रांची: JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि परीक्षाएं रद्द करना छात्रों के लंबे संघर्ष का परिणाम है, इसे सरकार अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश न करे।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अगर छात्र सड़क पर नहीं उतरते, भूख हड़ताल नहीं करते और आंदोलन के दौरान लाठियां नहीं खाते, तो सरकार यह कार्रवाई नहीं करती। उन्होंने कहा कि सिर्फ परीक्षाएं रद्द कर देना पूरे मामले का समाधान नहीं है। छात्रों की सबसे बड़ी मांग JPSC और JSSC की विवादित परीक्षाओं की CBI जांच है, जिसे सरकार ने अब तक स्वीकार नहीं किया है।
CID-SIT जांच पर भी उठाए सवाल
मरांडी ने सवाल उठाया कि जिस व्यवस्था, अधिकारियों और एजेंसियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं, उन्हीं के अधीन CID, SIT या सरकारी समिति से जांच कराने पर निष्पक्षता का भरोसा कैसे पैदा होगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री खुद जांच में चौंकाने वाले तथ्यों और कई कंपनियों से जुड़े नेटवर्क की बात कह चुके हैं। ऐसे में अगर मामला इतना बड़ा और अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़ा है, तो सरकार CBI जांच से पीछे क्यों हट रही है।
उन्होंने कहा कि परीक्षा रद्द करना गड़बड़ी की स्वीकारोक्ति है, लेकिन असली सवाल यह है कि गड़बड़ी किसने की, किसके संरक्षण में हुई और इसका फायदा किन लोगों को मिला। इन सवालों का जवाब स्वतंत्र जांच से ही सामने आ सकता है।
11वीं-13वीं JPSC को लेकर भी सवाल
बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि सरकार के निर्णय में 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा को लेकर स्पष्ट फैसला नहीं है। उन्होंने जांच पूरी करने और रिपोर्ट सार्वजनिक करने की बाध्यकारी समय-सीमा तय नहीं होने पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने OMR शीट, कटऑफ, मेरिट लिस्ट, परीक्षा एजेंसी के चयन और परीक्षा से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही व्हिसलब्लोअर संतोष कुमार मस्ताना के निलंबन और उनके खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा।
CBI के साथ ED जांच की भी मांग
मरांडी ने JPSC-JSSC की विवादित परीक्षाओं की जांच CBI को सौंपने के साथ-साथ वित्तीय लेन-देन और मनी ट्रेल की जांच ED से कराने की मांग की। उन्होंने 11वीं-13वीं JPSC और अभय तिवारी व TDPL से जुड़ी परीक्षाओं का स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट कराने की बात कही।
उन्होंने मांग रखी कि जांच 90 दिनों के भीतर पूरी कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। इसके अलावा OMR ऑडिट, एजेंसी चयन और टेंडर से जुड़ी फाइलों को भी सार्वजनिक करने, दोषी अधिकारियों, एजेंसियों और लाभार्थियों पर समयबद्ध कार्रवाई करने तथा आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग की।
मरांडी ने कहा कि सरकार आधी मांगें मानकर आंदोलन खत्म होने की घोषणा न करे। उनके मुताबिक, जब तक CBI जांच का लिखित आदेश नहीं होता और भर्ती व्यवस्था में जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक छात्रों की न्याय की लड़ाई अधूरी रहेगी। उन्होंने झारखंड के युवाओं की न्यायपूर्ण मांगों के साथ खड़े रहने की बात कही।
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