रांची: राजधानी रांची की सड़कों, चौक-चौराहों और बाजारों में नजर आने वाले पीले-नीले रंग के मॉड्यूलर टॉयलेट अब धीरे-धीरे इतिहास बनने वाले हैं। इनकी जगह आधुनिक और स्थायी सार्वजनिक शौचालय बनाए जाएंगे। रांची नगर निगम ने शहर की सार्वजनिक स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 135 नए टॉयलेट बनाने की योजना तैयार की है। इनमें पब्लिक टॉयलेट, कम्युनिटी टॉयलेट और एस्पिरेशनल टॉयलेट शामिल होंगे। खास बात यह है कि नए शौचालय केवल पक्के भवन नहीं होंगे, बल्कि इनमें महिलाओं, बच्चों और थर्ड जेंडर के लिए भी विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी है।

50 कम्युनिटी, 65 पब्लिक और 20 एस्पिरेशनल टॉयलेट बनेंगे
नगर निगम की योजना के मुताबिक, शहर में कुल 135 स्थायी सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराया जाएगा। इनमें 50 कम्युनिटी टॉयलेट, 65 पब्लिक टॉयलेट और 20 एस्पिरेशनल टॉयलेट शामिल हैं। इसके अलावा सभी वार्डों में पांच-पांच व्यक्तिगत शौचालय बनाने की भी योजना है।
इस योजना का उद्देश्य सिर्फ शौचालयों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि बाजारों, व्यस्त सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को बेहतर स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए नगर निगम ने डिजाइन तैयार कर नगर विकास विभाग को भेजा है। योजना के तहत पब्लिक और कम्युनिटी टॉयलेट के निर्माण पर प्रति यूनिट करीब 30 लाख रुपये, जबकि एस्पिरेशनल टॉयलेट पर करीब 32 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।
महिलाओं के लिए फीडिंग रूम, थर्ड जेंडर के लिए अलग शौचालय
नए टॉयलेट पुराने मॉड्यूलर ढांचे से बिल्कुल अलग होंगे। इन्हें स्थायी भवन के रूप में विकसित किया जाएगा। इनमें महिला, पुरुष और थर्ड जेंडर के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था होगी। महिलाओं की सुविधा के लिए फीडिंग रूम बनाया जाएगा, जहां माताएं अपने छोटे बच्चों को सुरक्षित तरीके से स्तनपान करा सकेंगी। बच्चों के लिए भी चाइल्ड फ्रेंडली सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
एस्पिरेशनल टॉयलेट में सुविधाओं का दायरा और व्यापक होगा। यहां शौचालय के साथ स्नान करने की व्यवस्था भी रहेगी। इसके अलावा सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन, इस्तेमाल किए गए पैड के सुरक्षित निस्तारण की सुविधा और सीसीटीवी कैमरे लगाने का भी प्रस्ताव है। इससे बाजारों, बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर आने वाले लोगों को एक ही परिसर में कई जरूरी सुविधाएं मिल सकेंगी।
चोरी और गंदगी से परेशान निगम, अब कर्मचारी संभालेंगे व्यवस्था
शहर में पहले से लगाए गए मॉड्यूलर टॉयलेट लंबे समय से नगर निगम के लिए चुनौती बने हुए हैं। कई जगह इनके नल, वॉशबेसिन, पाइप, लाइट और दरवाजों के हैंडल तक चोरी हो चुके हैं। कहीं पानी की व्यवस्था खराब है तो कहीं नियमित सफाई नहीं होने के कारण लोग इनका इस्तेमाल करने से कतराते हैं।
मॉड्यूलर टॉयलेट की एक बड़ी समस्या इनके रखरखाव की भी है। लगातार सफाई और निगरानी के लिए कर्मचारियों की स्थायी तैनाती नहीं हो पाती। इसी समस्या को देखते हुए निगम अब नए शौचालयों को सुलभ शौचालयों की तर्ज पर विकसित करने की तैयारी में है। इनके निर्माण के बाद संचालन और सफाई के लिए नियमित कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी।
10-12 साल पुराने मॉड्यूलर टॉयलेट हटेंगे, नए साल में बदलाव का लक्ष्य
मॉड्यूलर टॉयलेट एल्युमीनियम कंपोजिट पैनल (ACP) से बनाए जाते हैं। इनकी अनुमानित उपयोग अवधि करीब 10 से 12 साल होती है। रांची में कई पुराने टॉयलेट खराब हो चुके हैं और उनकी मरम्मत पर लगातार खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में नगर निगम इन्हें चरणबद्ध तरीके से हटाकर स्थायी शौचालय बनाने की योजना पर काम कर रहा है। हालांकि, जो मॉड्यूलर टॉयलेट अभी उपयोगी हैं, उन्हें नई व्यवस्था तैयार होने तक इस्तेमाल किया जाता रहेगा।
नगर विकास विभाग की ओर से योजना को आगे बढ़ाने के लिए तीन से चार महीने की समय-सीमा दिए जाने की जानकारी है। निगम का लक्ष्य नए साल में शहरवासियों को नई शौचालय सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम पूरा करना है।
QR कोड से मिलेगी सफाई की जानकारी, डिजिटल फीडबैक की भी व्यवस्था
नए शौचालयों में सफाई, पानी और रखरखाव की निगरानी के लिए डिजिटल फीडबैक सिस्टम भी प्रस्तावित है। इसके तहत प्रत्येक टॉयलेट में क्यूआर कोड लगाया जा सकता है। इसे स्कैन कर लोग साफ-सफाई और उपलब्ध सुविधाओं को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दे सकेंगे। इससे निगम को कमियों की जानकारी मिलेगी और व्यवस्था में सुधार करना आसान होगा।
रांची नगर निगम की हेल्थ ऑफिसर डॉ. किरण कुमारी के मुताबिक, टॉयलेट निर्माण की जिम्मेदारी इंजीनियरिंग सेक्शन की होगी, जबकि निर्माण पूरा होने के बाद इनके संचालन की जिम्मेदारी निगम का स्वच्छता विभाग संभालेगा। बजट और निर्धारित डिजाइन के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
हालांकि, रांची में सार्वजनिक शौचालयों की समस्या सिर्फ निर्माण तक सीमित नहीं है। पानी की उपलब्धता, नियमित सफाई, सुरक्षा और रखरखाव भी बड़ी चुनौती रही है। ऐसे में 135 नए स्थायी टॉयलेट की योजना कितनी सफल होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि निगम इनके निर्माण के साथ-साथ संचालन की व्यवस्था को कितना मजबूत बनाता है।


