Friday, October 23

शारदीय नवरात्रि के दौरान महाअष्टमी और कन्या पूजन की तैयारी कर रहे श्रद्धालुओं के बीच इस बार तारीख को लेकर असमंजस है। कोई 18 अक्टूबर को अष्टमी मनाने की बात कर रहा है, तो कोई 19 अक्टूबर को। पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर की सुबह शुरू होकर 19 अक्टूबर की सुबह समाप्त होगी। उदया तिथि की मान्यता के आधार पर महाअष्टमी का मुख्य पूजन 19 अक्टूबर, सोमवार को किया जाएगा।

महाअष्टमी पर मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। इस दिन व्रत, दुर्गा सप्तशती का पाठ, हवन और कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से मां की आराधना करने से सुख, शांति और समृद्धि की कामना पूरी होती है।

कब शुरू और कब समाप्त होगी अष्टमी तिथि?

पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर 2026 को सुबह 8 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगी।

18 अक्टूबर को सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि रहने के कारण उदया तिथि के आधार पर 19 अक्टूबर को महाअष्टमी मनाई जाएगी। इसलिए सामान्य रूप से अष्टमी व्रत और कन्या पूजन की तैयारी कर रहे श्रद्धालु 19 अक्टूबर की तारीख ध्यान में रखें। हालांकि, कुल परंपरा और विशेष पूजा-पद्धति के अनुसार कुछ परिवारों में अनुष्ठान का समय अलग हो सकता है।

कब करें कन्या पूजन?

महाअष्टमी पर कन्या पूजन की परंपरा है। इसमें छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। उनके चरण धोकर तिलक लगाया जाता है और भोजन कराया जाता है। आम तौर पर पूड़ी, चना और हलवा प्रसाद के रूप में परोसा जाता है। इसके बाद कन्याओं को दक्षिणा या उपहार देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है।

19 अक्टूबर को कन्या पूजन का समय तय करते समय स्थानीय पंचांग और पूजा के मुहूर्त का ध्यान रखना चाहिए। अष्टमी तिथि सुबह 10:51 बजे समाप्त होने के बाद नवमी शुरू हो जाएगी, इसलिए पूजन की तैयारी पहले से कर लेना उचित रहेगा।

राशि के अनुसार मां महागौरी को क्या चढ़ाएं?

धार्मिक मान्यताओं में देवी को पसंद आने वाले भोग और राशि के अनुसार अर्पण की परंपराएं अलग-अलग मिलती हैं। राशि के आधार पर भोग लगाने के लिए निम्न सुझाव दिए जा सकते हैं। ध्यान रखें कि यह पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित सूची है, कोई अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं।

  • मेष राशि: गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई।
  • वृषभ राशि: दूध, खीर या मखाने की खीर।
  • मिथुन राशि: हरी मूंग या फल।
  • कर्क राशि: दूध, मिश्री या खीर।
  • सिंह राशि: गेहूं से बनी मिठाई या गुड़।
  • कन्या राशि: फल, हरी मूंग या पंचामृत।
  • तुला राशि: सफेद मिठाई या खीर।
  • वृश्चिक राशि: गुड़ या लाल फल।
  • धनु राशि: बेसन के लड्डू या पीले रंग की मिठाई।
  • मकर राशि: तिल से बनी मिठाई या गुड़।
  • कुंभ राशि: नारियल या सूखे मेवे।
  • मीन राशि: केले, पीले फल या बेसन की मिठाई।

इन राशि-आधारित सुझावों को स्थानीय पुजारी या अपनी पारिवारिक पूजा-परंपरा से मिलाकर अपनाया जा सकता है। मां महागौरी की पूजा में सफेद फूल, नारियल, मिठाई और खीर अर्पित करने की परंपरा भी प्रचलित है।

महाअष्टमी पर क्यों होती है मां महागौरी की पूजा?

नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की आराधना की जाती है। मां महागौरी को शांति, पवित्रता और सौम्यता का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, उनकी पूजा से जीवन में सुख-शांति और सकारात्मकता आती है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मंदिरों में दर्शन करते हैं और घरों में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

श्रद्धालु ध्यान दें: इस वर्ष महाअष्टमी का मुख्य दिन 19 अक्टूबर है, जबकि अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को ही शुरू हो जाएगी। कन्या पूजन और हवन के लिए अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ समय की पुष्टि अवश्य करें।

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