Wednesday, October 14

रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन के निधन से पूरा राज्य शोक में है। एक बेटे के लिए मां को खोने का दर्द क्या होता है, इसे मुख्यमंत्री के उस भावुक संदेश से समझा जा सकता है, जिसमें उन्होंने लिखा- “बाबा के जाने के बाद मां ही मेरी सबसे बड़ी छांव थीं। आज वह छांव भी प्रकृति की गोद में समा गईं।”

रूपी सोरेन का बुधवार को रांची के हिल व्यू अस्पताल में निधन हुआ। उनके निधन के बाद मुख्यमंत्री ने अपने कार्यक्रम स्थगित कर दिए। अब उनकी पार्थिव देह गुरुवार सुबह 9 बजे पैतृक गांव नेमरा, रामगढ़ ले जाई जाएगी, जहां अंतिम संस्कार होगा। ऐसे में पूरे राज्य की नजर अब राज्य सरकार से लिए तमाम सुविधाओं से लैस JSCA पर है। क्या JSCA इस शोक की घड़ी में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ खड़ा रहेगा या पास और टिकट की बिक्री और क्लेक्शन पर ही JSCA के तमाम पदाधिकारी बंधे रहे जाएंगे। खास तौर पर JSCA अध्यक्ष अजय नाथ शाहदेव इस राज्य शोक के समय क्या कदम उठाते हैं यह बड़ा सवाल है।

झारखंड और हर झारखंडी का अपना दर्द बन गया रूपी सोरेन का निधन

यह सिर्फ एक परिवार का शोक नहीं है। झारखंड की राजनीति और समाज में सोरेन परिवार का एक अलग भावनात्मक स्थान है। स्व शिबू सोरेन की पत्नी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां के निधन की खबर के बाद राज्यभर से संवेदनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में झारखंड की जनता आखिर शोक के।बीच उत्सव का आनंद कैसे ले पाएगी।

गुरुवार को जब रूपी सोरेन का पार्थिव शरीर नेमरा पहुंचेगा तो वहां परिवार, पार्टी कार्यकर्ताओं, समर्थकों , विपक्ष के नेताओं और बड़ी संख्या में अन्य लोगों के पहुंचने की संभावना है। सरकार के मंत्री, झामुमो के नेता और विपक्ष के कई बड़े नेताओं के भी नेमरा पहुंचने की बात कही जा रही है।

ऐसे में नेमरा में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना राज्य पुलिस के लिए बड़ी चुनौती होगी। मुख्यमंत्री खुद वहां मौजूद रहेंगे, ऐसे में वीआईपी मूवमेंट के साथ आम लोगों की भीड़ को संभालना, यातायात नियंत्रित करना और अंतिम संस्कार स्थल तक व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए अहम जिम्मेदारी होगी।

एक तरफ मातृशोक, दूसरी तरफ JSCA में टिकट-पास की हलचल…

इसी बीच रांची में 9 अक्टूबर को भारत और वेस्टइंडीज के बीच टी-20 मुकाबला तय है। JSCA में मैच की तैयारियां चल रही हैं। टिकट बिक्री हो चुकी है और स्टेडियम की सुरक्षा से लेकर ट्रैफिक व्यवस्था तक प्रशासनिक तैयारियां जारी हैं।

JSCA की ओर से मैच को लेकर टिकट बिक्री और अन्य तैयारियों की जानकारी भी लगातार जारी की गई है। यहां तक कि JSCA के सदस्यों और संबद्ध इकाइयों के लिए टिकट वितरण का कार्यक्रम भी पहले जारी किया जा चुका है।

मैच होना अपने आप में कोई असामान्य बात नहीं है। सवाल उस समय की संवेदनशीलता और प्राथमिकता को लेकर है।

जब मुख्यमंत्री अपनी मां के निधन के बाद नेमरा जाने की तैयारी कर रहे हों, पूरा राज्य शोक में हो और लोग अपने मुख्यमंत्री के दुख में खड़े हों, तब क्या JSCA से जुड़े लोगों को भी इस माहौल की गंभीरता का ध्यान नहीं रखना चाहिए? इस संबंध में एक।पहल तो करनी चाहिए ।

BCCI के सामने भी पहले ऐसे हालात आए हैं

अतीत में भी बड़े राजनीतिक व्यक्तित्व के निधन के बाद क्रिकेट आयोजनों को लेकर ऐसे सवाल उठ चुके हैं। 2016 में तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता के निधन के बाद चेन्नई में भारत-इंग्लैंड टेस्ट को लेकर BCCI और स्थानीय क्रिकेट प्रशासन ने स्थिति पर विचार किया था। अंततः चेन्नई टेस्ट निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हुआ, जबकि उसी समय झारखंड और ओडिशा के बीच रणजी मुकाबले को री-शेड्यूल किया गया था।

हाल के वर्षों में BCCI ने राष्ट्रीय शोक की परिस्थितियों में मैच के माहौल में बदलाव का उदाहरण भी दिया है। 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद एक मैच में खिलाड़ियों ने काली पट्टी बांधी, मौन रखा गया और संगीत, DJ, चीयरलीडर्स तथा आतिशबाजी जैसी मनोरंजन गतिविधियां नहीं रखी गईं।

अब JSCA अध्यक्ष अजय नाथ शाहदेव के अगले कदम पर नजर

इस पूरे घटनाक्रम के बीच निगाहें JSCA अध्यक्ष और कांग्रेस नेता अजय नाथ शाहदेव पर भी हैं। 9 अक्टूबर के मैच की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन और JSCA के बीच लगातार समन्वय चल रहा है। हालिया बैठक में भी JSCA अध्यक्ष समेत अधिकारी मौजूद रहे थे।

अब सवाल यह है कि रूपी सोरेन के निधन और पूरे राज्य में बने शोक के माहौल के बीच JSCA का अगला कदम क्या होगा? खास तौर पर अजय नाथ शाहदेव खुद कांग्रेस पार्टी के हटिया क्षेत्र से उम्मीदवार रहते हैं ऐसे में क्षेत्र की जनता के बीच अजय के भावी कदम को लेकर काफी चर्चाएं हैं। क्योंकि झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता जी के जाने का दुख भी एक अलग स्थान रखता है।

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