रांची। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर राजधानी रांची के चुटिया स्थित प्राचीन श्रीराम मंदिर में भक्ति और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। मंदिर परिसर में श्री रामायण नवाह्न परायण महायज्ञ और सामूहिक रामायण पाठ का आयोजन किया जा रहा है। इस धार्मिक अनुष्ठान में 151 कुंवारी कन्याएं भाग ले रही हैं, जो लगातार नौ दिनों तक सामूहिक रूप से रामायण का पाठ कर रही हैं। मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही और धार्मिक गतिविधियों से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।
इस आयोजन की सबसे खास बात यह है कि इसका उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी में धार्मिक संस्कारों का विकास करना और नारी शिक्षा के महत्व को बढ़ावा देना भी है। वर्ष 1970 से लगातार आयोजित हो रहा यह कार्यक्रम चुटिया की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
1970 से निभाई जा रही रामायण पाठ की परंपरा
चुटिया स्थित श्रीराम मंदिर में श्री रामायण नवाह्न परायण महायज्ञ और सामूहिक रामायण पाठ का आयोजन वर्ष 1970 से निरंतर होता आ रहा है। दशकों से चली आ रही यह परंपरा नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों और रामायण के संदेशों से जुड़ने का अवसर देती है।
नौ दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान में 151 कुंवारी कन्याओं की सहभागिता विशेष आकर्षण का केंद्र है। सामूहिक रामायण पाठ के माध्यम से धार्मिक कथाओं, आदर्शों और जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। नवरात्र के दौरान मंदिर में होने वाले इस आयोजन का अपना विशेष धार्मिक महत्व है।
सुबह 9 से शाम 4 बजे तक होता है सामूहिक पाठ
मंदिर में रामायण पाठ का कार्यक्रम प्रतिदिन सुबह 9 बजे शुरू होता है और शाम 4 बजे तक चलता है। इस दौरान कन्याएं एक साथ बैठकर रामायण का पाठ करती हैं। दिनभर चलने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान के बाद संध्या के समय भव्य महाआरती आयोजित की जाती है।
महाआरती के दौरान भगवान श्रीराम की आराधना की जाती है। नवरात्र के अवसर पर मंदिर में पूजा-अर्चना और रामायण पाठ से आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है। श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का अवसर भी है।
धार्मिक संस्कार और नारी शिक्षा को बढ़ावा देने की पहल
इस आयोजन का एक प्रमुख उद्देश्य नई पीढ़ी में धार्मिक संस्कारों का विकास करना है। रामायण में वर्णित आदर्श, मर्यादा, त्याग, कर्तव्य और पारिवारिक मूल्यों से बच्चों और युवाओं को परिचित कराने की दिशा में सामूहिक पाठ को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके साथ ही आयोजन के माध्यम से नारी शिक्षा को बढ़ावा देने का संदेश भी दिया जा रहा है। 151 कन्याओं की भागीदारी इस कार्यक्रम को विशेष पहचान देती है। धार्मिक गतिविधियों में बेटियों की सक्रिय सहभागिता के जरिए उनके आत्मविश्वास, सांस्कृतिक जुड़ाव और सामाजिक भूमिका को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।
17वीं शताब्दी में नागवंशी राजा ने बनवाया था मंदिर
चुटिया स्थित प्राचीन श्रीराम मंदिर का ऐतिहासिक महत्व भी काफी खास है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण 17वीं शताब्दी में नागवंशी राजा रघुनाथ शाह ने लगभग 1685-1686 के दौरान करवाया था। अपनी प्राचीनता और धार्मिक महत्ता के कारण यह मंदिर रांची के प्रमुख ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों में गिना जाता है।
समय के साथ यह मंदिर पूजा-अर्चना का केंद्र होने के साथ-साथ स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहा है। यहां दशकों से आयोजित हो रहा सामूहिक रामायण पाठ इस विरासत को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
आस्था, संस्कृति और परंपरा का संगम
शारदीय नवरात्र के दौरान आयोजित श्री रामायण नवाह्न परायण महायज्ञ चुटिया के श्रीराम मंदिर की पुरानी परंपरा को जीवंत बनाए हुए है। 151 कन्याओं द्वारा नौ दिनों तक किया जा रहा सामूहिक पाठ धार्मिक आस्था के साथ संस्कार और शिक्षा के संदेश को भी सामने लाता है।
एक ओर जहां श्रद्धालु रामायण के पाठ और महाआरती के माध्यम से आध्यात्मिक शांति का अनुभव कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का माध्यम बन रहा है। वर्ष 1970 से निरंतर जारी यह अनुष्ठान आज भी रांची की धार्मिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
