भोपाल: पुराने और अनुपयोगी कपड़ों को नया जीवन देकर फैशन और कौशल विकास को एक साथ जोड़ने की अनूठी पहल ने आज अनेक महिलाओं और छात्राओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। डिविजनल आईटीआई भोपाल में शुरू किया गया यह अभिनव प्रयास न सिर्फ रचनात्मकता को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। इस पूरी मुहिम का केंद्र बिंदु है ‘पुनः उपयोग फैशन शो‘, जिसने स्थानीय स्तर पर एक नई मिसाल कायम की है।
स्मृति श्रीवास्तव: एक दृष्टि से बदली नियति
यह अभिनव प्रयास तब शुरू हुआ जब स्मृति श्रीवास्तव ने डिविजनल आईटीआई भोपाल में स्विंग टेक्नोलॉजी ट्रेड की छात्राओं को पारंपरिक सिलाई-कढ़ाई से आगे बढ़कर रचनात्मक फैशन डिज़ाइनिंग की दिशा में प्रेरित किया। कॉस्ट्यूम डिज़ाइनिंग एवं ड्रेस मेकिंग में पॉलिटेक्निक डिप्लोमा प्राप्त स्मृति श्रीवास्तव ने महसूस किया कि छात्राओं में केवल तकनीकी कौशल ही नहीं, बल्कि रचनात्मक प्रतिभा भी छिपी है, जिसे सही दिशा देने की आवश्यकता है। उन्होंने एक ऐसी राह चुनी, जो न केवल कौशल विकास से जुड़ी थी, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता और महिलाओं की आत्मनिर्भरता को भी पोषित करती थी।
प्रशिक्षण के दौरान, स्मृति श्रीवास्तव ने छात्राओं को पुराने कपड़ों और कपड़ों के अवशेषों (Reuse Material) का उपयोग कर आधुनिक एवं आकर्षक परिधान तैयार करना सिखाया। यह गतिविधि केवल निर्धारित पाठ्यक्रम तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि कौशल विकास और नवाचार का एक नया माध्यम बनी। छात्राओं ने सीखा कि कैसे अनुपयोगी समझी जाने वाली सामग्री को कलात्मक और व्यावसायिक रूप से मूल्यवान उत्पादों में बदला जा सकता है।
कौशल विकास और आत्मनिर्भरता की नई उड़ान
इस पहल ने छात्राओं की रचनात्मक क्षमता को नई पहचान दी। सिलाई-कढ़ाई तक सीमित रहने के बजाय, उन्होंने अपनी डिज़ाइनिंग प्रतिभा का उपयोग रोजगार, स्वरोजगार और छोटे व्यवसायों में करना शुरू किया। भोपाल की कई स्थानीय बाजारों में आज ऐसी छात्राओं द्वारा डिज़ाइन किए गए परिधानों की मांग बढ़ रही है, जो इस पहल का सीधा परिणाम है। परिणामस्वरूप, अनेक छात्राओं के लिए आजीविका के नए अवसर विकसित हुए और वे आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ीं। यह न केवल उन्हें व्यक्तिगत रूप से मजबूत बना रहा है, बल्कि उनके परिवारों और स्थानीय समुदाय को भी लाभ पहुंचा रहा है।
एक छात्रा, पूजा वर्मा ने बताया, “पहले हम सिर्फ सिलाई करना जानते थे, लेकिन स्मृति मैडम ने हमें सिखाया कि कैसे पुराने कपड़ों से बिल्कुल नए और स्टाइलिश कपड़े बनाए जा सकते हैं। अब मैं अपने डिज़ाइन किए हुए कपड़े बेचकर अच्छी कमाई कर रही हूँ।” यह केवल एक उदाहरण है कि कैसे इस पहल ने सैकड़ों छात्राओं की ज़िंदगी बदली है।
‘पुनः उपयोग फैशन शो’: मंच पर रचनात्मकता का प्रदर्शन
