रांची: दिवाली की रौनक के बीच घर-घर में छठ की तैयारी शुरू हो चुकी है। ठेकुआ का आटा, सूप-दउरा, ईख और नई साड़ी के साथ सबसे बड़ी फिक्र होती है घर पहुंचने की। झारखंड से हर साल लाखों लोग छठ मनाने बिहार और पूर्वी यूपी जाते हैं, और इस बार भी ट्रेनों में भारी भीड़ है।

राहत की बात यह है कि रेलवे ने झारखंड के रास्ते कई स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं। साथ ही, चार दिन के इस महापर्व में व्रती करीब 36 घंटे का निर्जला उपवास रखते हैं, इसलिए सेहत का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। इस खबर में दोनों बातें, एक साथ।
छठ 2026: कब क्या है
पंचांग के अनुसार इस साल छठ महापर्व की तिथियां इस तरह हैं:
• 13 नवंबर (शुक्रवार): नहाय-खाय
• 14 नवंबर (शनिवार): खरना, शाम के प्रसाद के बाद निर्जला व्रत शुरू
• 15 नवंबर (रविवार): संध्या अर्घ्य, डूबते सूर्य को अर्घ्य (रांची में सूर्यास्त करीब शाम 5:04 बजे)
• 16 नवंबर (सोमवार): उषा अर्घ्य, उगते सूर्य को अर्घ्य और पारण (रांची में सूर्योदय करीब सुबह 6:03 बजे)
घाट पर अर्घ्य का सटीक समय अपनी छठ घाट समिति या पंडित जी से एक बार जरूर पूछ लें, क्योंकि जगह के हिसाब से कुछ मिनट का फर्क हो सकता है।
झारखंड से चलने वाली छठ स्पेशल ट्रेनें
1. रांची–पूर्णिया कोर्ट स्पेशल (08625/08626)
• रांची से हर शुक्रवार, 6, 13 और 20 नवंबर को शाम 6 बजे खुलेगी, अगले दिन सुबह 11:30 बजे पूर्णिया कोर्ट पहुंचेगी।
• वापसी में पूर्णिया कोर्ट से हर शनिवार, 7, 14 और 21 नवंबर को दोपहर 3 बजे चलेगी, अगले दिन सुबह 9:45 बजे रांची पहुंचेगी।
• ठहराव: मुरी, बोकारो स्टील सिटी, धनबाद, देवघर, भागलपुर, मुंगेर, सहरसा।
• कुल 22 कोच: 3 एसी थ्री-टियर, 13 स्लीपर, 4 जनरल।
• छठ से पहले घर पहुंचने के लिए 13 नवंबर की ट्रेन आखिरी मौका है।
2. रांची–वाराणसी–प्रयागराज रामबाग स्पेशल
• रांची से हर शुक्रवार, 6 से 20 नवंबर तक, शाम 6:25 बजे खुलेगी।
• शनिवार सुबह 4:40 बजे वाराणसी और 7:30 बजे प्रयागराज रामबाग पहुंचेगी।
• वापसी में प्रयागराज रामबाग से हर शनिवार, 7 से 21 नवंबर तक, सुबह 10:30 बजे चलेगी।
• रास्ता: लोहरदगा, टोरी, डालटनगंज, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन। पलामू और लोहरदगा के यात्रियों के लिए भी फायदेमंद।
3. रांची होकर झंझारपुर स्पेशल
6 से 20 नवंबर के बीच हर शुक्रवार, तीन फेरे।
• रास्ता: मुरी, बोकारो, धनबाद, बरौनी, दरभंगा होते हुए झंझारपुर। मिथिला जाने वालों के लिए सबसे काम की ट्रेन।
4. टाटानगर–लाभा स्पेशल
• टाटानगर से हर गुरुवार: 5, 12 और 19 नवंबर।
• लाभा से वापसी हर शुक्रवार: 6, 13 और 20 नवंबर।
• जमशेदपुर और कोल्हान के यात्रियों के लिए।
5. बरौनी–दुर्ग स्पेशल (08756)
• बरौनी से 5, 12 और 19 नवंबर को।
• झारखंड में ठहराव: जसीडीह, मधुपुर, धनबाद, चंद्रपुरा, बोकारो स्टील सिटी।
• छठ के बाद काम पर लौटने वाले छत्तीसगढ़ के यात्रियों के लिए उपयोगी।
इनके अलावा दक्षिण पूर्व रेलवे ने शालीमार–दरभंगा स्पेशल और अपनी छह पुरानी स्पेशल ट्रेनों के फेरे दिसंबर तक बढ़ाने की भी घोषणा की है।
इन ट्रेनों के रद्द होने का रखें ध्यान
चक्रधरपुर रेल मंडल में चल रहे काम की वजह से कुछ ट्रेनें इन दिनों नहीं चलेंगी:
• हटिया–झारसुगुड़ा मेमू (18175/18176): 5 से 11 नवंबर तक रद्द
• हटिया–राउरकेला पैसेंजर (58659): 5 से 11 नवंबर तक रद्द
• राउरकेला–हटिया पैसेंजर (58660): 6 से 12 नवंबर तक
रद्द सफर से पहले ये 6 बातें याद रखें
