नई दिल्ली: चुनावी मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर INDIA ब्लॉक के सांसदों ने मंगलवार को संसद से निर्वाचन आयोग (ECI) मुख्यालय की ओर मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने संसद मार्ग पर नीति आयोग के पास बैरिकेडिंग कर विपक्षी सांसदों को रोक दिया।
प्रदर्शन में लोकसभा और राज्यसभा के कुल 237 सांसदों के शामिल होने की बात सामने आई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल और माणिकम टैगोर के अलावा समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव तथा तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ’ब्रायन और सागरिका घोष समेत INDIA ब्लॉक के कई नेता मार्च में शामिल हुए।
नीति आयोग के पास पुलिस ने रोका मार्च
सांसद संसद परिसर से ECI मुख्यालय की ओर बढ़ रहे थे। दिल्ली पुलिस ने संसद मार्ग पर नीति आयोग कार्यालय के पास प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इस दौरान इलाके में भारी सुरक्षा व्यवस्था और कई स्तर की बैरिकेडिंग की गई थी।
मार्च रोके जाने के बाद विपक्षी सांसद सड़क पर धरने पर बैठ गए। इसी दौरान राहुल गांधी पुलिस की बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और हाथ में तिरंगा लहराया। विपक्षी सांसदों ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
कई विपक्षी नेता हिरासत में लिए गए
पुलिस द्वारा मार्च रोके जाने के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन, सागरिका घोष, अभिषेक बनर्जी समेत कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया। पुलिस उन्हें बसों में बैठाकर वहां से ले गई।
टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने कहा कि विपक्षी सांसदों को हिरासत में लेकर किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया जा रहा है। वहीं, मार्च के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा बाद में आकाशवाणी भवन की ओर भी गए, जबकि उनका प्रयास ECI मुख्यालय तक पहुंचने का था।
चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष का विरोध
INDIA ब्लॉक का यह प्रदर्शन मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर केंद्रित रहा। विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान संसद से ECI मुख्यालय तक जाने वाले मार्ग पर पुलिस की भारी मौजूदगी रही। पुलिस द्वारा मार्च रोके जाने के बाद विपक्षी नेताओं की हिरासत से प्रदर्शन और अधिक राजनीतिक रूप से गरमा गया।


