रांची: प्रतिबंधित पॉलीथिन कैरी बैग के इस्तेमाल को कम करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में रांची नगर निगम ने नई पहल शुरू की है। गांधी जयंती के अवसर पर नागा बाबा सब्जी बाजार में बायोडिग्रेडेबल पॉलीबैग निर्माण इकाई की शुरुआत की गई। महापौर रोशनी खलखो और उप महापौर नीरज कुमार ने इकाई का विधिवत उद्घाटन किया। खास बात यह है कि इस इकाई के संचालन की जिम्मेदारी एरिया लेवल फेडरेशन (ALF) से जुड़ी महिला सदस्यों को दी जाएगी।
नगर निगम के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य एक तरफ प्लास्टिक कैरी बैग के विकल्प को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराना है, वहीं दूसरी तरफ महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को रोजगार और आय का अवसर देना भी है।
एक घंटे में तैयार होंगे 40 किलो बायोडिग्रेडेबल बैग
नागा बाबा सब्जी बाजार में स्थापित की गई यूनिट में बायोडिग्रेडेबल पॉलीबैग का उत्पादन किया जाएगा। इसके निर्माण में PVAT और Filler का इस्तेमाल किया जाएगा। दोनों कच्चे माल को 7:3 के अनुपात में इस्तेमाल करने की व्यवस्था की गई है।
मशीन की उत्पादन क्षमता करीब 40 किलोग्राम पॉलीबैग प्रति घंटे बताई गई है। यानी उत्पादन क्षमता के लिहाज से मशीन के जरिए कम समय में बाजार की जरूरत के मुताबिक पर्यावरण अनुकूल बैग तैयार किए जा सकेंगे।
उत्पादन से महिलाओं को मिलेगा आय का अवसर
इस यूनिट की सबसे खास बात इसका संचालन मॉडल है। नगर निगम के अनुसार ALF से जुड़ी महिला सदस्य ही इकाई के उत्पादन, संचालन और मार्केटिंग से जुड़े काम संभालेंगी।
इससे महिलाओं को केवल रोजगार ही नहीं मिलेगा, बल्कि उत्पादन प्रबंधन, बिक्री, विपणन और उद्यमिता से जुड़े व्यावहारिक अनुभव भी हासिल होंगे। नगर निगम का उद्देश्य महिलाओं को स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आय के नए अवसर तैयार करना है।
140 रुपये लागत, 160 रुपये संभावित बिक्री मूल्य
नगर निगम की ओर से जारी जानकारी के अनुसार एक किलोग्राम बायोडिग्रेडेबल पॉलीबैग के उत्पादन पर करीब 140 रुपये की लागत आने का अनुमान है। इसका संभावित बिक्री मूल्य करीब 160 रुपये प्रति किलोग्राम रखा गया है। इस हिसाब से प्रति किलोग्राम संभावित अधिशेष करीब 20 रुपये हो सकता है।
मशीन की 40 किलोग्राम प्रति घंटे की उत्पादन क्षमता के आधार पर एक घंटे में संभावित बिक्री करीब 6,400 रुपये और संभावित अधिशेष करीब 800 रुपये बताया गया है। हालांकि वास्तविक आय उत्पादन और बिक्री की मात्रा पर निर्भर करेगी। उत्पादन लागत में कच्चा माल, बिजली, श्रम और अन्य खर्च शामिल हैं।
झारखंड में नगर निकाय की पहली ऐसी पहल का दावा
रांची नगर निगम का दावा है कि झारखंड में किसी नगर निकाय द्वारा इस तरह की बायोडिग्रेडेबल पॉलीबैग निर्माण इकाई स्थापित करने की यह पहली पहल है। इस मॉडल के जरिए पर्यावरण संरक्षण और महिला आर्थिक सशक्तिकरण को एक साथ जोड़ने की कोशिश की गई है।
नगर निगम के मुताबिक स्थानीय स्तर पर पर्यावरण अनुकूल बैग का उत्पादन होने से बाजारों में इसके इस्तेमाल को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही पारंपरिक प्लास्टिक कैरी बैग पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक बैग की उपलब्धता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
दूसरे बाजारों तक विस्तार की तैयारी
नगर निगम इस यूनिट को सिर्फ एक बाजार तक सीमित रखने के बजाय भविष्य में इसकी सफलता और संचालन के अनुभव के आधार पर शहर के अन्य बाजारों तक भी इस मॉडल को विस्तार देने की संभावना पर काम कर सकता है।
इससे स्थानीय स्तर पर पर्यावरण अनुकूल उत्पादों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ महिला समूहों के लिए रोजगार के नए अवसर भी तैयार हो सकते हैं।
निगम ने नागरिकों से की प्लास्टिक छोड़ने की अपील
रांची नगर निगम ने नागरिकों से प्रतिबंधित पॉलीथिन कैरी बैग का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की है। निगम ने लोगों से खरीदारी के दौरान पर्यावरण अनुकूल और दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले विकल्पों को प्राथमिकता देने को कहा है।
नगर निगम का कहना है कि स्वच्छ और पर्यावरण सुरक्षित रांची बनाने के लिए केवल प्रशासनिक प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है।
कार्यक्रम के दौरान नगर आयुक्त सुशांत गौरव, अपर नगर आयुक्त संजय कुमार, उप नगर आयुक्त रविंद्र कुमार, सहायक नगर आयुक्त, नगर प्रबंधक समेत अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।


