AI डीपफेक और अश्लील तस्वीरों के नाम पर वसूली करने वालों से निपटने के लिए StopNCII.org, cybercrime.gov.in और 1930 की लें मदद; सबूत सुरक्षित रखें, पैसे न दें
रांची। सोशल मीडिया से तस्वीरें चुराकर उन्हें एडिट करने, AI डीपफेक के जरिए अश्लील रूप देने और फिर निजी फोटो-वीडियो लीक करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करने के मामले साइबर सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन रहे हैं। ऐसे मामलों में कई पीड़ित डर, सामाजिक बदनामी और परिवार की प्रतिक्रिया के कारण शिकायत करने से हिचकते हैं। जबकि निजी तस्वीरों के दुरुपयोग और ऑनलाइन उत्पीड़न से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर शिकायत और कंटेंट हटवाने की व्यवस्था उपलब्ध है। ये सुविधाएं झारखंड के लोगों के लिए भी लागू हैं।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की ओर से नवंबर 2025 में जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत, निर्धारित श्रेणी की गैरकानूनी निजी तस्वीरों या वीडियो की शिकायत मिलने पर संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को 24 घंटे के भीतर सामग्री हटाने या उसकी पहुंच रोकने की कार्रवाई करनी होती है। हालांकि, यह समयसीमा हर तरह की ऑनलाइन शिकायत पर स्वतः लागू नहीं होती। मामला किस श्रेणी में आता है और शिकायत किस प्रक्रिया के तहत की गई है, यह महत्वपूर्ण है।
कैसे जाल में फंसाते हैं साइबर अपराधी?
साइबर अपराधी इंस्टाग्राम, फेसबुक और लिंक्डइन जैसे प्लेटफॉर्म से लोगों की सामान्य तस्वीरें हासिल कर सकते हैं। इसके बाद फोटो एडिटिंग या AI डीपफेक तकनीक के जरिए उन्हें आपत्तिजनक रूप दिया जाता है। फिर तस्वीरें सार्वजनिक करने की धमकी देकर पैसे, और तस्वीरें या दूसरी अनुचित मांगें की जाती हैं।
विशेषज्ञों की सलाह है कि ऐसी धमकियों के दबाव में पैसे न दें। भुगतान करने से ब्लैकमेलिंग रुकने की गारंटी नहीं होती और अपराधी आगे भी मांग कर सकते हैं। पीड़ित को जल्द से जल्द डिजिटल सबूत सुरक्षित कर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
निजी तस्वीरें लीक हों तो सबसे पहले क्या करें?
1. सबूत सुरक्षित रखें: धमकी वाले संदेश, चैट, स्क्रीनशॉट, संबंधित पोस्ट का लिंक, अकाउंट का नाम और उपलब्ध लेन-देन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। शिकायत करने से पहले जरूरी सबूत न मिटाएं। संभव हो तो मूल फाइल और संदेशों की कॉपी भी सुरक्षित रखें।
2. कंटेंट हटाने के लिए रिपोर्ट करें: जिस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तस्वीर या वीडियो अपलोड किया गया है, वहां उसकी रिपोर्ट करें। संबंधित प्लेटफॉर्म के शिकायत अधिकारी या उपलब्ध सहायता व्यवस्था का इस्तेमाल करें।
3. राष्ट्रीय पोर्टल पर शिकायत करें: cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। महिलाओं और बच्चों से जुड़े साइबर अपराधों के लिए उपयुक्त श्रेणी चुनें। पोर्टल पर उपलब्ध विकल्पों के अनुसार शिकायत दर्ज करें और उसकी संदर्भ संख्या सुरक्षित रखें।
4. हेल्पलाइन की मदद लें: साइबर अपराध की शिकायत के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 उपलब्ध है। विशेष रूप से ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी में जल्द कॉल करना महत्वपूर्ण है। तत्काल खतरे या आपात स्थिति में 112 पर संपर्क करें।
5. पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं: नजदीकी थाने या साइबर थाने में शिकायत दी जा सकती है। जरूरत पड़ने पर जीरो FIR का विकल्प भी उपलब्ध है, जिसके तहत क्षेत्राधिकार का हवाला देकर शिकायत दर्ज करने से इनकार नहीं किया जाना चाहिए।
क्या है StopNCII.org और कैसे करता है मदद?
