई है। याचिका में खास तौर पर JPSC की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि 19 अप्रैल को आयोजित परीक्षा के संचालन और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में कथित तौर पर गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।
CJI ने क्या क्या प्रश्न पूछे ?
सुनवाई के दौरान छात्रों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने मामले की गंभीरता अदालत के सामने रखी। उन्होंने बताया कि कथित अनियमितताओं के विरोध में छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान यह जानना चाहा कि क्या कथित गड़बड़ी केवल एक परीक्षा तक सीमित है या इससे कई परीक्षाएं प्रभावित हुई हैं। इस पर छात्रों की ओर से बताया गया कि JPSC के साथ-साथ JSSC की परीक्षाओं को लेकर भी अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।
न्यायिक सेवा परीक्षा को लेकर भी सवाल
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने यह भी पूछा कि क्या न्यायिक सेवा परीक्षा का आयोजन भी JPSC के माध्यम से होता है। अदालत के इस सवाल को मामले की व्यापकता के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
याचिकाकर्ता की ओर से पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की गई। इसके लिए CBI जैसी पेशेवर जांच एजेंसी से जांच कराने का आग्रह किया गया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराने का विकल्प भी अदालत के सामने रखा गया।
CJI ने कहा- गंभीर आपराधिक जांच की जरूरत पड़ सकती है
पूर्व न्यायाधीश से जांच कराने के सुझाव पर CJI ने संकेत दिया कि यह सामान्य पूछताछ का मामला नहीं है। यदि आरोपों की जांच गंभीर आपराधिक जांच के स्तर पर करनी पड़ती है, तो इसमें फॉरेंसिक और तकनीकी जांच जैसे कई पहलू शामिल हो सकते हैं। अदालत ने ऐसी स्थिति में पेशेवर जांच एजेंसी की आवश्यकता की ओर भी संकेत किया।
अब सरकार और आयोगों के जवाब पर नजर
सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार, JPSC और JSSC को नोटिस जारी किया । राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने नोटिस स्वीकार किया और अब इन पक्षों के जवाब पर नजर रहेगी। बता दे अदालत ने मामले को लंबी तारीख देने से इनकार किया है और जल्द सुनवाई की तारीख तय करने को कहा है। अब अगली सुनवाई में सरकार और दोनों आयोगों के जवाब के बाद मामले की आगे की दिशा स्पष्ट होगी।


