फाइनल में सोनीपत की टीम को 2-1 से हराकर बनीं चैंपियन, अंडर-17 बालिका टीम ने पहली बार दिलाया खिताब
रांची: हॉकी के मैदान पर झारखंड का परचम लहराने के बाद राज्य की बेटियां नेहरू कप ट्रॉफी के साथ वापस लौटीं, तो उनका स्वागत उत्साह के साथ किया गया। 32वें चरनजीत राय नेहरू गर्ल्स हॉकी टूर्नामेंट का खिताब जीतने वाली टीम का गुरुवार को झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी), रांची परिसर में सम्मान किया गया। खिलाड़ियों की इस उपलब्धि को राज्य की स्कूली हॉकी के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है।
नई दिल्ली के शिवाजी स्टेडियम में आयोजित प्रतियोगिता के फाइनल में मुख्यमंत्री उत्कृष्ट बालिका उच्च विद्यालय, सिमडेगा की टीम ने डायरेक्टरेट जनरल एनसीसी, सोनीपत को 2-1 से हराकर खिताब अपने नाम किया। इस जीत के साथ टीम ने राष्ट्रीय स्तर पर झारखंड की स्कूली हॉकी को नई पहचान दिलाई।
पहली बार चैंपियन बनी झारखंड की अंडर-17 टीम
झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद को नेहरू हॉकी प्रतियोगिता में राज्य की स्कूली टीमों की भागीदारी की जिम्मेदारी मिलने के बाद यह पहला मौका है, जब राज्य की अंडर-17 बालिका टीम ने चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया है। इससे पहले 2023 में मुख्यमंत्री उत्कृष्ट उच्च विद्यालय, बरियातू की टीम उपविजेता रही थी। इस बार सिमडेगा की बेटियों ने खिताब जीतकर नया इतिहास रच दिया।
शिक्षा के साथ खेलों को बढ़ावा देने का मिला परिणाम
जीत के बाद जेईपीसी परिसर में आयोजित सम्मान समारोह में राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन और परिषद के अधिकारियों-कर्मचारियों ने खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और टीम मैनेजर का अभिनंदन किया। शशि रंजन ने कहा कि बच्चों के समग्र विकास के लिए शिक्षा के साथ खेलों को बढ़ावा देने की विभागीय पहल सकारात्मक परिणाम दे रही है। उन्होंने टीम की जीत को खिलाड़ियों की प्रतिभा, मेहनत, अनुशासन और संकल्प का प्रमाण बताते हुए सभी को बधाई दी।
इस मौके पर प्रशासी पदाधिकारी मनोज कुमार, उपनिदेशक आशीष पांडेय, अतिरिक्त वित्त नियंत्रक ओम प्रकाश मिश्रा, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी धीरसेन ए. सोरेंग समेत परिषद के अन्य अधिकारी-कर्मचारी और राज्य खेल कोषांग के सदस्य मौजूद रहे। सभी ने विजेता टीम को सम्मानित करते हुए खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
नेहरू कप की यह जीत झारखंड की युवा हॉकी खिलाड़ियों के लिए बड़ी उपलब्धि है। सिमडेगा की बेटियों ने अपने प्रदर्शन से साबित किया है कि सही अवसर, प्रशिक्षण और मेहनत के दम पर राज्य की स्कूली टीमें भी राष्ट्रीय स्तर पर चैंपियन बन सकती हैं।


