Tuesday, October 13

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य में हुए बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है। मरांडी ने याचिका में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी – ACB) और राज्य सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य की जांच एजेंसी जानबूझकर मामले की जांच को लटका रही है ताकि रसूखदारों को बचाया जा सके।क्या है मुख्य मामला और घोटाला

याचिका के अनुसार, वर्ष 2022 में झारखंड सरकार ने नई उत्पाद नीति (लिकर पॉलिसी) 2022-23 लागू करने की तैयारी की थी। इस नीति के तहत, जुलाई 2023 में झारखंड स्टेट बेवरेजेस कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) ने खुदरा शराब दुकानों पर मैनपावर सप्लाई के लिए दो प्लेसमेंट एजेंसियों की सेवाएं लीं। इन एजेंसियों ने कथित तौर पर फर्जी बैंक गारंटी (Fake Bank Guarantees) जमा की, जिसके बाद बैंक में भुगतान न होने से सरकारी खजाने को करीब 38 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ। बाद में, इस पूरे घोटाले का दायरा करीब 750 करोड़ रुपये तक होने का दावा किया गया। इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 20 मई 2025 को तत्कालीन मुख्य सचिव के प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे और कई अन्य अधिकारियों व शराब सिंडिकेट के खिलाफ निगरानी कैसे (Vigilance P.S. Case No. 09/2025) दर्ज किया था।

एसीबी की ‘लापरवाही’ से आरोपियों को मिली डिफॉल्ट बेल

मरांडी ने अपनी याचिका में एसीबी की जांच प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज होने के एक साल बीत जाने के बाद भी जांच एजेंसी ने चार्जशीट (फाइनल फॉर्म) दाखिल नहीं की है। इस समय पर चार्जशीट दाखिल न करने की “लापरवाही” का फायदा उठाकर मामले के मुख्य आरोपियों को अदालत से डिफॉल्ट जमानत (Default Bail) मिल गई।
याचिका में बकायदा एक सूची दी गई है जिसमें निम्नलिखित आरोपियों को डिफॉल्ट बेल मिलने की बात कही गई है:

विनय कुमार चौबे (तत्कालीन प्रधान सचिव, उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग) — जमानत तिथि: 19.08.2025

गजेंद्र सिंह (पूर्व संयुक्त आयुक्त, उत्पाद विभाग) — जमानत तिथि: 14.07.2025
सुधीर कुमार दास (पूर्व जीएम फाइनेंस) — जमानत तिथि: 20.08.2025
सुधीर कुमार(पूर्व जीएम फाइनेंस-सह-अभियान) — जमानत तिथि: 20.08.2025
नीरज कुमार सिंह (मेसर्स मार्शन इनोवेटिव सिक्योरिटी सर्विस लिमिटेड) — जमानत तिथि: 20.08.2025
विक्रम सिंह अभयसिंह ठाकोर, महेश शेडगे और परेश अभयसिंह ठाकोर (विज़न हॉस्पिटैलिटी सर्विसेज के निदेशक)
राजेंद्र जायसवाल(निदेशक, मेसर्स वेलकम डिस्टिलरीज लिमिटेड)
छत्तीसगढ़ सिंडिकेट से जुड़े हैं तार
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस घोटाले के तार केवल झारखंड तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह अंतरराज्यीय (Inter-State) रैकेट का हिस्सा है। छत्तीसगढ़ के शराब सिंडिकेट के अधिकारियों, व्यवसायियों और नौकरशाहों ने मिलकर झारखंड के अधिकारियों के साथ मिलकर इस पूरी नीति को अपने फायदे के लिए तैयार करवाया था। गोवा, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में भी इस सिंडिकेट से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी हुई है। इस प्रकार के व्यापक अंतरराज्यीय घोटाले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच केवल सीबीआई जैसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी ही कर सकती है।

याचिका में की गई मुख्य मांगें

बाबूलाल मरांडी ने हाईकोर्ट से निम्नलिखित आदेश जारी करने की प्रार्थना की है:
1. विजिलेंस थाना केस नंबर 09/2025 की पूरी जांच तुरंत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी जाए।
2. अब तक हुई जांच में एकत्र किए गए सभी दस्तावेजों, सबूतों और सामग्रियों को सुरक्षित व संरक्षित (Preserve) रखने का निर्देश दिया जाए।
3. राज्य सरकार और एसीबी को अब तक की गई जांच की ताजा स्थिति रिपोर्ट (Status Report) अदालत के समक्ष पेश करने का आदेश दिया जाए।
मरांडी ने कहा कि इससे पहले उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और राज्य के राज्यपाल को भी इस संबंध में पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग की थी, लेकिन कोई कार्रवाई न होने के कारण उन्हें न्याय की गुहार लगाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा है।

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