राशि आवंटन के बावजूद भुगतान प्रक्रिया में पेच, वेंडर बनाने की अनिवार्यता से बढ़ी परेशानी; शिक्षक संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी
रांची। सरकारी स्कूलों में बच्चों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभा रहे हेडमास्टर सात माह से आर्थिक संकट झेल रहे हैं. योजना की राशि समय पर नहीं मिलने के कारण वे अपनी जेब और उधारी के सहारे बच्चों की थाली भर रहे हैं. मुख्यालय से करीब एक माह पहले राशि जिला कार्यालयों को हस्तांतरित किए जाने के बावजूद विद्यालयों तक भुगतान की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है. वेंडर पंजीकरण की अनिवार्यता और भुगतान संबंधी जटिल नियमों ने शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.
प्रक्रिया के तहत प्रत्येक प्रखंड संसाधन केंद्र में प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी को वेंडर का पंजीकरण करना है. इसके बाद ही संबंधित दुकानदार को भुगतान किया जा सकेगा. लेकिन रांची जिले के किसी भी प्रखंड में अब तक वेंडर पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू नहीं होने की बात सामने आयी है. इससे विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को पहले किए गए खर्च की भरपाई को लेकर भी चिंता सता रही है.
नकद खर्च की भरपाई पर संशय
हेडमास्टरों के मुताबिक, ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में हरी सब्जियां, मसाले और अन्य सामग्री हाट-बाजार से नकद खरीदी जाती हैं. वहां जीएसटी बिल या औपचारिक वेंडर पंजीकरण की व्यवस्था नहीं होती. वहीं, गैस सिलेंडर और राशन दुकानदारों से उधार लेकर भोजन संचालित करने के बाद शिक्षक वेतन मिलने पर कर्ज चुकाते हैं. इसके बावजूद विभागीय स्तर पर शिक्षकों के व्यक्तिगत खर्च की प्रतिपूर्ति को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं हैं. भुगतान सीधे पंजीकृत दुकानदारों को किए जाने की बात कही जा रही है.
आंदोलन की चेतावनी
अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने इस स्थिति पर कड़ा रोष जताया है. संघ के मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद ने कहा कि विभाग की कार्यशैली शिक्षकों के मानसिक और आर्थिक दोहन के समान है. संघ ने चेतावनी दी है कि भुगतान प्रक्रिया सरल कर शिक्षकों के खर्च की प्रतिपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गयी, तो अगले महीने से हेडमास्टर मध्याह्न भोजन संचालन के प्रभार से अलग हो जाएंगे. इसके बाद संघ चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा.


