स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर राष्ट्रपति ने सीआरपीएफ के जवानों को दो प्रमुख वीरता पुरस्कारों — शौर्य चक्र और मेडल फॉर गैलेंट्री (GM) — से सम्मानित करने की घोषणा की है। इनमें सबसे अहम नाम 209 कोबरा बटालियन के डिप्टी कमांडेंट अंजनी कुमार और कॉन्स्टेबल (जीडी) दीपक साह का है, जिन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता सम्मान शौर्य चक्र से नवाजा जा रहा है। यह सम्मान 21 अप्रैल 2025 को बोकारो जिले के लुगुबुरु जंगल क्षेत्र में हुए एक बड़े नक्सल-विरोधी अभियान में दिखाई गई असाधारण बहादुरी के लिए दिया जा रहा है।
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी सूची के अनुसार, अंजनी कुमार ने इस ऑपरेशन में मोर्चे से नेतृत्व करते हुए भारी गोलीबारी के बीच टुकड़ी की अगुवाई की, जबकि दीपक साह ने अभियान की सफलता में निर्णायक भूमिका निभाई। शौर्य चक्र के अलावा इसी सूची में 20 CRPF, 18 CRPF और वैली क्यूएटी की टुकड़ियों के 24 अन्य जवानों को भी मेडल फॉर गैलेंट्री से सम्मानित किया गया है, जिससे यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यह अभियान कितने बड़े स्तर पर लड़ा गया था।
क्या हुआ था 21 अप्रैल को लुगुबुरु में
लालपनिया थाना क्षेत्र के लुगु पहाड़ी इलाके में सीआरपीएफ की 209 कोबरा बटालियन और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम एक तलाशी अभियान पर निकली थी, तभी नक्सलियों की ओर से फायरिंग शुरू हो गई। जवाबी कार्रवाई में करीब दो घंटे तक चली मुठभेड़ में प्रयाग मांझी सहित आठ नक्सली मारे गए।
मारे गए नक्सलियों में सबसे बड़ा नाम भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सदस्य प्रयाग मांझी उर्फ विवेक था, जिस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। विवेक दा, फुचना, नागो मांझी और करन दा जैसे कई उपनामों से पहचाना जाने वाला यह कमांडर पिछले कुछ महीनों से गिरिडीह के पारसनाथ पहाड़ियों और आसपास के इलाकों में सक्रिय था। धनबाद के दलबुधा गांव का रहने वाला प्रयाग मांझी झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में सौ से अधिक हिंसक घटनाओं में वांछित था, जबकि अकेले गिरिडीह जिले में ही उस पर 50 से ज्यादा मामले दर्ज थे।
झारखंड पुलिस महानिदेशक अनुराग गुप्ता के अनुसार, इस साल सुरक्षा बलों के हाथों मारा गया यह दूसरा केंद्रीय समिति सदस्य था। इससे पहले जनवरी में छत्तीसगढ़ के कुलारीघाट रिज़र्व फॉरेस्ट में रामचंद्र रेड्डी गारी प्रताप रेड्डी उर्फ चलपति को मार गिराया गया था।
मुठभेड़ में मारे गए अन्य नक्सलियों में विशेष क्षेत्र समिति सदस्य अरविंद यादव उर्फ अविनाश (25 लाख का इनामी) और जोनल कमेटी सदस्य साहेबराम मांझी उर्फ राहुल मांझी (10 लाख का इनामी) शामिल थे। इनके अलावा महेश मांझी उर्फ मोटा, टालू, रंजू मांझी, गंगाराम और महेश भी इस अभियान में मारे गए।
सुरक्षा बलों के हाथ इस ऑपरेशन में एक AK सीरीज़ राइफल, तीन INSAS राइफलें, एक SLR, आठ देसी कट्टे और एक पिस्टल भी लगे। इस दौरान किसी भी सुरक्षाकर्मी के घायल होने की खबर नहीं आई।
केंद्रीय समिति सदस्य का मारा जाना क्यों अहम
माओवादी संगठन की केंद्रीय समिति उसकी सर्वोच्च निर्णायक इकाई मानी जाती है, और इस स्तर के किसी कैडर का मारा जाना संगठन के लिए बड़ा झटका माना जाता है। झारखंड पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक विवेक दा राज्य में नक्सल आंदोलन के चरम दौर में पारसनाथ इलाके का “सबसे बड़ा” कमांडर था और नवंबर 2021 में गिरफ्तार भाकपा (माओवादी) पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस उर्फ किशन दा का “उत्तराधिकारी” माना जाता था।
209 कोबरा और झारखंड जगुआर की संयुक्त टीम की यह कार्रवाई राज्य में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान की अब तक की सबसे बड़ी सफलताओं में गिनी जा रही है, जिसकी अगुवाई करने वाले अंजनी कुमार और मोर्चे पर डटे दीपक साह को अब देश **शौर्य चक्र** से सम्मानित करेगा।
मेडल फॉर गैलेंट्री पाने वाले 24 अन्य जवान कौन हैं
शौर्य चक्र के अलावा राष्ट्रपति ने 24 अन्य जवानों को मेडल फॉर गैलेंट्री (GM) देने की भी घोषणा की है। इनमें से ज्यादातर 20 CRPF और 18 CRPF की टुकड़ियों से जुड़े हैं, जबकि कुछ जवान वैली क्यूएटी (Quick Action Team) से हैं, जो अलग-अलग बटालियनों से अटैच किए गए थे।
20 CRPF की टुकड़ी से:
सब-इंस्पेक्टर द्रोणाचार्य नाथ (37 CRPF), हेड कॉन्स्टेबल गंडराब सिंह (246 CRPF), हेड कॉन्स्टेबल गायकवाड़ विठ्ठल सहेबराव, हेड कॉन्स्टेबल कैलाश चंद कुमावत (21 CRPF), हेड कॉन्स्टेबल प्रह्लाद बसाक, हेड कॉन्स्टेबल (ड्राइवर) तिलक राज, हेड कॉन्स्टेबल (रेडियो ऑपरेटर) यादवेंद्र कुमार (5 सिग्नल, फिलहाल 33 CRPF में तैनात), हेड कॉन्स्टेबल सोमबीर, हेड कॉन्स्टेबल मो. मानाज (84 CRPF), कॉन्स्टेबल सुन बासुमतारी और कॉन्स्टेबल संजीव कुमार (237 CRPF)।
18 CRPF की टुकड़ी से:
सेकेंड-इन-कमांड चौधरी महेश कुमार (191 CRPF), असिस्टेंट कमांडेंट राजविंदर सिंह (फिलहाल BHEL में प्रतिनियुक्ति पर), इंस्पेक्टर दान सिंह, हेड कॉन्स्टेबल अप्पू बिस्वास (32 CRPF), हेड कॉन्स्टेबल बिजेंद्र सिंह सिकरवार, हेड कॉन्स्टेबल अनूप सिंह और कॉन्स्टेबल वेदप्रकाश (83 RAF)।


