नई दिल्ली देश को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से नई दिल्ली के भारत मंडपम में ‘जोश – स्वास्थ्य के लिए संयुक्त दल : टीबी मुक्त भारत की ओर’ अभियान का राष्ट्रीय शुभारंभ किया गया। इस पहल के माध्यम से राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) के कैडेटों और माय भारत के स्वयंसेवकों को टीबी के खिलाफ जागरूकता अभियान से जोड़ा जा रहा है।
कार्यक्रम में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने हिस्सा लिया। इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा, केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी, मनोज तिवारी, योगेंद्र चंदोलिया और राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल समेत स्वास्थ्य, रक्षा और अन्य मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
55 जिलों में 29,123 NCC कैडेटों को प्रशिक्षण
राष्ट्रीय शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि अभियान के पहले चरण में 11 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 55 जिलों में 29,123 NCC कैडेटों को प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षित कैडेट अब अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर लोगों को टीबी के लक्षणों, समय पर जांच और उपचार के प्रति जागरूक करने में भूमिका निभाएंगे।
इसके साथ ही युवाओं के माध्यम से टीबी को लेकर समाज में मौजूद भ्रम और सामाजिक कलंक को दूर करने का प्रयास भी किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य सिर्फ लोगों तक जानकारी पहुंचाना ही नहीं, बल्कि संभावित मरीजों को समय पर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में मदद करना भी है।
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि ‘टीबी मुक्त भारत’ सिर्फ एक लक्ष्य नहीं, बल्कि जनभागीदारी के माध्यम से जन-आंदोलन बनने वाला राष्ट्रीय संकल्प है। उन्होंने कहा कि ‘जोश’ अभियान के जरिए देश की युवा शक्ति को टीबी उन्मूलन के अभियान से जोड़ा जा रहा है।
“युवा शक्ति अभियान की ऊर्जा, जनभागीदारी सबसे बड़ी ताकत”
संजय सेठ ने कहा कि NCC कैडेट और माय भारत के स्वयंसेवक समुदायों के बीच जाकर टीबी के लक्षणों, समय पर जांच और उपचार को लेकर जागरूकता फैलाएंगे। इसके साथ ही टीबी से जुड़े भ्रम और सामाजिक कलंक को खत्म करने में भी युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त भारत के लिए केवल जागरूकता और रोकथाम पर जोर देना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए समय पर रोग की पहचान, जांच, उपचार, सामुदायिक सहभागिता, नवाचार आधारित प्रयास और सक्रिय रूप से मरीजों की खोज पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी है।
समय पर जांच और उपचार पर जोर
रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि टीबी की समय पर पहचान होने और प्रत्येक मरीज को उचित उपचार मिलने से इस बीमारी के खिलाफ लड़ाई को और मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अभियान को किसी सीमा तक सीमित नहीं रखना है, बल्कि सरकार, समुदाय और नागरिकों को साथ लेकर इसे व्यापक जनभागीदारी का अभियान बनाना होगा।
उन्होंने देशवासियों से अपील की कि टीबी के संभावित लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय पर जांच कराएं। साथ ही अपने आसपास के लोगों को भी बीमारी के प्रति जागरूक करने की जरूरत है।
संजय सेठ ने कहा कि युवा शक्ति इस अभियान की ऊर्जा है और जनभागीदारी इसकी सबसे बड़ी ताकत है। सरकार, समुदाय और नागरिकों के सामूहिक प्रयास से टीबी के खिलाफ लड़ाई को जन-आंदोलन का रूप दिया जा सकता है और ‘टीबी मुक्त भारत’ के संकल्प को देश के हर नागरिक का संकल्प बनाया जा सकता है।


