2026-27 की पहली तिमाही में 31% राजस्व संग्रह, विभागीय मंत्री योगेंद्र प्रसाद बोले- इस बार तय लक्ष्य 4600 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व मिलने की उम्मीद

रांची:झारखंड उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में राजस्व संग्रह के मामले में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। विभाग ने निर्धारित लक्ष्य से करीब 200 करोड़ रुपये अधिक राजस्व अर्जित कर राज्य सरकार के खजाने को मजबूत किया है। विभाग के अनुसार, पहली तिमाही में जहां 25 प्रतिशत राजस्व संग्रह का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, वहीं विभाग ने 31 प्रतिशत राजस्व संग्रह कर लक्ष्य से 6 प्रतिशत अधिक उपलब्धि हासिल की है।
विभाग की इस सफलता को बेहतर रणनीति, निगरानी व्यवस्था और नई नीतियों का परिणाम माना जा रहा है। उत्पाद विभाग लगातार अवैध शराब के कारोबार पर कार्रवाई, लाइसेंस व्यवस्था में पारदर्शिता और राजस्व संग्रह की निगरानी को मजबूत करने पर काम कर रहा है। इसका सकारात्मक असर पहली तिमाही के आंकड़ों में साफ दिखाई दिया है।
विभागीय मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो ने इस उपलब्धि पर संतोष जताते हुए कहा कि राज्य सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में 4600 करोड़ रुपये राजस्व संग्रह का लक्ष्य निर्धारित किया है। लेकिन पहली तिमाही के बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें विश्वास है कि विभाग इस बार तय लक्ष्य से भी अधिक राजस्व अर्जित करेगा।
मंत्री ने कहा कि उत्पाद विभाग केवल राजस्व बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि अवैध शराब के निर्माण, तस्करी और बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने के लिए भी लगातार अभियान चला रहा है। इसके साथ ही विभाग ने राजस्व बढ़ाने के लिए कई नीतिगत फैसले लिए हैं और प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक सुधार लागू किए जा रहे हैं। डिजिटल निगरानी, लाइसेंस प्रणाली में सुधार और प्रवर्तन कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में भी तेजी से काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि विभाग का उद्देश्य राज्य के राजस्व में वृद्धि के साथ-साथ शराब कारोबार को पूरी तरह नियमबद्ध और पारदर्शी बनाना है। इसके लिए जिला स्तर पर अधिकारियों को नियमित समीक्षा और निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि अवैध कारोबार पर पूरी तरह अंकुश लगाते हुए वैध राजस्व में लगातार बढ़ोतरी सुनिश्चित की जाए।
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पहली तिमाही की यही गति पूरे वर्ष बनी रहती है तो झारखंड उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग 4600 करोड़ रुपये के वार्षिक लक्ष्य को पार कर नया रिकॉर्ड बना सकता है। इससे राज्य सरकार को विकास योजनाओं, आधारभूत संरचना और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध होंगे। पहली तिमाही के नतीजों ने यह संकेत दे दिया है कि उत्पाद विभाग इस वर्ष राजस्व संग्रह के मामले में एक नया कीर्तिमान स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।



