फर्जी आधार से खुलवाते थे म्यूल खाते, एक खाते में सिर्फ 3 दिन में हुआ 8 करोड़ का लेनदेन; पुलिस टीम को 25 हजार का इनाम
कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान पुलिस ने करीब 250 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करने का दावा किया है। साइबर क्राइम सेल, रावतपुर और कल्याणपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए आईआईटी गेट से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी कूटरचित आधार कार्ड तैयार कर उनके आधार पर म्यूल बैंक खाते खुलवाते थे और इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से हासिल रकम के लेनदेन के लिए किया जाता था।
3 दिन में खाते में आया 8 करोड़, 115 शिकायतों से खुला बड़ा नेटवर्क
पुलिस की जांच में इस नेटवर्क से जुड़े एक बैंक खाते को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। अधिकारियों के अनुसार, सिर्फ तीन दिनों में इस खाते से करीब 8 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ था। खास बात यह रही कि इस खाते से संबंधित अलग-अलग राज्यों में 115 साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज थीं।
एनसीआरपी यानी नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायतों और बैंक खाते के लेनदेन की जांच के दौरान पुलिस को साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क के बारे में सुराग मिला। इसके बाद पुलिस ने खाते से जुड़े लोगों और उनके संपर्कों की जानकारी जुटानी शुरू की।
फर्जी आधार से तैयार होते थे म्यूल खाते
पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क में कूटरचित आधार कार्ड का इस्तेमाल कर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। ऐसे खातों को साइबर अपराध की भाषा में ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है। इन खातों का इस्तेमाल ठगी से हासिल रकम को प्राप्त करने और आगे दूसरे खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।
पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर कूटरचित आधार कार्ड तैयार करने, म्यूल खाते खुलवाने और इन खातों के माध्यम से ऑनलाइन ठगी की रकम का लेनदेन करने की जानकारी दी है।
राजशेखर को पुलिस ने बताया नेटवर्क का मास्टरमाइंड
गिरफ्तार आरोपियों में औरैया निवासी विपिन और शिवप्रताप, औरैया के बिधूना निवासी राजशेखर उर्फ अजीत तथा कानपुर देहात के रनियां निवासी हिमांशु गौतम शामिल हैं।
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में राजशेखर उर्फ अजीत की भूमिका इस नेटवर्क में महत्वपूर्ण सामने आई है। पुलिस उसे कथित तौर पर नेटवर्क का मास्टरमाइंड बता रही है। आरोप है कि वह कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से म्यूल खाते खुलवाने का काम करता था।
वहीं, पुलिस के अनुसार हिमांशु गौतम ने विजय नगर चौराहे पर ‘आर्बिट बिल्ड इंफ्रास्ट्रक्टर’ के नाम से एक कार्यालय भी खोल रखा था। पुलिस अब इस कार्यालय और इससे जुड़े लेनदेन की भी जांच कर रही है।
पहले भी सामने आ चुका है म्यूल खातों का बड़ा नेटवर्क
कानपुर में म्यूल खातों के जरिए साइबर ठगी की रकम के लेनदेन का मामला पहले भी सामने आ चुका है। जुलाई 2026 में कानपुर साइबर सेल ने एक अभियान के दौरान 35 ऐसे आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनके खातों में 30 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की रकम पहुंचने की बात सामने आई थी। पुलिस जांच में उस मामले में भी कई साइबर अपराध शिकायतों का लिंक मिला था।
म्यूल बैंक खातों के इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार का भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) भी पहले लोगों को चेतावनी दे चुका है। I4C के अनुसार, साइबर अपराधी बैंक खातों को किराए पर लेकर या दूसरे लोगों के नाम से संचालित खातों के जरिए ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में भेजते हैं। एजेंसी ने लोगों को अपना बैंक खाता या कंपनी से जुड़े दस्तावेज किसी दूसरे व्यक्ति को उपलब्ध कराने से बचने की सलाह दी है।
पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का इनाम
पूरे नेटवर्क का खुलासा करने वाली पुलिस टीम की कार्रवाई की अधिकारियों ने सराहना की है। डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने टीम को 25 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।
फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि फर्जी दस्तावेज और म्यूल खाते तैयार करने के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हैं, ठगी की रकम किन-किन राज्यों और खातों तक पहुंची तथा इस नेटवर्क से जुड़े अन्य साइबर अपराधियों की भूमिका क्या है। पुलिस को उम्मीद है कि आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क की अन्य कड़ियां भी सामने आ सकती हैं।
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