रांची। झारखंड हाई कोर्ट में मंगलवार को उस बहुचर्चित मामले पर सुनवाई होगी, जिसने राज्य के लाखों प्रतियोगी परीक्षार्थियों की धड़कनें बढ़ा रखी हैं। अदालत झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 11वीं-13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी नियुक्ति परीक्षा और बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) नियुक्ति परीक्षा के साथ-साथ झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की सीजीएल परीक्षा से हुई नियुक्तियों को रद करने से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।
मामला क्या है?
राज्य सरकार ने कुछ समय पहले जेपीएससी और जेएसएससी द्वारा वर्ष 2014 से संचालित कई परीक्षाओं में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद बड़ा फैसला लिया था। सरकार ने दर्जनों भर्ती परीक्षाओं को रद करने और कुछ अन्य की जांच कराने की घोषणा की थी। सरकार का कहना था कि यह कदम परीक्षा प्रणाली में जनता का भरोसा बहाल करने के लिए जरूरी है। सरकार के इस आदेश के दायरे में ड्रग इंस्पेक्टर, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिप्टी कलेक्टर, डेंटल डॉक्टर, असिस्टेंट इंजीनियर, सिविल जज, एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर जैसे कई अहम पदों की परीक्षाएं शामिल थीं।
लेकिन इस फैसले के खिलाफ हजारों चयनित अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट का रुख किया, जिन्होंने मेरिट के आधार पर नौकरी हासिल करने का दावा किया। अगस्त में हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा और खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी परीक्षा से जुड़ी नियुक्तियां रद करने के सरकारी आदेश पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब और काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद प्रभावित अभ्यर्थियों को तत्काल प्रभाव से काम पर लौटने की इजाजत मिल गई थी।
छात्र आंदोलन से शुरू हुआ विवाद
गौरतलब है कि यह पूरा विवाद पेपर लीक, भ्रष्टाचार और परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितता के आरोपों को लेकर हफ्तों चले छात्र आंदोलन के बाद खड़ा हुआ था। प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में विवादित परीक्षाओं को रद करना, स्वतंत्र जांच, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और पूरे तंत्र में सुधार शामिल था। कई छात्र संगठनों ने मामले की सीबीआई जांच की मांग भी उठाई थी।
आज की सुनवाई क्यों अहम?
मंगलवार की सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे यह साफ होगा कि हजारों चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी का भविष्य क्या होगा। एक तरफ सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जनता के भरोसे की दुहाई दे रही है, तो दूसरी तरफ मेरिट के आधार पर चयनित युवा अपनी मेहनत से हासिल नौकरी बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। जेएसएससी सीजीएल परीक्षा से जुड़ी नियुक्तियों को लेकर भी इसी तरह के सवाल खड़े हैं, जिन पर अदालत का रुख आने वाले दिनों में राज्य की भर्ती प्रक्रिया की दिशा तय कर सकता है।
फिलहाल सभी की निगाहें झारखंड हाई कोर्ट पर टिकी हैं। सुनवाई से जुड़ा हर अपडेट आगे साझा किया जाएगा।


