रांची: इतिहास केवल बीते हुए समय का दस्तावेज नहीं, बल्कि समाज और वर्तमान को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। इसी उद्देश्य के साथ रांची के संत जेवियर महाविद्यालय के सभागार में इतिहास और मुगल शहजादे दारा शिकोह के जीवनवृत्त पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में इतिहासकार डॉ. अमित रंजन ने विद्यार्थियों के साथ इतिहास की महत्ता और दारा शिकोह के जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उनके व्याख्यान का केंद्र दारा शिकोह का व्यक्तित्व, उनकी साहित्यिक रुचि, कला के प्रति लगाव और उनके योगदान रहे।
स्वागत गीत और नृत्य से हुआ कार्यक्रम का आगाज
विशेष व्याख्यान की शुरुआत महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत और नृत्य से हुई। छात्राओं की प्रस्तुति ने सभागार में मौजूद लोगों का मन मोह लिया और कार्यक्रम का माहौल जीवंत हो गया।
इसके बाद डॉ. अमित रंजन ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उनके व्याख्यान को छात्रों ने घंटों तक पूरी एकाग्रता के साथ सुना। व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों को इतिहास को केवल घटनाओं के क्रम के रूप में नहीं, बल्कि समाज के विकास और उसकी सोच को समझने के माध्यम के रूप में देखने की जानकारी मिली।
दारा शिकोह के जीवन और विचारों पर हुई चर्चा
डॉ. अमित रंजन ने अपने संबोधन में दारा शिकोह के जीवन के विभिन्न पहलुओं को सरल भाषा में विद्यार्थियों के सामने रखा। उन्होंने बताया कि दारा शिकोह की साहित्य में गहरी रुचि थी और उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इसके साथ ही उन्होंने दारा शिकोह के कला प्रेम और व्यक्तित्व से जुड़े पहलुओं पर भी प्रकाश डाला। विद्यार्थियों के लिए जटिल ऐतिहासिक विषयों को आसान शब्दों में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया, जिससे छात्र दारा शिकोह के जीवन और उनके समय को बेहतर तरीके से समझ सकें।
बोकारो से ताल्लुक रखते हैं डॉ. अमित रंजन
डॉ. अमित रंजन मूल रूप से झारखंड के बोकारो के रहने वाले हैं। इतिहास के विभिन्न पहलुओं पर उन्होंने शोध किया है और कई पुस्तकें भी लिखी हैं। दारा शिकोह के जीवन पर उनके द्वारा रचित पुस्तक को आधार बनाकर ही इस विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया था।
व्याख्यान के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को यह समझाने की कोशिश की कि इतिहास का अध्ययन केवल अतीत को जानने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज की संरचना, विचारों और बदलावों को समझने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
छात्रों के लिए रहा ज्ञानवर्धक सत्र
विशेष व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने इतिहास से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को समझा। दारा शिकोह के जीवन, उनकी साहित्यिक रुचि और कला प्रेम पर हुई चर्चा ने छात्रों की ऐतिहासिक समझ को और व्यापक बनाने का काम किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में इतिहास के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और घटनाओं को व्यापक दृष्टिकोण से समझने के लिए प्रेरित करना रहा।
इसे भी पढ़े – रांची विश्वविद्यालय का 39वां दीक्षांत समारोह कल, 58 मेधावी छात्रों को मिलेंगे 71 गोल्ड मेडल