इसी दौरान स्मृति श्रीवास्तव के मन में एक नया विचार आया कि पुनः उपयोग किए गए कपड़ों से तैयार परिधानों को एक मंच प्रदान किया जाए, ताकि समाज के सामने इस रचनात्मकता और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके। इसी सोच के साथ ‘पुनः उपयोग फैशन शो‘ की शुरुआत हुई। यह आईटीआई के क्षेत्र में एक अभिनव और अनूठा प्रयोग था, जिसकी पहले कोई मिसाल नहीं थी। आमतौर पर, आईटीआई में कौशल प्रदर्शन व्यावहारिक कार्यों तक ही सीमित रहते हैं, लेकिन यह फैशन शो कौशल प्रशिक्षण को रचनात्मकता, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास से जोड़ते हुए छात्राओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोल गया। इस फैशन शो ने न केवल छात्राओं को अपनी कला का प्रदर्शन करने का अवसर दिया, बल्कि उन्हें एक मंच पर लाने का आत्मविश्वास भी प्रदान किया, जो उनके भविष्य के लिए अमूल्य है।
पाँच वर्षों की सफल परंपरा: प्रेरणा का स्त्रोत
विशेष बात यह है कि यह फैशन शो पिछले पाँच वर्षों से लगातार आयोजित किया जा रहा है, और हर साल इसकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। इसमें छात्राएँ और महिलाएँ उपलब्ध संसाधनों तथा पुराने कपड़ों का उपयोग कर नए फैशन ट्रेंड्स के अनुरूप परिधान तैयार करती हैं और आत्मविश्वास के साथ रैंप पर उनका प्रदर्शन करती हैं। इस आयोजन ने स्थानीय समुदाय के सदस्यों, विशेष रूप से महिलाओं को, अपनी छिपी हुई प्रतिभाओं को सामने लाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रेरित किया है। यह ‘पुनः उपयोग फैशन शो’ अब भोपाल की एक पहचान बन चुका है, जो रचनात्मकता और सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक है। उदाहरण के लिए, पिछली बार के शो में 50 से अधिक महिलाएँ और छात्राएँ प्रतिभागी बनी थीं, जिन्होंने 100 से अधिक परिधान प्रदर्शित किए।
यह आयोजन केवल फैशन प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण का भी माध्यम बन गया है। इस फैशन शो में प्रतिभागी महिलाएँ स्वयं अपने परिधानों की डिज़ाइनर होती हैं और उन्हीं परिधानों को पहनकर मॉडल के रूप में रैंप पर भी उतरती हैं। इस अनूठी भागीदारी से उनमें आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और नेतृत्व क्षमता का विकास होता है। उन्हें यह महसूस होता है कि वे सिर्फ कपड़े बनाने वाली नहीं, बल्कि डिज़ाइनर और मॉडल भी हैं, जो समाज में उनकी भूमिका को और मजबूत करता है।
पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का संगम
निम्न एवं मध्यम वर्ग की महिलाओं के लिए यह पहल एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरी है। कपड़ों के पुनः उपयोग के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, कौशल विकास और महिला सशक्तिकरण को एक साथ जोड़ने वाली यह पहल आज नवाचार और आत्मनिर्भरता की सफल कहानी बन चुकी है। यह दर्शाता है कि कैसे छोटे स्तर पर शुरू की गई एक पहल बड़े सामाजिक बदलाव का कारक बन सकती है। भोपाल के बाहर भी कई संस्थानों ने इस मॉडल को अपनाने में रुचि दिखाई है, जिससे इसकी प्रासंगिकता और सफलता सिद्ध होती है। पर्यावरण संरक्षण के लिए, पुनः उपयोग एक महत्वपूर्ण अवधारणा है, और इस पहल ने इसे फैशन के साथ जोड़कर एक आकर्षक रूप दिया है। अधिक जानकारी के लिए, आप पर्यावरण मंत्रालय की वेबसाइट पर अपशिष्ट प्रबंधन पहल के बारे में पढ़ सकते हैं। [INTERNAL_LINK_HOLDER] यह ‘पुनः उपयोग फैशन शो’ सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक आंदोलन है जो बेहतर भविष्य की ओर इशारा करता है।


