एक दशक पहले जिस देश की गिनती दुनिया की सबसे कमजोर पांच अर्थव्यवस्थाओं यानी ‘Fragile Five’ में होती थी, वही भारत आज वैश्विक विनिर्माण के नक्शे पर एक मजबूत ताकत बनकर उभरा है। 25 सितंबर के 2014 में शुरू हुए ‘मेक इन इंडिया’ अभियान ने इस साल अपने 12 साल पूरे कर लिए हैं, और इस सफर में देश ने न सिर्फ आर्थिक सुस्ती को पीछे छोड़ा, बल्कि खुद को एक वैश्विक डिजाइन, नवाचार और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित भी कर लिया। ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के सिद्धांत पर टिकी यह नीति अब ‘मेक इन इंडिया 2.0’ के रूप में आगे बढ़ रही है, जिसके दायरे में 15 मैन्युफैक्चरिंग और 12 सेवा क्षेत्रों समेत कुल 27 प्रमुख सेक्टर शामिल किए जा चुके हैं।
बड़े पैमाने पर विनिर्माण का विस्तार
आंकड़ों के अनुसार, 2022-23 से 2025-26 के बीच मैन्युफैक्चरिंग GVA ने 10.88% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट दर्ज की है। वहीं अप्रैल-जुलाई 2026 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के विनिर्माण हिस्से में पिछले साल के मुकाबले 7.0% की वृद्धि हुई है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल बना सबसे बड़ी सफलता की कहानी
इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में करीब सात गुना वृद्धि हुई है—यह 2014-15 के ₹1.9 लाख करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹13.11 लाख करोड़ पहुंच गया। मोबाइल फोन निर्माण में तो 32 गुना की ऐतिहासिक छलांग लगी है, जो ₹18,900 करोड़ से बढ़कर ₹6.3 लाख करोड़ हो गया, जिससे भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता देश बन चुका है।
ऑटोमोबाइल, स्टील, फार्मा और रक्षा क्षेत्र में भी उछाल
2024-25 में देश का कुल वाहन उत्पादन 31.03 मिलियन यूनिट तक पहुंचा, जो 2014-15 से 33% अधिक है। फार्मा क्षेत्र में भारत मात्रा के हिसाब से दुनिया में तीसरे स्थान पर है, जिसका टर्नओवर 2024-25 में लगभग ₹4.72 लाख करोड़ रहा। कच्चे इस्पात का उत्पादन 2014-15 के 81.7 मिलियन टन से दोगुना होकर 170.0 मिलियन टन हो गया। रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन 2025-26 में ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा, जो 2014-15 से लगभग चार गुना अधिक है।
उन्नत तकनीक की ओर बढ़ता भारत
भारत अब सिर्फ असेंबलिंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जटिल न्यू केमिकल एंटिटी दवाओं, इसरो के स्वदेशी प्रोसेसर, सोलर मॉड्यूल (2014 के 2.3 GW से बढ़कर 192 GW), और दुर्लभ पृथ्वी चुंबक जैसे उन्नत उत्पादों के निर्माण में भी आगे बढ़ चुका है। LCA तेजस Mk1A की वार्षिक उत्पादन क्षमता भी बढ़कर 24 विमान हो गई है।
कैपिटल गुड्स और नीतिगत सुधार
कैपिटल-गुड्स क्षेत्रों में कुल उत्पादन 2019-20 के ₹2,87,233 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹5,69,900 करोड़ हो गया। इसके साथ ही FDI में भी भारी उछाल आया—2014-15 से 2025-26 के बीच करीब 843 बिलियन डॉलर का संचयी निवेश हुआ, जो पिछले बारह वर्षों की तुलना में 169% अधिक है। नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम पर 5.69 लाख से अधिक व्यावसायिक इकाइयां ऑनबोर्ड हो चुकी हैं।
PLI स्कीम ने दिया बड़ा प्रोत्साहन
14 रणनीतिक क्षेत्रों को कवर करने वाली PLI योजना के तहत जून 2026 तक ₹2.40 लाख करोड़ का वास्तविक निवेश हुआ, ₹22.66 लाख करोड़ का उत्पादन और बिक्री दर्ज हुई, ₹15.20 लाख करोड़ का निर्यात हासिल हुआ और 14 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए।
आगे की राह: Semicon 2.0 और नए औद्योगिक पार्क
सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए ₹1,27,500 करोड़ का आवंटन, मोबाइल कंपोनेंट्स के लिए ₹62,500 करोड़ की MPMS योजना और 100 नए औद्योगिक पार्कों के लिए ₹33,660 करोड़ की योजना जैसे कदम भारत को आगे ले जाने की तैयारी में हैं।
सीआईआई की रिपोर्ट ‘Make in India @ 12’ के अनुसार, भारत ने 38 देशों को कवर करने वाले 9 बड़े व्यापार समझौते भी किए हैं। मेक इन इंडिया के 12 वर्ष पूरे होने पर यह स्पष्ट है कि देश अब कोर कंपोनेंट्स, सेमीकंडक्टर और उन्नत तकनीकी क्षमता के निर्माण के जरिए आत्मनिर्भर विनिर्माण महाशक्ति बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
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