
आपरेशन कांति: हेसला के कांति वाटरफॉल की चट्टानें बनी गवाह
कोबरा के 5 जवानों ने लगाया जान का दांव, थोड़ी सी चूक और बड़ा हादसा
कुख्यात नक्सली रविंद्र गंझू के इस आशियाने की घेराबंदी बन गई थी चुनौती
2 साल में रविन्द्र गंझू पर पहला ऑपरेशन, पुलिसकर्मियों की हत्या का यह आरोपी है दुर्दान्त
20 लाख के ईनामी नक्सली रविंद्र गंझू की गिरफ्तारी की गवाह लातेहार के हेसला गांव के पास स्थित कांति वाटरफॉल है. इस वाटरफॉल के नाम पर ही CRPF की कोबरा बटालियन ने इस ऑपरेशन का नाम ऑपरेशन कांति रखा. करीब 5 दिन तक कोबरा के 5 जवान सांसे थामकर अपनी जान दांव पर लगा कांति वाटरफॉल की चट्टानों से चिपके रहे. लगातार नज़रे टिकी थी रवींद्र गंझू के आशियाने पर. रविन्द्र की एक झलक मिली और बिजली की फुर्ती से पांचों कोबरा जवानों ने 20 लाख के ईनामी नक्सली को धर दबोचा. सालों से फरार चल रहे इस रविन्द्र गंझू पर CRPF और झारखंड पुलिस ने पहला ऑपरेशन प्लान किया था जो अपने अंजाम तक पहुंच गया.
कोबरा बटालियन की खामोशी ही उसकी सबसे बड़ी ताकत
कहते हैं कोबरा बटालियन की खामोशी ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है. CRPF को इंटेल मिली कि रविन्द्र लातेहार के हेसला गांव स्थित बांझीटोला में अपने घर आने वाला है. जाल बिछाया गया और जन दांव पर लगाने को तैयार हुए 5 कोबरा कमांडो. यह वो कोबरा कमांडो हैं जो घने जंगलों में कई-कई दिनों तक बिना किसी आहट के छिपे रह सकते हैं. उनका धैर्य, अनुशासन और सटीक समय पर कार्रवाई ही उन्हें नक्सल विरोधी अभियानों की सबसे प्रभावी फोर्स बनाती है. यही वजह है कि दुर्गम इलाकों में बड़े माओवादी कमांडरों की गिरफ्तारी और मुठभेड़ों में कोबरा की भूमिका अक्सर निर्णायक साबित होती है. कोबरा के कमांडो जंगल के रास्ते वाटरफॉल के पास अपना अस्थायी बेस तैयार करते हैं और शुरू होती है निगेहबानी.
5 दिन पूर्व ही आने की थी इंटेल
रविन्द्र गंझू के अपने घर आने की इंटेल 5 दिन पहले ही मिल चुकी थी. लेकिन रविन्द्र के कई घर हैं उनमें उसका एक पुराना घर भी है जो काफी चर्चित है. डिसीजन का टाइम था, CRPF के वरिष्ठ अधिकारियों ने निर्णय लिया कि कांति वाटरफॉल के समीप घने जंगल के बीच बना उसका यह घर उसके लिए सबसे सेफ है. प्लानिंग तैयार हुई और घर की घेराबंदी शुरू की गई.
पूरी बटालियन ने बना डाला आउटर सर्किल, घेराबंदी के भीतर उतारे गए 5 जवान
ज्यादा भीड़भाड़ से कहीं सूचना लीक ना हो जाए इसलिए पूरी कोबरा बटालियन ने जंगल का फायदा उठाते हुए बड़ा आउटर सर्किल बनाया और घेराबंदी कर डाली. लेकिन कांति वाटरफॉल के पास ठिकाना बनाया सिर्फ 5 कमांडो ने. ताकि अगर किसी की नजर भी पड़ जाए तो यह शक ना हो कि कोई बड़ी प्लानिंग है.
जंगल के रास्ते पैदल पहुंचा रविन्द्र, हथियारों से था लैस
4 दिन गुजर जाने के बाद जब उम्मीद दम तोड़ रही थी, शरीर थक चुका था लेकिन नजरें और हिम्मत ने अभी हार नहीं मानी थी. आखिरकार पांचवे दिन सोमवार की सुबह रविन्द्र गंझू हथियारों से लैस अपने घर के पास दिखाई दिया और शिकारी कोबरा कमांडो की आँखें चमक उठीं. जंगल के रास्ते पैदल ही रविन्द्र अपने घर पहुंचा था. टीम ने इंतजार किया और जैसे ही रविन्द्र घर से बाहर निकला कमांडो तेजी से हरकत में आए.
कंधे पर उठाकर भागे कोबरा कमांडो
मिनट भर के भीतर रविन्द्र को उठाया गया और कोबरा जवानों ने उसे कंधे पर उठाकर अपनी टीम की तरफ भागना शुरू किया. जल्द ही पूरी टीम ने रविन्द्र को गाड़ी में पैक किया और सेफ जोन की तरफ निकल पड़े. इस बीच दूसरी टीम ने उसके घर पर रेड किया जहां से हथियार बरामद कर लिए गए. रविन्द्र से पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए हैं.
कई ठेकेदार और सफेदपोश रडार पर
सोमवार को ही ED ने रविन्द्र गंझू से जुड़े संतोष कंस्ट्रक्शन पर शिकंजा कसते हुए कंपनी की 3.87 करोड़ की संपति जप्त कर ली है. इस कनेक्शन से और रविन्द्र गंझू से पूछताछ में कई और नामों का खुलासा हुआ है जो लगातार टेरर फंडिंग कर रहे थे. राजधानी समेत कई जिलों के सफेदपोश, कोयला व्यवसाई , ट्रांसपोर्टर और ठेकेदार अब सुरक्षा बलों के रडार पर हैं.



