रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) और खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी (FSO) परीक्षा को रद्द करने की मांग को लेकर दायर याचिकाओं पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकलपीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले में अदालत के फैसले पर अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हैं।
सुनवाई के दौरान प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रश्नपत्र प्रिंटिंग मशीन से ही लीक हुआ था और बाद में इसे व्हाट्सऐप के माध्यम से वायरल किया गया। वहीं, राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहिताश्य रॉय और सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने पक्ष रखा। सरकार ने अदालत में सीलबंद लिफाफे में एक रिपोर्ट भी पेश की।
प्रश्नपत्र लीक के आरोपों पर अदालत में हुई बहस
सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ता की ओर से प्रश्नपत्र लीक होने के कथित घटनाक्रम को अदालत के सामने रखा गया। बताया गया कि प्रश्नपत्र प्रिंटिंग मशीन से लीक हुआ था और फिर व्हाट्सऐप के जरिए प्रसारित किया गया। परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर उठाए गए इन सवालों के बीच परीक्षा रद्द करने की मांग पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं।
हालांकि, प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल अदालत ने सभी पक्षों की बातें सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया है।
राज्य सरकार ने सीलबंद लिफाफे में पेश की रिपोर्ट
इस मामले में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहिताश्य रॉय और सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने अदालत में सरकार का पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट भी पेश की गई।
सीलबंद लिफाफे में पेश रिपोर्ट मामले की सुनवाई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में रिपोर्ट की विषयवस्तु या उसमें दर्ज निष्कर्षों का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए रिपोर्ट के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना फिलहाल उचित नहीं होगा।
याचिकाकर्ता को शॉर्ट नोट्स दाखिल करने का निर्देश
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को शॉर्ट नोट्स दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
शॉर्ट नोट्स के जरिए याचिकाकर्ता अपने प्रमुख कानूनी तर्कों और दलीलों को संक्षेप में अदालत के समक्ष रख सकेंगे। अब मामले में आगे की प्रक्रिया और अदालत के अंतिम निर्णय का इंतजार है।
परीक्षा रद्द करने की मांग पर टिकी अभ्यर्थियों की नजर
JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के साथ CDPO और FSO परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई पूरी होना अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और प्रश्नपत्र लीक के आरोप इस विवाद के केंद्र में हैं।
यदि अदालत परीक्षा रद्द करने की मांग पर कोई आदेश देती है, तो उसका प्रभाव संबंधित परीक्षा प्रक्रिया पर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल किसी संभावित परिणाम को लेकर निश्चित दावा नहीं किया जा सकता। अंतिम स्थिति हाईकोर्ट के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।
हस्तक्षेपकर्ता की ओर से इन अधिवक्ताओं ने रखी दलीलें
मामले में हस्तक्षेपकर्ता की ओर से कुमार हर्ष और शुभाशीष रसिक सोरेन ने बहस की। वहीं, राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहिताश्य रॉय और सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने अपना पक्ष रखा।
फिलहाल झारखंड हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, CDPO और FSO परीक्षा को रद्द करने की मांग पर अदालत का अंतिम निर्णय महत्वपूर्ण होगा।


