रांची: झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के बीच सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन से जुड़े मिसिर बेसरा के बॉडीगार्ड शनिचरवा समेत 18 उग्रवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। सूत्रों के अनुसार, सभी उग्रवादी सुरक्षा एजेंसियों के संपर्क में आ चुके हैं और उन्होंने अपने हथियार भी पुलिस के हवाले कर दिए हैं। पुलिस मुख्यालय में इनके आत्मसमर्पण की औपचारिक घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है।
बड़े इनामी उग्रवादी भी शामिल
जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में 15 लाख रुपये का इनामी एक जोनल कमांडर, 5 से 10 लाख रुपये तक के इनामी कई सक्रिय उग्रवादी, एक रीजनल कमांडर, एक सब-जोनल कमांडर तथा एक करोड़ के इनामी शीर्ष माओवादी मिसिर बेसरा का बॉडीगार्ड शनिचरवा भी शामिल है। यह आत्मसमर्पण माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि हाल के महीनों में संगठन के कई अहम सदस्य या तो मारे गए हैं, गिरफ्तार हुए हैं या फिर मुख्यधारा में लौट चुके हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के बढ़ते दबाव का असर
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और आसपास के जंगलों में पिछले कई महीनों से झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ, कोबरा और झारखंड जगुआर की संयुक्त कार्रवाई लगातार जारी है। सुरक्षा बलों ने जंगलों में कई नए कैंप स्थापित किए हैं और माओवादी गतिविधियों को सीमित करने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। इसी दबाव के कारण बड़ी संख्या में उग्रवादी संगठन छोड़ रहे हैं।
मिसिर बेसरा पर शिकंजा लगातार कस रहा
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लगातार हो रहे आत्मसमर्पण से मिसिर बेसरा का नेटवर्क कमजोर होता जा रहा है। इससे पहले भी उसके दस्ते से जुड़े कई उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। पुलिस का दावा है कि संगठन के अंदर संसाधनों की कमी, लगातार हो रहे ऑपरेशन और पुनर्वास नीति के कारण माओवादी कैडर तेजी से मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
हथियार भी किए जमा
सूत्रों के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों ने अपने पास मौजूद हथियार और गोला-बारूद भी सुरक्षा एजेंसियों को सौंप दिए हैं। आत्मसमर्पण करने वालों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सहायता उपलब्ध कराई जाएगी ताकि वे सामान्य जीवन शुरू कर सकें। हालांकि पुलिस ने सभी उग्रवादियों की पहचान और उनके खिलाफ दर्ज मामलों की विस्तृत जानकारी औपचारिक कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक करने की बात कही है।
नक्सल अभियान निर्णायक मोड़ पर
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2026 में झारखंड में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान ने निर्णायक मोड़ ले लिया है। लगातार मुठभेड़ों, गिरफ्तारियों और आत्मसमर्पण की घटनाओं से माओवादी संगठन की पकड़ कमजोर हुई है। सुरक्षा एजेंसियां अब शेष शीर्ष नेताओं की तलाश में बड़े पैमाने पर अभियान चला रही हैं।


