Tuesday, October 13

बिहार के लखीसराय जिले में स्थित प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर में सावन के तीसरे सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच भगदड़ मचने से बड़ा हादसा हो गया। घटना में सात महिलाओं की मौत हो गई, जबकि कई अन्य श्रद्धालु घायल हुए हैं। हादसे के बाद मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

घटना के बाद जिला प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को तत्काल लखीसराय सदर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। प्रशासन की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने और भीड़ को व्यवस्थित करने की कार्रवाई की गई।

दो ट्रेनों के एक साथ पहुंचने से बढ़ी भीड़

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 6:40 से 6:45 बजे के बीच अशोकधाम हाल्ट पर दो ट्रेनें एक साथ पहुंचीं। ट्रेनों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उतरने के बाद मौके पर अचानक भीड़ बढ़ गई।

इसी दौरान भीड़ के दबाव में बैरिकेडिंग टूट गई और एक बिजली का पोल गिर गया। पोल गिरने के बाद वहां करंट फैलने की अफवाह तेजी से फैल गई। इससे श्रद्धालुओं के बीच अचानक भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और लोग सुरक्षित जगह की ओर भागने लगे।

करंट से नहीं, भीड़ में दबने से हुई मौत

अधिकारियों के अनुसार, हादसे में हुई मौतों का कारण करंट लगना नहीं बल्कि भीड़ के दबाव में श्रद्धालुओं का नीचे गिरना और दब जाना बताया जा रहा है। हादसे में जान गंवाने वाली सभी सात मृतक महिलाएं हैं।

घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली और घायलों को अस्पताल भेजा। हादसे की परिस्थितियों और भीड़ प्रबंधन से जुड़े इंतजामों की जांच की जा रही है।

मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की सहायता

हादसे पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए घटना को बेहद दुखद और हृदयविदारक बताया तथा मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के निकटतम आश्रित को राज्य सरकार की ओर से 4-4 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि दुख की इस घड़ी में सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है।

प्रशासन ने शुरू की जांच

हादसे के बाद प्रशासन की ओर से पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। भीड़ अचानक क्यों बेकाबू हुई, बैरिकेडिंग कैसे टूटी और सुरक्षा व्यवस्था में कहीं कोई चूक हुई या नहीं, इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। प्रशासन ने लापरवाही से जुड़ी शिकायतों को भी गंभीरता से लेने की बात कही है।

सावन के सोमवार और धार्मिक पर्व के कारण अशोकधाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। ऐसे में हादसे ने बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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