रांची: झारखंड में सरकारी भुगतान की प्रक्रिया अब पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है। 1 सितंबर 2026 से राज्य सरकार के सभी प्रकार के बिलों का भुगतान ई-साइन या डिजिटल सिग्नेचर के जरिए किया जाएगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद वेतन, आकस्मिक व्यय, यात्रा भत्ता और विभिन्न प्रकार के अग्रिम भुगतान से जुड़े बिलों के लिए कागजी प्रक्रिया स्वीकार नहीं की जाएगी।
वित्त विभाग की संयुक्त सचिव ज्योति कुमारी झा ने इस संबंध में पत्र जारी कर सभी निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों (डीडीओ) को आवश्यक कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया है। यानी सरकारी भुगतान से जुड़े बिलों को अब डिजिटल माध्यम से ही आगे बढ़ाना होगा।
वेतन से लेकर यात्रा भत्ता तक डिजिटल होगा भुगतान
नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों के वेतन बिल, आकस्मिक व्यय बिल, यात्रा भत्ता (टीए) बिल, हाउस बिल्डिंग एडवांस समेत विभिन्न अग्रिमों से जुड़े भुगतान ई-वाउचर प्रणाली के माध्यम से किए जाएंगे। विभागों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर डिजिटल व्यवस्था के संचालन के लिए जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करने को कहा गया है।
वित्त विभाग का यह फैसला राज्य में डिजिटल वित्तीय प्रबंधन को बढ़ावा देने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की अगली कड़ी है।
IFMS के तहत बढ़ाया जा रहा ई-वाउचर का दायरा
सरकार पहले ही डिजिटल भुगतान की दिशा में कदम उठा चुकी है। 7 मार्च 2024 के संकल्प संख्या 665 के जरिए राज्य सरकार के कर्मचारियों के वेतन और SNA स्पर्श से आच्छादित केंद्र प्रायोजित योजनाओं की राशि का भुगतान पेपरलेस प्रक्रिया से करने का प्रावधान किया गया था।
अब इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (IFMS) के तहत ई-वाउचर प्रणाली का दायरा और बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य सरकारी भुगतान प्रक्रिया को अधिक डिजिटल, व्यवस्थित और कागज रहित बनाना है।
हर विभाग में होंगे मेकर, चेकर और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता
ई-वाउचर प्रणाली के सुचारू संचालन के लिए विभागों को अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता नामित करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) से संबंधित काम के लिए विभागीय स्तर पर मेकर और चेकर भी नामित किए जाएंगे।
इन अधिकारियों से संबंधित जानकारी वित्त विभाग को उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया को निर्धारित तरीके से संचालित किया जा सके।
आदेश की प्रतियां प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), झारखंड और पीएमयू कोषागार को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई हैं। वित्त विभाग के निर्देश को विभागीय पोर्टल पर भी अपलोड किया जाएगा।
यानी 1 सितंबर से सरकारी भुगतान में फाइलों और कागजों की जगह डिजिटल प्रक्रिया ले लेगी। अब बिल तैयार करने से लेकर उसके सत्यापन और भुगतान तक की प्रक्रिया में ई-साइन और डिजिटल सिग्नेचर की भूमिका अहम होगी।
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