रूबेला जैसी संक्रामक बीमारी को लेकर झारखंड के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य की सबसे बड़ी जांच प्रयोगशाला रिम्स की माइक्रोबायोलॉजी लैब में इस साल हुई सैंपल जांच में अब तक रूबेला संक्रमण का कोई भी मामला प्रयोगशाला स्तर पर प्रमाणित नहीं हो सका है।
एलिजा पॉजिटिव आने पर भी पुष्टि की शर्त पीसीआर
रिम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी। उनके अनुसार, किसी भी सैंपल को रूबेला संक्रमित घोषित करने से पहले पीसीआर जांच में पॉजिटिव आना अनिवार्य शर्त है। उन्होंने बताया कि मीजल्स या मीजल्स-रूबेला टीकाकरण के बाद शरीर में बनी एंटीबॉडी के कारण एलिजा टेस्ट में गलत सकारात्मक परिणाम आ सकता है, इसलिए अंतिम पुष्टि हमेशा पीसीआर रिपोर्ट से ही होती है।
राज्यभर से रिम्स पहुंचते हैं संदिग्ध सैंपल
झारखंड में रूबेला की जांच के लिए रिम्स की लैब प्रमुख केंद्र है, जहां राज्य के विभिन्न हिस्सों से संदिग्ध मरीजों के सैंपल भेजे जाते हैं। डॉ. कुमार ने बताया कि इस वर्ष अब तक कुल 875 सैंपलों की जांच की गई है।
21 सैंपल एलिजा में पॉजिटिव, पीसीआर में सभी नेगेटिव
इन 875 सैंपलों में से 21 सैंपल एलिजा टेस्ट में रूबेला के लिहाज से पॉजिटिव पाए गए थे। एहतियातन इन सभी सैंपलों को पीसीआर जांच के लिए भेजा गया, लेकिन किसी भी सैंपल की पीसीआर रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आई। इस कारण इन मामलों को रूबेला संक्रमण के तौर पर मान्य नहीं किया गया।
फिलहाल राज्य में कोई पुष्ट केस नहीं, निगरानी जारी
रिम्स की इस रिपोर्ट के आधार पर साफ है कि झारखंड में फिलहाल रूबेला का कोई पुष्ट मामला मौजूद नहीं है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग सतर्कता बरतते हुए संदिग्ध सैंपलों की नियमित जांच जारी रखेगा।
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