Wednesday, October 28

विश्व स्ट्रोक दिवस पर विशेषज्ञों ने किया सतर्क, ‘बी फास्ट’ फॉर्मूले से पहचानें खतरे के संकेत; समय पर इलाज से बच सकती है मरीज की जान

रांची। अचानक चेहरा टेढ़ा होना, हाथ में कमजोरी आना, बोलने में परेशानी या शरीर का संतुलन बिगड़ना सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। ये लक्षण ब्रेन स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं, जिसमें हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। इसी संदेश के साथ 29 अक्टूबर को मनाए जाने वाले विश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर भगवान महावीर मणिपाल हॉस्पिटल, रांची ने लोगों को जागरूक किया। अस्पताल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने स्ट्रोक के लक्षणों की समय पर पहचान, तत्काल चिकित्सा सहायता और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर जोर दिया।

इस वर्ष की थीम ‘हर मिनट महत्वपूर्ण है’ के माध्यम से लोगों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि स्ट्रोक के लक्षण सामने आने पर इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। समय पर अस्पताल पहुंचने से गंभीर जटिलताओं को कम करने और मरीज के बेहतर उपचार की संभावना बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

क्या है स्ट्रोक और क्यों है खतरनाक?

विशेषज्ञों ने बताया कि स्ट्रोक तब होता है, जब मस्तिष्क के किसी हिस्से तक रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है या मस्तिष्क में रक्तस्राव होने लगता है। ऐसी स्थिति में मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। इसका असर व्यक्ति की बोलने, देखने, चलने और शरीर का संतुलन बनाए रखने की क्षमता पर पड़ सकता है।

स्ट्रोक के मामले में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसलिए लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपचार या अपने आप ठीक होने का इंतजार करने के बजाय तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

‘बी फास्ट’ से पहचानें स्ट्रोक के शुरुआती संकेत

डॉक्टरों ने स्ट्रोक के लक्षण पहचानने के लिए ‘बी फास्ट’ (BE FAST) तरीका अपनाने की सलाह दी। इसके तहत प्रमुख संकेतों पर ध्यान देना चाहिए:

  • B – Balance: अचानक शरीर का संतुलन बिगड़ना या चलने में परेशानी।
  • E – Eyes: अचानक दिखाई देने में परेशानी या नजर में बदलाव।
  • F – Face: चेहरे का एक तरफ लटक जाना।
  • A – Arms: एक हाथ में अचानक कमजोरी या उसे उठाने में कठिनाई।
  • S – Speech: बोलने में परेशानी या बोली अस्पष्ट होना।
  • T – Time: इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि सभी लक्षण एक साथ दिखाई देना जरूरी नहीं है। इनमें से कोई एक संकेत भी स्ट्रोक की आशंका पैदा कर सकता है।

न्यूरोलॉजी से क्रिटिकल केयर तक, टीमवर्क जरूरी

प्रेस कॉन्फ्रेंस में न्यूरोलॉजी के कंसल्टेंट डॉ. दीपक चंद्र प्रकाश और डॉ. रोहित केशव, न्यूरोसर्जरी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अमित कुमार और डॉ. विक्रम सिंह, इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के एचओडी एवं कंसल्टेंट डॉ. रोहित कुमार सेंगर तथा क्रिटिकल केयर के चेयरमैन डॉ. विजय कुमार मिश्रा शामिल हुए।

विशेषज्ञों ने बताया कि स्ट्रोक के उपचार में न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, इमरजेंसी मेडिसिन और क्रिटिकल केयर टीम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सीटी स्कैन या एमआरआई जैसी जांच से स्ट्रोक के प्रकार का पता लगाया जाता है। इसके आधार पर उपचार तय होता है।

कुछ मरीजों में, यदि इस्केमिक स्ट्रोक यानी मस्तिष्क की नस में खून का थक्का जमने के कारण स्ट्रोक हुआ हो, तो निर्धारित समय-सीमा और चिकित्सकीय मानदंडों के अनुसार थक्का घोलने की दवा या मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी की जा सकती है। यह प्रक्रिया चुनिंदा मरीजों में विशेषज्ञों द्वारा की जाती है। उपचार के बाद फिजियोथेरेपी और पुनर्वास भी मरीज को दोबारा चलने-फिरने तथा रोजमर्रा के काम करने में मदद कर सकते हैं।

जागरूकता से मिल सकती है समय पर मदद

भगवान महावीर मणिपाल हॉस्पिटल, रांची के डायरेक्टर मनोज रॉय ने कहा कि विश्व स्ट्रोक दिवस पर लोगों को जागरूक करना अस्पताल की प्रमुख पहल है। उन्होंने कहा कि स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानना और बिना देर किए अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों की टीम के बीच बेहतर समन्वय और समय पर उपचार से मरीज को बेहतर देखभाल उपलब्ध कराई जा सकती है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि स्ट्रोक के संकेतों को नजरअंदाज न करें। समय पर चिकित्सा सहायता और सही उपचार मरीज की जान बचाने तथा लंबे समय तक होने वाली शारीरिक अक्षमता के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

Share.
Next Story
पहले ATM में फंसाया कार्ड, फिर उड़ा ले गए पैसे! धनबाद में फिल्मी अंदाज वाली ठगी का खुलासा, दो शातिर गिरफ्तार
Exit mobile version