दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वें BRICS Summit की मेजबानी कर रहे भारत ने इस बार कूटनीति के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक और स्थानीय पहचान को भी वैश्विक मंच पर पेश किया है। सम्मेलन में शामिल भारतीय और विदेशी पत्रकारों के लिए तैयार की गई खास मीडिया वेलकम किट में देश के विभिन्न राज्यों के स्थानीय उत्पादों को जगह दी गई है। इस किट में बिहार का सत्तू और मखाना, गुजरात के पारंपरिक हस्तशिल्प तथा ओडिशा की मशहूर कोरापुट कॉफी शामिल की गई है, जिसके जरिए भारत की क्षेत्रीय खासियतों को अंतरराष्ट्रीय मेहमानों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है।
बिहार का मखाना और सत्तू
बिहार की पहचान को इस मंच से जोड़ते हुए राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया पर इसे गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि सत्तू और मखाना बिहार के स्वाद, परंपरा और उद्यमिता के प्रतीक हैं, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए इसे ‘लोकल टू ग्लोबल’ सोच से जोड़ा।
ओडिशा की कोरापुट कॉफी
वहीं ओडिशा की कोरापुट कॉफी ने भी खास ध्यान खींचा। विदेश मंत्रालय की मांग पर Tribal Development Co-operative Corporation of Odisha Ltd (TDCCOL) ने 1,500 से अधिक पैकेट कॉफी की खेप महज 36 घंटे के भीतर दिल्ली पहुंचाई, जिसमें किसानों और पैकेजिंग प्लांट कर्मचारियों का अहम योगदान रहा। यह उपलब्धि ओडिशा के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
कोरापुट कॉफी की खासियत क्या है ?
कोरापुट कॉफी की खासियत इसका 100 प्रतिशत Arabica होना है, जिसे समुद्र तल से करीब 3,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित लक्ष्मीपुर, काशीपुर, दशमंतपुर, नंदपुर, लामतापुट, कोरापुट और पोट्टांगी जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में उगाया जाता है। यहां का ठंडा मौसम और पर्याप्त वर्षा कॉफी की खेती के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है, जिसके चलते यह कॉफी अब देशभर में धीरे-धीरे अपनी पहचान बना रही है।
