हजारीबाग/धनबाद/रांची : झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा से जुड़े कर्मचारियों का आंदोलन तेज होता जा रहा है। वेतन बकाया, बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली और श्रमिक अधिकार लागू करने की मांग को लेकर झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ के बैनर तले कर्मचारियों ने सोमवार को हजारीबाग और धनबाद समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में भिक्षाटन कर विरोध जताया। हजारीबाग सदर अस्पताल परिसर और धनबाद के सिविल सर्जन कार्यालय के सामने कर्मचारियों ने हाथों में कटोरा लेकर सरकार और स्वास्थ्य विभाग का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचने का प्रयास किया। कर्मचारियों के अनुसार, उनका आंदोलन सातवें दिन भी जारी रहा।
कटोरा लेकर सड़क पर उतरे एंबुलेंस कर्मचारी
हजारीबाग में कर्मचारियों ने सदर अस्पताल परिसर में भिक्षाटन किया, जबकि धनबाद में सिविल सर्जन कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया गया। कर्मचारियों का कहना है कि कई महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो गया है। परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि पहले भी सरकार की ओर से समाधान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से उन्हें भिक्षाटन जैसे तरीके से अपना विरोध दर्ज कराना पड़ रहा है।
चार-पांच महीने से वेतन बकाया होने का आरोप
धनबाद में प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे जिला अध्यक्ष दिनेश कुमार यादव ने बताया कि कर्मचारियों को पिछले चार से पांच महीने से वेतन नहीं मिला है। इससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है।
संघ ने कंपनी और संबंधित अधिकारियों पर मनमानी, वेतन कटौती तथा मांगों को उठाने पर कर्मचारियों का तबादला करने और उन्हें बर्खास्त करने जैसी कार्रवाई का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित कंपनी या विभाग का पक्ष सामने आना बाकी है।
धनबाद में 36 में से सिर्फ 4-5 एंबुलेंस चलने का दावा
वेतन के साथ-साथ एंबुलेंस की स्थिति को लेकर भी कर्मचारियों ने सवाल उठाए हैं। संघ का दावा है कि धनबाद जिले में कुल 36 एंबुलेंस हैं, लेकिन इनमें से केवल चार से पांच ही किसी तरह संचालित हो पा रही हैं।
कर्मचारियों के मुताबिक, कई एंबुलेंस के टायर घिस चुके हैं। कुछ वाहनों में स्टेपनी, ऑक्सीजन व्यवस्था और बॉडी की स्थिति भी खराब है। उनका कहना है कि ऐसी हालत में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना जोखिम भरा हो सकता है। कर्मचारियों ने एंबुलेंस की मरम्मत और बेहतर रखरखाव सुनिश्चित करने की मांग की है।
बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली और श्रमिक अधिकार लागू करने की मांग
संघ ने आरोप लगाया कि श्रम विभाग में शिकायत करने के बाद करीब 20 कर्मचारियों को सेवा से हटा दिया गया। कर्मचारियों का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के साथ हुई बैठक में उनकी समस्याओं के समाधान और बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली का आश्वासन मिला था, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें हैं:
- बकाया वेतन का जल्द भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
- 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन जिला स्तर पर सिविल सर्जन के माध्यम से किया जाए।
- बर्खास्त कर्मचारियों को दोबारा सेवा में बहाल किया जाए।
- ईपीएफ, ईएसआईसी, ओवरटाइम, ग्रेच्युटी और न्यूनतम वेतन सहित सभी श्रमिक अधिकार लागू किए जाएं।
- एंबुलेंस की खराब स्थिति में सुधार कर मरीजों के लिए सुरक्षित सेवा सुनिश्चित की जाए।
15-20 दिनों में समाधान का मिला था आश्वासन
हजारीबाग में कर्मचारियों ने बताया कि 16 सितंबर 2026 को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के साथ हुई बैठक में समस्याओं के समाधान के लिए 15 से 20 दिनों का समय दिया गया था। संघ का कहना है कि निर्धारित समय बीतने के बाद भी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
इसी तरह, धनबाद के कर्मचारियों ने भी बहाली के आश्वासन के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी जताई है। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं को उठा रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन होगा तेज
झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि वेतन भुगतान, बर्खास्त कर्मियों की बहाली और श्रमिक अधिकारों को लेकर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
इस आंदोलन के बीच एंबुलेंस कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति और वाहनों के रखरखाव से जुड़े आरोपों ने स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग कर्मचारियों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं।


