अस्पताल का एक बड़ा बिल किसी भी गरीब या मध्यम वर्गीय परिवार की सालों की बचत खत्म कर सकता है। इसी डर को कम करने के लिए केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) चल रही है। इस साल पश्चिम बंगाल के जुड़ने के साथ यह योजना अब देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू हो चुकी है। झारखंड में राज्य सरकार इसी योजना के साथ अपनी अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना जोड़कर कवर को और बढ़ा रही है।
क्या है आयुष्मान कार्ड?
आयुष्मान कार्ड PM-JAY का पहचान पत्र है। इसे दिखाकर पात्र परिवार देश के किसी भी सूचीबद्ध सरकारी या निजी अस्पताल में हर साल ₹5 लाख तक का कैशलेस इलाज करा सकता है। परिवार के सदस्यों की संख्या या उम्र पर कोई सीमा नहीं है।
योजना में भर्ती से 3 दिन पहले और छुट्टी के 15 दिन बाद तक की जांच और दवाओं का खर्च भी शामिल है। पुरानी बीमारियां पहले दिन से कवर होती हैं। सर्जरी, ICU, कैंसर और हृदय रोग जैसे बड़े इलाज भी इसके दायरे में आते हैं।
कौन है पात्र?
PM-JAY में पात्रता आय से नहीं, बल्कि 2011 की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) के आंकड़ों से तय होती है। इसका मतलब है कि पात्र परिवारों के नाम पहले से सरकारी सूची में हैं, आपको सिर्फ अपना नाम जांचना होता है। ग्रामीण इलाकों में वंचित परिवार और शहरों में तय पेशों से जुड़े मजदूर परिवार इसके दायरे में आते हैं। 2024 में आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के परिवारों को भी योजना में जोड़ा गया।
70 साल से ऊपर के बुजुर्गों के लिए अलग कार्ड
70 साल या उससे अधिक उम्र का हर भारतीय नागरिक, आय चाहे जो भी हो, अब इस योजना का हकदार है। ऐसे बुजुर्गों को आयुष्मान वय वंदना कार्ड मिलता है, जिस पर सालाना ₹5 लाख तक का इलाज मुफ्त है। अगर परिवार पहले से आयुष्मान योजना में है, तो बुजुर्ग सदस्य को अलग से ₹5 लाख का टॉप-अप मिलता है। निजी स्वास्थ्य बीमा होने पर भी यह कार्ड बनवाया जा सकता है।
झारखंड में क्या है खास?
झारखंड में यह योजना ‘आयुष्मान भारत–मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना’ के रूप में लागू है। केंद्र सरकार के myScheme पोर्टल के अनुसार, इसमें पात्र परिवारों को हर साल ₹15 लाख तक का स्वास्थ्य कवर मिलता है। पहले ₹1 लाख तक का खर्च बीमा कंपनी उठाती है और बाकी राशि सरकार ट्रस्ट मोड में देती है।
• कौन ले सकता है : झारखंड के निवासी, जिनके पास पिंक (लाल), पीला या हरा राशन कार्ड है
• गंभीर बीमारियां : मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के तहत 21 गंभीर बीमारियों का इलाज भी शामिल है
• ध्यान रखें : अबुआ योजना का बढ़ा हुआ लाभ केवल झारखंड के सूचीबद्ध अस्पतालों में मिलता है
रांची सदर अस्पताल ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के सफल क्रियान्वयन में देशभर में पहला स्थान (नंबर-1 जिला अस्पताल) प्राप्त कर एक बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया है। इस बड़ी उपलब्धि के साथ-साथ, झारखंड सरकार ने निजी अस्पतालों द्वारा बकाया बिल के नाम पर शव को रोकने की अमानवीय प्रथा पर भी ₹5 लाख तक के जुर्माने का कड़ा प्रावधान लागू किया है।
घर बैठे ऐसे बनवाएं आयुष्मान कार्ड
1. Google Play Store से आयुष्मान ऐप डाउनलोड करें या beneficiary.nha.gov.in पर जाएं।
2. आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर आए OTP से लॉगिन करें।
3. आधार या राशन कार्ड नंबर से अपना नाम खोजें। पात्रता mera.pmjay.gov.in पर भी जांची जा सकती है।
4. नाम मिलने पर आधार e-KYC पूरा करें।
5. मंजूरी मिलने के बाद कार्ड डाउनलोड करें। 70+ बुजुर्ग इसी ऐप या पोर्टल पर वय वंदना कार्ड का विकल्प चुनकर खुद पंजीकरण कर सकते हैं।
झारखंड का अबुआ कार्ड bis.jharkhand.gov.in पर राशन कार्ड नंबर डालकर डाउनलोड किया जा सकता है। ऑनलाइन दिक्कत हो तो नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या सूचीबद्ध अस्पताल के आयुष्मान मित्र से मदद लें।
जरूरी दस्तावेज : आधार कार्ड, राशन कार्ड और आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर।
अस्पताल में इलाज कैसे होगा?
सूचीबद्ध अस्पताल के आयुष्मान डेस्क पर कार्ड और आधार दिखाएं। अस्पताल आपकी पात्रता जांचकर इलाज की मंजूरी (प्री-ऑथराइजेशन) के लिए ऑनलाइन अनुरोध भेजेगा। मंजूरी के बाद इलाज का खर्च सीधे योजना से चुकाया जाता है, मरीज को पैसे नहीं देने होते।
शिकायत या जानकारी के लिए: आयुष्मान भारत हेल्पलाइन 14555 (24×7) पर कॉल करें। वय वंदना कार्ड की जानकारी के लिए 1800-110-770 पर मिस्ड कॉल भी दे सकते हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 48 करोड़ से ज्यादा आयुष्मान कार्ड बन चुके हैं और देश के 38,000 से ज्यादा सूचीबद्ध अस्पतालों में करीब 13 करोड़ अस्पताल भर्तियों का खर्च योजना से उठाया गया है। अगर आपके परिवार में किसी का कार्ड अब तक नहीं बना है, तो आज ही अपना नाम जांचें। जरूरत के समय यही कार्ड सबसे बड़ा सहारा बन सकता है।


