दुमका: झारखंड में आउटसोर्सिंग के तहत काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों का 12 महीने से वेतन लंबित होने का मामला सामने आया है। बकाया भुगतान की मांग को लेकर गुरुवार, 29 अक्टूबर को पैरामेडिकल स्टाफ एसोसिएशन, झारखंड के बैनर तले सैकड़ों कर्मियों ने दुमका स्थित श्रम अधीक्षक कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान कर्मी हाथों में झाड़ू, कुदाल और धम्मा लेकर पहुंचे और सांकेतिक श्रमदान कर विरोध जताया। कर्मियों का कहना है कि लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
इस आंदोलन का नेतृत्व गोड्डा के पूर्व विधायक अमित मंडल ने किया। प्रदर्शन को समर्थन देने के लिए दुमका के पूर्व सांसद सुनील सोरेन, भाजपा जिलाध्यक्ष रुपेश मंडल और भाजपा के सैकड़ों कार्यकर्ता भी मौके पर मौजूद रहे।
सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर लगाए आरोप
पूर्व विधायक अमित मंडल ने कहा कि पारा मेडिकल कर्मी पिछले 12 महीने से बिना वेतन के काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इन कर्मियों ने कोरोना से लेकर मलेरिया तक के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर सेवाएं दी हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें वेतन नहीं मिला। उन्होंने कहा कि वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मियों को अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण करने में परेशानी हो रही है। इसी के विरोध में श्रमदान आंदोलन शुरू किया गया है।
मंडल ने स्वास्थ्य विभाग की आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि कमीशनखोरी करने वाली कंपनियों को संरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर डॉक्टरों की बर्खास्तगी को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर महीनों से बिना वेतन काम कर रहे पारा मेडिकल कर्मियों का बकाया भुगतान नहीं कराया जा रहा है।
उन्होंने श्रम मंत्री संजय यादव और श्रम अधीक्षक कार्यालय की भूमिका पर भी सवाल उठाए। मंडल ने इसे श्रमिकों के हितों की अनदेखी करार दिया। ये आरोप पूर्व विधायक ने प्रदर्शन के दौरान लगाए।
एसोसिएशन की तीन प्रमुख मांगें
पैरामेडिकल स्टाफ एसोसिएशन ने बकाया वेतन भुगतान और आउटसोर्सिंग व्यवस्था में सुधार को लेकर तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।
- 12 महीने का बकाया वेतन: बिरसा सिक्योरिटी, शिवा प्रोटेक्शन, कमांडो और BMR सहित संबंधित आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से काम करने वाले कर्मियों का बकाया वेतन एकमुश्त HRIS के जरिए सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाए।
- आउटसोर्सिंग एजेंसियों पर कार्रवाई: संबंधित एजेंसियों के खिलाफ आर्थिक अपराध (EOE) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें काली सूची में डाला जाए।
- श्रमिक सुविधाएं: सभी कर्मियों को EPF, ESIC और न्यूनतम मजदूरी का लाभ सुनिश्चित किया जाए।
सात दिनों का अल्टीमेटम, हड़ताल की चेतावनी
एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर बकाया वेतन का भुगतान नहीं किया गया, तो संथाल परगना सहित पूरे झारखंड में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। इसके साथ ही उपायुक्त कार्यालय के समक्ष झाड़ू और कुदाल लेकर अनशन करने की भी चेतावनी दी गई है।
फिलहाल, आंदोलनकारियों की मुख्य मांग 12 महीने से लंबित वेतन का भुगतान है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।