• टिकट से पहले कन्फर्म करें: स्पेशल ट्रेनों का समय बदल सकता है। निकलने से पहले NTES ऐप, IRCTC या रेलवे हेल्पलाइन 139 पर ट्रेन नंबर से स्टेटस देख लें।
• दलालों से बचें: “कन्फर्म टिकट दिला देंगे” वाले कॉल और व्हाट्सऐप मैसेज से सावधान। टिकट सिर्फ IRCTC या स्टेशन काउंटर से लें।
• पटाखे और ज्वलनशील सामान नहीं: दिवाली के बाद सफर हो रहा है, लेकिन ट्रेन में पटाखे, गैस सिलेंडर या केरोसिन ले जाना अपराध है।
• बुजुर्गों की दवा हाथ के बैग में: बीपी, शुगर, थायरॉयड की दवा और पर्ची बड़े बैग में नहीं, हाथ वाले बैग में रखें।
ठेकुआ और प्रसाद की पैकिंग
एयरटाइट डिब्बे में रखें, ताकि सफर में खराब न हो।
• भीड़ में बच्चों का ध्यान: बच्चे की जेब में घर का पता और मोबाइल नंबर लिखी पर्ची रख दें।
• चलती ट्रेन में न चढ़ें: भीड़ कितनी भी हो, गेट पर लटककर सफर न करें।
व्रतियों के लिए हेल्थ टिप्स
36 घंटे का निर्जला व्रत आसान नहीं
खरना के प्रसाद के बाद से उषा अर्घ्य तक व्रती पानी की एक बूंद भी नहीं लेते। ऊपर से नवंबर की ठंड, सुबह-शाम घंटों पानी में खड़े रहना और कई दिनों की तैयारी की थकान। ज्यादातर स्वस्थ लोग यह व्रत आराम से कर लेते हैं, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
व्रत से पहले की तैयारी
• नहाय-खाय और खरना के दिन खूब पानी पिएं: इन दो दिनों में शरीर में पानी की कमी न होने दें। नारियल पानी, छाछ और सादा पानी अच्छे विकल्प हैं।
• खरना का प्रसाद संतुलित खाएं: गुड़ की खीर और रोटी के साथ थोड़ा केला लें। एक साथ बहुत ज्यादा न खाएं, वरना अगले दिन प्यास और बेचैनी बढ़ सकती है।
• नींद पूरी करें: ठेकुआ बनाने के चक्कर में रात भर जागने से व्रत के दौरान चक्कर आने का खतरा बढ़ता है।
इन लोगों को पहले डॉक्टर से बात करनी चाहिए
• डायबिटीज के मरीज: खासकर जो इंसुलिन या शुगर कम करने वाली गोलियां लेते हैं। बिना खाए-पिए दवा लेने से शुगर अचानक बहुत नीचे जा सकती है। दवा की खुराक डॉक्टर से तय करवाएं।
• बीपी और दिल के मरीज: बीपी की दवा बिना डॉक्टर की सलाह के न छोड़ें।
• किडनी या पथरी के मरीज: लंबे समय तक पानी न पीना इनके लिए जोखिम भरा हो सकता है।
• गर्भवती महिलाएं और बहुत बुजुर्ग व्रती: इनके लिए निर्जला व्रत में डॉक्टर की राय जरूरी है।
घाट पर ठंड से बचाव
• उषा अर्घ्य के समय सुबह का तापमान काफी नीचे रहता है। पानी में जरूरत से ज्यादा देर खड़े न रहें।
• घाट पर सूखे कपड़े, शॉल और तौलिया साथ रखें। अर्घ्य के तुरंत बाद गीले कपड़े बदल लें।
• गहरे पानी में न उतरें, और बच्चों को घाट के किनारे अकेला न छोड़ें।
ये लक्षण दिखें तो तुरंत ध्यान दें
तेज चक्कर, बेहोशी जैसा लगना, घबराहट, दिल की धड़कन बहुत तेज होना, सीने में दर्द, उलझन या बोलने में लड़खड़ाहट। ऐसे में व्रती को तुरंत छांव या गर्म जगह पर बैठाएं, परिवार डॉक्टर को बुलाएं या 108 पर एंबुलेंस के लिए कॉल करें। आस्था के साथ जान की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
पारण कैसे करें
• व्रत तोड़ते समय पहले थोड़ा-थोड़ा करके पानी या शरबत लें।
• फिर हल्का खाना खाएं। 36 घंटे बाद एक साथ ढेर सारा ठेकुआ या तला-भुना खाने से पेट खराब हो सकता है।
• दिन भर में धीरे-धीरे पानी पीते रहें।
छठ आस्था, अनुशासन और परिवार के साथ का पर्व है। टिकट समय पर कन्फर्म करें, सफर में सावधानी रखें और व्रत में सेहत का ध्यान रखें, ताकि घाट पर अर्घ्य की खुशी में कोई कमी न रहे।
जय छठी मैया!