StopNCII.org एक मुफ्त अंतरराष्ट्रीय सेवा है, जिसका उद्देश्य अंतरंग तस्वीरों के बिना सहमति प्रसार को रोकने में मदद करना है। यह तस्वीरों का डिजिटल फिंगरप्रिंट यानी हैश तैयार करने की तकनीक का इस्तेमाल करता है। इस प्रक्रिया में तस्वीर मूल रूप से उपयोगकर्ता के डिवाइस पर रहती है; उसका डिजिटल फिंगरप्रिंट तैयार किया जाता है। सहभागी प्लेटफॉर्म इस तकनीक की मदद से मिलती-जुलती सामग्री पहचानकर अपनी नीतियों के अनुसार उसे हटाने या दोबारा अपलोड होने से रोकने की कार्रवाई कर सकते हैं।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि StopNCII.org हर वेबसाइट या इंटरनेट के हर हिस्से से तस्वीर हटाने की गारंटी नहीं देता। इसकी उपयोगिता सहभागी प्लेटफॉर्म और सेवा की पात्रता पर निर्भर करती है। यह मुख्य रूप से 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों की अंतरंग तस्वीरों के मामलों के लिए है।
यदि तस्वीर में दिखने वाला व्यक्ति तस्वीर लिए जाने के समय 18 वर्ष से कम उम्र का था, तो Take It Down जैसे विशेष टूल की मदद ली जा सकती है। नाबालिगों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री को डाउनलोड या किसी दूसरे व्यक्ति को भेजने से बचें।
24 घंटे में कंटेंट हटाने का नियम क्या कहता है?
MeitY की नवंबर 2025 की SOP में निर्धारित परिस्थितियों में शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर संबंधित सामग्री हटाने या उसकी पहुंच रोकने की प्रक्रिया का प्रावधान बताया गया है। इसके साथ ही हैश-मैचिंग और क्रॉलर जैसी तकनीकों के इस्तेमाल तथा भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के ‘सहयोग’ पोर्टल के साथ तालमेल पर भी जोर दिया गया है।
पीड़ित राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल, सोशल मीडिया ऐप के रिपोर्ट विकल्प, संबंधित सहायता केंद्र या स्थानीय पुलिस के माध्यम से शिकायत कर सकते हैं। कंटेंट हटाने की कार्रवाई और अपराधी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई दो अलग प्रक्रियाएं हैं। इसलिए केवल पोस्ट हट जाने के बाद शिकायत वापस लेना जरूरी नहीं है।
झारखंड में कहां करें शिकायत?
झारखंड में निजी तस्वीरें हटवाने के लिए अलग राज्य-स्तरीय वेबसाइट न होने का अर्थ यह नहीं है कि यहां के नागरिकों के पास कोई उपाय नहीं है। राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल, हेल्पलाइन और StopNCII.org जैसी सुविधाएं राज्य के लोगों के लिए भी उपलब्ध हैं।
झारखंड पुलिस का CID साइबर क्राइम थाना 21 मार्च 2016 से कार्यरत है। सितंबर 2017 में राज्य के सभी 24 जिलों में साइबर थाने स्थापित करने का फैसला भी लिया गया था। ऐसे मामलों में पीड़ित स्थानीय पुलिस या उपलब्ध साइबर अपराध इकाई से संपर्क कर सकते हैं। शिकायत कहां और किस प्रक्रिया के तहत दर्ज होगी, इसकी जानकारी संबंधित पुलिस इकाई से ली जा सकती है।
किन कानूनों के तहत हो सकती है कार्रवाई?
मामले की प्रकृति, पीड़ित की उम्र, तस्वीर के प्रकार और अपराध के अन्य तथ्यों के आधार पर अलग-अलग कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं।
- IT एक्ट की धारा 66E: किसी व्यक्ति की निजी तस्वीर या दृश्य को उसकी निजता का उल्लंघन करते हुए कैद करने या प्रसारित करने से संबंधित प्रावधान।
- IT एक्ट की धारा 67 और 67A: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री या यौन रूप से स्पष्ट सामग्री के प्रकाशन और प्रसारण से संबंधित प्रावधान।
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 77: ताक-झांक यानी वॉयूरिज्म से संबंधित प्रावधान।
- BNS की धारा 308: जबरन वसूली से संबंधित प्रावधान, जो तथ्यों के आधार पर ब्लैकमेलिंग के मामलों में लागू हो सकता है।
कौन-सी धारा लागू होगी, यह पुलिस की जांच और मामले के तथ्यों पर निर्भर करता है।
जागरूकता और गोपनीयता भी जरूरी
ऐसे मामलों से निपटने के लिए केवल तकनीकी व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। झारखंड में स्कूल-कॉलेजों और ग्रामीण क्षेत्रों तक साइबर सुरक्षा की जानकारी पहुंचाना, स्थानीय भाषाओं में जागरूकता अभियान चलाना, प्रशिक्षित महिला अधिकारियों की उपलब्धता बढ़ाना और पीड़ितों की पहचान गोपनीय रखने की व्यवस्था मजबूत करना भी महत्वपूर्ण है।
सोशल मीडिया पर StopNCII.org को किसी राज्य सरकार की विशेष योजना बताने वाले दावों पर भी सावधानी बरतनी चाहिए। यह एक अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म है, जबकि cybercrime.gov.in और 1930 भारत सरकार की राष्ट्रीय साइबर अपराध संबंधी सुविधाएं हैं।
याद रखें: पैसे न दें, सबूत सुरक्षित रखें और शिकायत करने में देर न करें। निजी तस्वीरों का दुरुपयोग पीड़ित की गलती नहीं है। डर या शर्म के कारण चुप रहने के बजाय उपलब्ध तकनीकी और कानूनी सहायता लेना ही सबसे जरूरी कदम है।


