रांची: झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने बुधवार को रांची के नामकुम स्थित दीपशिखा संस्था के नवनिर्मित सूचना केंद्र का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने संस्था की विभिन्न गतिविधियों का अवलोकन किया और बच्चों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। राज्यपाल ने संस्था की टीम को बधाई देते हुए दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। साथ ही, उन्होंने संस्था को अपने विवेकाधीन अनुदान मद से एक लाख रुपये देने की घोषणा की।
दिव्यांगजनों में प्रतिभा की कमी नहीं: राज्यपाल
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि दिव्यांगजनों में प्रतिभा और क्षमता की कोई कमी नहीं है। उन्हें उचित अवसर और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाए, तो वे विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन अपनी क्षमता के बल पर समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
राज्यपाल ने दिव्यांगजनों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य, खेलकूद और रोजगार के क्षेत्र में समान अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।
सम्मान और समान अवसर देना समाज की जिम्मेदारी
राज्यपाल ने कहा कि दिव्यांगजनों को सम्मान, समान अवसर और आत्मनिर्भरता प्रदान करना केवल सरकार की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके लिए सरकार, प्रशासन, सामाजिक संस्थाओं और नागरिकों को मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने दीपशिखा संस्था की ओर से दिव्यांगजनों के हित में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि संस्था भविष्य में भी उनके विकास और सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी।
संस्था को एक लाख रुपये देने की घोषणा
इस अवसर पर राज्यपाल ने दीपशिखा संस्था को अपने विवेकाधीन अनुदान मद से एक लाख रुपये देने की घोषणा की। उनके इस निर्णय को संस्था के कार्यों को प्रोत्साहन देने और दिव्यांगजनों के कल्याण के प्रयासों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने बच्चों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया और संस्था की गतिविधियों की जानकारी ली। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों की क्षमताओं को पहचानने, उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराने और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रोत्साहित करने के महत्व को रेखांकित करना रहा।


