रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्ति रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। गुरुवार को न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत में नियुक्त कर्मियों को हटाने के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने राज्य सरकार और JPSC से जवाब भी मांगा है।
तीन याचिकाओं पर हुई सुनवाई
सरकार के 18 अगस्त के नोटिफिकेशन के खिलाफ याचिकाएं दायर की गई थीं। दो याचिकाओं में दीपमाला एवं अन्य और सोनम कुमारी ने JPSC 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा, विज्ञापन संख्या 01/2024 को रद्द करने के आदेश को चुनौती दी। वहीं, सौरव सिंह एवं अन्य ने फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती, विज्ञापन संख्या 18/2023 की नियुक्ति रद्द करने के फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल की। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स और पीएएस पति ने पक्ष रखा।
नियुक्ति रद्द होने से नौकरी पर आया था संकट
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सरकार के फैसले से उन अभ्यर्थियों की नौकरी प्रभावित हुई, जिन्होंने चयन प्रक्रिया पूरी कर नियुक्ति हासिल की थी। याचिकाकर्ता सोनम कुमारी ने अदालत में बताया कि उन्होंने दूसरी नौकरी छोड़कर इस पद पर ज्वाइन किया था। उन्हें 24 नवंबर 2025 को नियुक्ति पत्र मिला और उन्होंने प्रशिक्षण भी पूरा किया था। इसके बाद 18 अगस्त को सरकार की ओर से नियुक्ति रद्द करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया।
क्यों रद्द की गई थीं परीक्षाएं और नियुक्तियां?
झारखंड सरकार ने CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर उन परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया, जिनमें TDPL की भूमिका रही थी। साथ ही वर्ष 2014 से हुई विभिन्न नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कराने की बात भी कही गई थी। इसके बाद कार्मिक विभाग की अधिसूचना में 22 परीक्षाओं को रद्द करने, 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने का उल्लेख किया गया।
हाईकोर्ट के आदेश से अभ्यर्थियों को बड़ी राहत
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से फिलहाल JPSC 11वीं-13वीं सिविल सेवा और फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्तियों को रद्द करने का सरकार का फैसला प्रभावी नहीं रहेगा। हालांकि, कोर्ट ने अभी इस मामले में अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। राज्य सरकार और JPSC के जवाब के बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी।
15 सितंबर को होगी मामले की अगली सुनवाई
इस आदेश के बाद उन अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, जो नियुक्ति रद्द होने के खिलाफ लगातार आंदोलन और कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। अब सभी की नजर अगली सुनवाई और राज्य सरकार तथा JPSC के जवाब पर रहेगी।


