Tuesday, October 13

रांची : बैंक ऑफ इंडिया ऑफिसर्स एसोसिएशन (BOIOA) की झारखंड राज्य इकाई का 21वां वार्षिक अधिवेशन 10 अक्टूबर को रांची के बरियातू स्थित RIMS ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। अधिवेशन में झारखंड के विभिन्न अंचलों और शाखाओं से लगभग 1,500 अधिकारी सदस्यों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में बैंक अधिकारियों के पेशेवर हितों, कार्य परिस्थितियों, संगठन की मजबूती और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने, प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन यानी PLI में असमानता दूर करने और अधिकारियों के कार्य-जीवन संतुलन जैसे विषय प्रमुखता से उठाए गए।

संगठन की एकजुटता और अधिकारियों के अधिकारों पर जोर

अधिवेशन की अध्यक्षता BOIOA की झारखंड राज्य इकाई के अध्यक्ष कॉमरेड प्रकाश उरांव ने की। कार्यक्रम का संचालन राज्य इकाई के महासचिव कॉमरेड सुनील लकड़ा ने किया, जो फेडरेशन ऑफ बैंक ऑफ इंडिया ऑफिसर्स एसोसिएशंस (FBOIOA) के सलाहकार भी हैं। कार्यक्रम की एंकरिंग कॉमरेड माधवी लकड़ा ने की।

अधिवेशन में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे फेडरेशन के वरिष्ठ पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों का स्वागत किया गया। वक्ताओं ने संगठन को मजबूत बनाने, बैंक अधिकारियों के अधिकारों की रक्षा करने और बैंकिंग क्षेत्र में तेजी से बदलती परिस्थितियों का सामूहिक रूप से सामना करने की जरूरत बताई।

लगभग 1,500 अधिकारियों की भागीदारी को संगठन की एकजुटता और सामूहिक शक्ति के प्रदर्शन के रूप में देखा गया। अधिवेशन में अधिकारियों से संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने और साझा मुद्दों पर एकजुट रहने का आह्वान किया गया।

तकनीकी बदलाव और बैंकिंग क्षेत्र की चुनौतियों पर चर्चा

अधिवेशन को फेडरेशन ऑफ बैंक ऑफ इंडिया ऑफिसर्स एसोसिएशंस के महासचिव कॉमरेड निलेश पवार ने संबोधित किया। उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों और बदलते बैंकिंग परिवेश पर अपने विचार रखे।

उन्होंने अधिकारियों के पेशेवर हितों की रक्षा के साथ संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की भूमिका को सुदृढ़ बनाए रखने और बैंकिंग क्षेत्र में सामने आ रही नई चुनौतियों का सामना करने के लिए सामूहिक प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।

तकनीकी विकास के साथ बैंकिंग सेवाओं के स्वरूप में हो रहे बदलावों के बीच अधिकारियों की जिम्मेदारियों, कार्य परिस्थितियों और पेशेवर हितों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग

अधिवेशन में पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। इसके साथ ही अधिकारियों के कार्य-जीवन संतुलन यानी Work-Life Balance पर चर्चा हुई। बैंक अधिकारियों पर बढ़ते कार्य दबाव, कार्यस्थल की परिस्थितियों और उपलब्ध सुविधाओं से जुड़े विषय भी विचार-विमर्श का हिस्सा रहे।

प्रतिनिधियों ने अधिकारियों के पेशेवर जीवन और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर ध्यान आकर्षित किया। कार्य परिस्थितियों में सुधार और अधिकारियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई।

असमान PLI और निजीकरण से जुड़े मुद्दे भी उठे

बैठक में प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन यानी Performance Linked Incentive (PLI) में कथित असमानता और भेदभाव से संबंधित मुद्दों पर भी विचार किया गया। अधिकारियों के बीच प्रोत्साहन व्यवस्था को लेकर उठने वाले सवालों और उनके पेशेवर हितों पर चर्चा हुई।

इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण से जुड़े नीतिगत मुद्दों, बैंकिंग सेवाओं के भविष्य और बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों के हितों पर भी विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की भूमिका को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।

सामूहिक प्रयासों से चुनौतियों का सामना करने का आह्वान

BOIOA के 21वें वार्षिक अधिवेशन में संगठन की एकजुटता, अधिकारियों के अधिकारों की सुरक्षा और बैंकिंग क्षेत्र में आ रहे बदलावों के बीच पेशेवर हितों को प्राथमिकता देने का संदेश दिया गया। विभिन्न मुद्दों पर हुई चर्चा के माध्यम से अधिकारियों की कार्य परिस्थितियों, सुविधाओं और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की मजबूती से जुड़े विषय सामने आए।

अधिवेशन में शामिल अधिकारियों ने संगठनात्मक एकता के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य साझा समस्याओं पर विचार-विमर्श करना और बैंक अधिकारियों के हितों से जुड़े मुद्दों को संगठन के मंच पर प्रमुखता से उठाना रहा।

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