14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच तेज, पलामू सहित कई जिलों में दस्तावेज, OMR रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य खंगाले
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने रविवार को झारखंड के पलामू समेत कई जिलों के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में एक साथ व्यापक छापेमारी अभियान चलाया। यह कार्रवाई परीक्षा में कथित धांधली, बिचौलियों के नेटवर्क और परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसी TSR Data Processing Limited (TDPL) के कर्मचारियों की भूमिका की जांच के तहत की गई।
CID की टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से कई संदिग्ध ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क, OMR रिकॉर्ड, परीक्षा से संबंधित दस्तावेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच की गई। एजेंसी का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की तकनीकी छेड़छाड़, डेटा में बदलाव या नियमों के उल्लंघन के साक्ष्य जुटाना है।
पलामू समेत कई जिलों में एक साथ कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, पलामू में उन लोगों और स्थानों को निशाने पर लिया गया, जिनके नाम जांच के दौरान सामने आए थे। CID ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से कई परिसरों की तलाशी ली और महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ डिजिटल उपकरणों को खंगाला। हालांकि, एजेंसी ने अभी तक जब्त की गई सामग्री और पूछताछ से जुड़े विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किए हैं।
चार राज्यों तक फैला जांच का दायरा
जांच एजेंसी को गिरफ्तार आरोपियों और अब तक की पूछताछ से कई महत्वपूर्ण सुराग मिले थे। इन्हीं के आधार पर झारखंड के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में भी एक साथ छापेमारी की गई। CID का मानना है कि परीक्षा अनियमितता का नेटवर्क राज्य की सीमाओं से बाहर तक फैला हो सकता है, इसलिए अंतरराज्यीय स्तर पर भी जांच का दायरा बढ़ाया गया है।
बिचौलियों और TDPL कर्मचारियों पर फोकस
CID की जांच का मुख्य केंद्र कथित बिचौलियों और परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसी TDPL के कर्मचारी हैं। एजेंसी पहले ही TDPL के कई कर्मचारियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि OMR शीट की प्रोसेसिंग, मेरिट लिस्ट तैयार करने या परीक्षा परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की मिलीभगत या तकनीकी हेरफेर तो नहीं किया गया।
पूर्व JPSC अधिकारियों से भी लगातार पूछताछ
JPSC परीक्षा अनियमितता मामले में CID अब तक कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच के दौरान आयोग के पूर्व अधिकारियों, परीक्षा संचालन से जुड़े कर्मचारियों और अन्य संदिग्धों से लगातार पूछताछ की जा रही है। हाल ही में पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते से भी कई दौर की पूछताछ की गई। एजेंसी उनके कार्यकाल के दौरान हुई परीक्षा प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है।
OMR शीट, सर्वर लॉग और डिजिटल रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच
CID परीक्षा से जुड़े मेरिट लिस्ट, OMR शीट, सर्वर लॉग, कंप्यूटर हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड का फॉरेंसिक परीक्षण करा रही है। सफल अभ्यर्थियों द्वारा उपलब्ध कराई गई OMR शीट की प्रतियों का मूल रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है। इसके अलावा संदिग्धों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), डिजिटल कम्युनिकेशन और वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
अभ्यर्थियों से भी मांगी जा रही जानकारी
CID ने निष्पक्ष जांच के लिए अभ्यर्थियों और आम लोगों से भी सहयोग की अपील की है। यदि किसी के पास परीक्षा अनियमितता से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य या अन्य महत्वपूर्ण जानकारी है, तो उसे जांच एजेंसी के साथ साझा करने का आग्रह किया गया है। हर सूचना का सत्यापन कर उसे जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है।
छात्र आंदोलन के बीच तेज हुई कार्रवाई
JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर राज्यभर में अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार जारी है। छात्र संगठन पारदर्शी जांच, दोषियों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं। ऐसे समय में CID की लगातार छापेमारी, गिरफ्तारियां और अंतरराज्यीय जांच को मामले की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
आगे और बढ़ सकती है कार्रवाई
CID अधिकारियों का कहना है कि हालिया छापेमारी में मिले दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है। जांच में यदि नए तथ्य सामने आते हैं तो कई और लोगों से पूछताछ की जाएगी और आवश्यक होने पर नई गिरफ्तारियां भी होंगी। एजेंसी का कहना है कि 14वीं JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े पूरे नेटवर्क का खुलासा होने तक जांच और कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।



