भारत को आज़ाद हुए 79 साल पूरे हो गए हैं। देश अब एक वयस्क की भांति रफ्तार पकड़ चुका है। पूरा देश इस महोत्सव को मनाने के लिए तैयार है, पूरा देश स्वतंत्रता दिवस के रंग में रंगने को तैयार है। हर गली, हर नुक्कड़ की हवाओं में उत्साह की खुशबू बिखरी है। इन 79 सालों के बाद देशवासी भारत का 80वां जन्मदिन मनाने को आतुर है।
80 बरस का होते-होते भारत ने कई खिताब अपने नाम किए हैं। कवियों द्वारा बेहिसाब उपयोग किए जाने वाले चांद की दक्षिणी ध्रुवीय सतह पर झंडा गाड़ दिया है। UPI के इस्तेमाल के मामले में विश्व का सबसे बड़ा देश बन गया है। जहां 1950-51 में देश में खाद्यान्न उत्पादन करीब 5 करोड़ टन था, जो 35 करोड़ की आबादी के लिए पर्याप्त नहीं था। आलम ये था कि प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने देशवासियों से एक वक्त का उपवास रखने की अपील की थी। वहीं, आज भारत न सिर्फ अपने लिए खाद्यान्न का उत्पादन करता है, बल्कि दुनिया के बड़े खाद्यान्न उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है। भारत आज विश्व की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
विश्व के 195 देशों में केवल 9 देशों के पास परमाणु हथियार हैं, जिनमें भारत भी शामिल है। लेकिन विडंबना ये है कि जिस झारखंड से परमाणु ऊर्जा के लिए यूरेनियम निकलता है, वहां के युवा अपने हक, अधिकार और सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। जब पूरा देश स्वतंत्रता दिवस की धुन में नाच रहा होगा, उसी वक्त झारखंड के युवा अधबने तंबू के नीचे धरने पर बैठे होंगे।
राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले 20 दिनों से विरोध प्रदर्शन चल रहा है। मामला JPSC की 14वीं परीक्षा में कथित धांधली को लेकर है।
JPSC, झारखंड के उच्च स्तरीय पदों के लिए परीक्षाओं का आयोजन करता है। 14वीं JPSC की प्रीलिम्स परीक्षा 19 अप्रैल 2026 को हुई थी, जिसका परिणाम 2 जुलाई 2026 को प्रकाशित हुआ। इसमें कुल 2,204 अभ्यर्थी मेंस परीक्षा के लिए योग्य साबित हुए। आयोग ने 18-20 जुलाई को मेंस परीक्षा लेने की घोषणा की।
हालांकि, परिणाम के बाद से ही छात्रों ने इस पर आपत्ति जतानी शुरू कर दी। पहले छात्रों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी आवाज उठाने की शुरुआत की। छात्रों ने आरोप लगाया कि PT (प्रीलिम्स) की मार्कशीट में आयोग के संवैधानिक सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं हैं। साथ ही, कैटेगरी-वाइज कटऑफ भी जारी नहीं किया गया।
इसी बीच सोशल मीडिया पर एक छात्र की OMR शीट वायरल हुई, जिसमें ये दावा किया गया कि 100 में से 48 जवाब देने के बाद भी छात्र का चयन हो गया। इसके बाद छात्रों ने जमीनी स्तर से भी आवाज उठाना शुरू कर दिया। शुरुआती दौर में छात्र नेता और JLKM से जुड़े देवेंद्रनाथ महतो और कुछ छात्रों ने 25 जुलाई को रांची के मोरहाबादी मैदान में आंदोलन की शुरुआत की। बाद में जिला प्रशासन ने 26 जुलाई को आंदोलन स्थल को परिवर्तित कर अटल स्मृति वेंडर मार्केट के समीप जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम कर दिया।
इस आंदोलन में सोशल मीडिया ने एक अहम भूमिका निभाई। जहां पहले धरना प्रदर्शन में केवल 100-200 छात्र शामिल थे, वहीं सोशल मीडिया पर मामला वायरल होने के बाद इसमें लगातार छात्रों की संख्या बढ़ती गई। झारखंड के अलग-अलग जिलों से छात्र प्रदर्शन में शामिल होने लगे।
आंदोलन की स्थिति बिगड़ने के बीच JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने 22 जुलाई 2026 को पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, इससे पहले ही 20 जुलाई को CID ने JPSC कार्यालय में छापेमारी कर 3 लोगों को हिरासत में ले लिया था। हालांकि, अब तक सरकार से कई बार वार्ता हो चुकी है। सरकार का कहना है कि वह छात्रों की 98% बातें मानने को तैयार है, लेकिन मामला दो मांगों पर अटका पड़ा है। झारखंड डिजिटल से बात करते वक्त छात्रों ने बताया कि वे CID की जगह CBI से जांच चाहते हैं और JSSC CGL की हुई परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
यानी एक तरफ देश अपनी आजादी के 79 साल पूरे होने का जश्न मनाने की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ झारखंड के ये युवा उसी आजादी में मिले अपने अधिकारों और व्यवस्था से जवाबदेही की मांग को लेकर सड़क पर हैं। आजादी के 79 वर्षों में भारत ने कई मुश्किलों को पार किया है। आगे की यात्रा में भी चुनौतियां आएंगी, लेकिन देश की सबसे बड़ी ताकत यही है कि संवाद और लोकतंत्र के रास्ते खुले हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि JPSC-JSSC से जुड़े विवादों का समाधान भी बातचीत, पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच के माध्यम से निकलेगा, ताकि छात्रों के मन में व्यवस्था को लेकर भरोसा मजबूत हो।
स्वतंत्रता दिवस पर जब पूरे देश में तिरंगा लहराएगा, तब झारखंड के युवाओं की उम्मीद भी उसी तिरंगे के साथ जुड़ी होगी – एक ऐसे भविष्य की उम्मीद, जहां मेहनत करने वाले हर युवा को अपने अधिकार और अवसर पर भरोसा हो। यही लोकतंत्र की खूबसूरती है और यही आजादी का असली उत्सव भी।
– Sagar Prajapati
