नेपाल से आए शूटरों ने सिरोही में फार्म हाउस की कई दिनों तक की रेकी, मोबाइल में मिली पूर्व विधायक की तस्वीरें; पुलिस ने बरामद किए हथियार और 36 कारतूस
राजस्थान के सिरोही से कांग्रेस के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा को कथित तौर पर निशाना बनाने की साजिश का राजस्थान पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) और जोधपुर पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े दो शूटरों ने लोढ़ा के सिरोही स्थित फार्म हाउस की कई दिनों तक रेकी की थी। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनके मोबाइल फोन से पूर्व विधायक की तस्वीरें भी बरामद होने की बात सामने आई है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए शूटरों की पहचान जसकरण सिंह उर्फ करण और राजिंदर उर्फ बिल्ला के रूप में हुई है। दोनों पंजाब पुलिस की ओर से इनामी बताए गए हैं। जांच में सामने आया कि शूटरों ने फार्म हाउस के आसपास की गतिविधियों पर नजर रखी और लोढ़ा के आने-जाने के समय तथा वहां आने वाले लोगों की जानकारी जुटाने की कोशिश की। पुलिस को उनकी गतिविधियों से जुड़े सीसीटीवी फुटेज भी मिले हैं।
होटल में फर्जी पहचान से ठहरे, फिर फार्म हाउस की निगरानी
जांच के मुताबिक दोनों आरोपी 17 सितंबर को ब्यावर-पिंडवाड़ा राजमार्ग के पास एक होटल में पहुंचे थे। पुलिस का कहना है कि उन्होंने वहां फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल कर कमरा लिया और करीब 14 घंटे तक रुके। इसके बाद दोनों सिरोही इलाके में पहुंचे।
पुलिस के अनुसार शूटरों ने फार्म हाउस के आसपास मौजूद पहाड़ी क्षेत्र को भी अपनी निगरानी के लिए इस्तेमाल किया। उन्होंने कथित तौर पर वारदात के बाद भागने के लिए सुनसान रास्तों और पहाड़ी मार्गों की भी जानकारी जुटाई थी।
झाड़ियों से विदेशी पिस्टल और 36 कारतूस बरामद
जोधपुर पुलिस और AGTF ने आरोपियों की निशानदेही पर पाली-सिरोही राजमार्ग के पास ढोला गांव क्षेत्र में हथियार बरामद किए। पुलिस के मुताबिक झाड़ियों में छिपाकर रखे गए एक बैग से पिस्टल, मैगजीन और 36 जिंदा कारतूस मिले हैं।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों शूटर पहले पंजाब में आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं और बाद में नेपाल चले गए थे। AGTF के मुताबिक उन्हें नेपाल से वापस भारत बुलाकर जोधपुर भेजे जाने की जानकारी मिली है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
आखिर संयम लोढ़ा ही क्यों थे निशाने पर?
यह इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है। पुलिस पूछताछ में शूटरों ने कथित तौर पर लोढ़ा और उनके भाई के बीच वैचारिक या पारिवारिक मतभेद का दावा किया है। हालांकि पुलिस ने अभी इसे हत्या की साजिश की अंतिम वजह के तौर पर पुष्टि नहीं की है और इस एंगल की जांच जारी है।
पुलिस इस मामले में गैंग नेटवर्क, स्थानीय मदद और किसी संभावित सुपारी के एंगल की भी पड़ताल कर रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि मारवाड़ क्षेत्र के एक बड़े कारोबारी को निशाना बनाने की योजना से इस नेटवर्क का संबंध हो सकता है। हालांकि इस पहलू की भी जांच जारी है।
कौन हैं संयम लोढ़ा?
संयम लोढ़ा राजस्थान के सिरोही से तीन बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने छात्र राजनीति से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की और बाद में कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय हुए। 1998 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर सिरोही सीट से जीत दर्ज की। इसके बाद 2003 में भी उन्होंने इसी सीट से जीत हासिल की। 2008 और 2013 में कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने के दौरान उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद लोढ़ा ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और सिरोही सीट से जीत दर्ज की। विधानसभा के रिकॉर्ड के अनुसार उनका कार्यकाल दिसंबर 2018 से शुरू हुआ। इस दौरान वे तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सलाहकार भी रहे।
पेशे से वकील रहे लोढ़ा ने राजस्थान की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाई है। उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार उन्होंने एलएलबी की पढ़ाई की है।
निकाय चुनाव के दौरान नहीं मिल सका वारदात का मौका
पुलिस के मुताबिक, जिस समय शूटर सिरोही में सक्रिय थे, उस दौरान लोढ़ा के फार्म हाउस पर निकाय चुनाव से जुड़े लोगों और समर्थकों की आवाजाही बढ़ गई थी। पुलिस का दावा है कि लगातार लोगों की मौजूदगी और सुरक्षा व्यवस्था के कारण शूटरों को कथित वारदात को अंजाम देने का मौका नहीं मिला।
अब AGTF और जोधपुर पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि दोनों शूटरों को हथियार, ठहरने की व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर अन्य मदद किसने उपलब्ध कराई। हरियाणा से कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
फिलहाल संयम लोढ़ा की सुरक्षा बढ़ाई गई है और पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह साफ होने की उम्मीद है कि इस कथित साजिश के पीछे वास्तविक मकसद क्या था और इसे संचालित करने वाले लोग कौन थे।
