अन्नपूर्णा देवी का आरोप- कानून से अवैध खनन पर लगेगी रोक, युवाओं को रोजगार और राज्य के विकास को मिलेगा बढ़ावा
रांची: राजधानी रांची स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन कानून यानी MMDR Amendment Act 2026 को लेकर झारखंड सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कानून पारित होने के बाद झारखंड सरकार जिस तरह इसका विरोध कर रही है, उससे जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है।

अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक विकसित भारत का निर्माण करना है। इसके लिए देश के सभी क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षेत्र है और संशोधन कानून के जरिए इस क्षेत्र में स्थिरता लाने तथा निवेश को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है।
‘युवाओं को राज्य में ही रोजगार से जोड़ना लक्ष्य’
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और यहां खनन क्षेत्र में रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियों की बड़ी संभावनाएं हैं। उनके मुताबिक, केंद्र सरकार का उद्देश्य खनिज संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना और विकास की गति को बढ़ाना है।
उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र में बेहतर व्यवस्था बनने से इससे जुड़े दूसरे क्षेत्रों को भी फायदा मिल सकता है। सरकार का प्रयास है कि प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल विकास के लिए किया जाए और इसका लाभ आम लोगों तक पहुंचे।
झारखंड सरकार पर लगाया ‘जनता को बरगलाने’ का आरोप
अन्नपूर्णा देवी ने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार MMDR संशोधन कानून को लेकर लोगों को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को कानून के वास्तविक प्रावधानों को जनता के सामने रखना चाहिए, न कि इसके खिलाफ भ्रम पैदा करना चाहिए।
भाजपा इससे पहले भी राज्यभर में MMDR कानून को लेकर जन-जागरूकता अभियान चला रही है। पार्टी ने 19 से 30 सितंबर तक विभिन्न जिलों में प्रेस कॉन्फ्रेंस, बैठक और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए कानून के प्रावधानों को जनता तक पहुंचाने की बात कही है।
‘अवैध खनन और अनियमितताओं पर लगेगी रोक’
केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि संशोधन कानून का विरोध इसलिए किया जा रहा है क्योंकि इससे अवैध खनन और अनियमितताओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार का ध्यान अपने राजनीतिक हितों तक सीमित है, जबकि राज्य के युवाओं और आम लोगों के हितों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि खनिज संसाधनों से जुड़े क्षेत्र में पारदर्शिता और बेहतर व्यवस्था जरूरी है। उनके मुताबिक, संशोधित कानून इसी दिशा में एक कदम है।
MMDR कानून को लेकर झारखंड में सियासी टकराव
MMDR संशोधन कानून को लेकर झारखंड में भाजपा और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच राजनीतिक बहस तेज है। भाजपा जहां कानून को विकास, निवेश और खनन क्षेत्र में स्थिरता से जोड़कर देख रही है, वहीं झारखंड सरकार और सत्तारूढ़ दलों की ओर से राज्य के अधिकारों और खनिज राजस्व को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
केंद्र सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, संशोधन का उद्देश्य प्रमुख खनिज क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता लाना है। केंद्र का कहना है कि राज्यों के मौजूदा खनिज कर और वैधानिक भुगतान से मिलने वाले राजस्व में लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को मिलता है और संशोधन के बाद भी यह व्यवस्था जारी रहेगी।
वहीं, विधेयक के प्रावधानों में राज्यों द्वारा खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर लगाए जाने वाले कुछ टैक्स, सेस या अन्य लेवी पर केंद्र द्वारा निर्धारित शर्तों के तहत सीमाएं लगाने का प्रावधान है। इसी मुद्दे को लेकर झारखंड में राजनीतिक और कानूनी विवाद सामने आया है।
फिलहाल MMDR संशोधन कानून झारखंड की राजनीति में बड़ा मुद्दा बना हुआ है और भाजपा लगातार इसके पक्ष में जन-जागरूकता अभियान चला रही है। वहीं, राज्य सरकार और विपक्षी दल कानून के विभिन्न प्रावधानों को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रख रहे हैं।


