रांची, 19 अगस्त 2026: झारखंड भाजपा के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में हुई इस मुलाकात में झारखंड से जुड़े सम-सामयिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई। भाजपा नेताओं ने केंद्रीय नेतृत्व को राज्य की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया और विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त किया। बैठक की जानकारी पार्टी और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में सामने आई है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बैठक में राज्य में चल रहे छात्र आंदोलन और केंद्र सरकार के MMDR संशोधन अधिनियम से जुड़े विषय प्रमुख रहे। भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने युवाओं, नियुक्तियों और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष रखा। झारखंड जैसे खनिज बहुल राज्य में खनन नीति और MMDR संशोधन के प्रभाव को लेकर भी पार्टी ने अपना पक्ष रखा।
प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, रघुवर दास और चंपाई सोरेन, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र राय, दीपक प्रकाश तथा संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह शामिल रहे। वरिष्ठ नेताओं की एक साथ मौजूदगी को राज्य के राजनीतिक हालात पर केंद्रीय नेतृत्व के साथ समन्वय के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बताया गया कि प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड के अन्य जनहित और सम-सामयिक विषयों से भी केंद्रीय गृह मंत्री को अवगत कराया। मुलाकात के बाद भाजपा नेताओं ने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व से उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन मिला है। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं से जुड़े छात्र आंदोलन और MMDR संशोधन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है और भाजपा नेता भी इस मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरते रहे हैं।
MMDR संशोधन को लेकर झारखंड की राजनीति में भी तीखी बहस चल रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र के माइनिंग बिल को राज्य के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए विरोध का ऐलान किया है, जबकि भाजपा केंद्र की नीति और उसके संभावित प्रभावों को लेकर अपना पक्ष रख रही है।
अमित शाह के साथ हुई इस बैठक को झारखंड भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व की ओर से राज्य के राजनीतिक हालात, छात्र आंदोलन और खनिज नीति जैसे मुद्दों पर केंद्रीय स्तर पर चर्चा से आने वाले दिनों में इन विषयों को लेकर भाजपा की रणनीति और अधिक स्पष्ट होने की संभावना है।


