रांची। झारखंड में सड़क सुरक्षा मजबूत करने और व्यावसायिक वाहन चालकों को प्रशिक्षित करने के मकसद से झारखंड में शुरू की गई चालक प्रशिक्षण केंद्र योजना पिछले तीन वर्षों से सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गई है। हैरानी की बात यह है कि राज्य के 21 जिलों में इसके लिए जमीन पहले ही चिह्नित की जा चुकी है, फिर भी अब तक एक भी केंद्र का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। हाल ही में हुई लेखापरीक्षा में यह लापरवाही उजागर हुई है।
क्या है मामला ?
मामले की शुरुआत फरवरी 2022 से होती है, जब 10 जिलों के उपायुक्तों को जमीन उपलब्धता की रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था। लेकिन दो साल से ज्यादा वक्त बीतने के बाद भी केवल चार जिलों ने ही यह जानकारी भेजी। नतीजा यह हुआ कि इस योजना के लिए तय 19.73 करोड़ रुपये का बजट खर्च ही नहीं हो सका और पूरी रकम सरकारी खजाने में वापस लौटानी पड़ी।
अब आगे क्या ?
आगे की कहानी और उलझती चली गई। अगस्त 2024 में जेएसबीसीसीएल ने प्रति केंद्र करीब पांच करोड़ रुपये की लागत वाला डिजाइन (डीपीआर) तैयार करके सौंपा, लेकिन इसे मंजूरी देने के बजाय विभाग ने तीन महीने बाद ही तीन अलग-अलग डिजाइन बनाने का नया आदेश थमा दिया। इससे भी अजीब बात यह रही कि जिन 21 जिलों में दो से 13 एकड़ तक जमीन पहले से चिह्नित थी, विभाग ने उसे छोड़कर नए सिरे से जमीन खोजना शुरू कर दिया।
गौर करने वाली बात यह भी है कि यह योजना मूल रूप से 2017 में तकनीकी शिक्षा विभाग के जिम्मे थी, जिसे 2018 में परिवहन विभाग को सौंप दिया गया। पिछले साल मई में एक निजी आर्किटेक्ट फर्म को मास्टर प्लान बनाने का काम दिया गया, लेकिन चिह्नित जमीन के इस्तेमाल पर विभाग अब तक खामोश है। केंद्र सरकार के मानकों के मुताबिक हर जिले में करीब दो एकड़ जमीन पर ऐसा केंद्र बनना था लेकिन योजना अब भी फाइलों में ही दौड़ रही है।


