झारखंड में इन दिनों जंगल और इंसानी बस्तियों के बीच की दूरी जैसे लगातार कम होती जा रही है। राज्य के अलग-अलग इलाकों में जंगली हाथियों के झुंड की लगातार मौजूदगी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। कहीं हाथियों का झुंड जंगलों में डेरा डाले हुए है, तो कहीं खेतों में घुसकर फसलों को रौंद रहा है। वहीं कुछ इलाकों में हाथियों के गांवों और आबादी के करीब पहुंचने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। हालात को देखते हुए कई जगह वन विभाग की ओर से अलर्ट जारी कर लोगों को विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है। वहीं आज बुधवार की सुबह गुमला जिले के भरनो थाना क्षेत्र के मारासिली पंचायत स्थित महूगांव टंगरा टोली में हाथी के हमले में 65 वर्षीय शनि उरांव की मौत हो गई। बताया जाता है कि शनि उरांव शौच के लिए घर से कुछ दूरी पर झाड़ियों की ओर गए थे। इसी दौरान उनका सामना पहले से मौजूद हाथी से हो गया। हाथी ने उन्हें कुचल दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों की निगरानी बढ़ाने, लोगों को सतर्क करने और मृतक के परिजनों को नियमानुसार मुआवजा देने की मांग की है।
गिरिडीह में 25 हाथियों के झुंड से दहशत
बीते दिनों गिरिडीह के डुमरी प्रखंड में करीब 25 जंगली हाथियों के झुंड की मौजूदगी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी। बड़की बेरगी पंचायत के छोटकी बेरगी जंगल में हाथियों का झुंड मौजूद बताया गया है। हाथियों की लगातार आवाजाही से आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। रिपोर्ट के मुताबिक हाथियों ने मड़ुआ और मकई की फसलों को नुकसान पहुंचाया है। स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने आसपास के ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है और शाम के बाद जंगल तथा सुनसान इलाकों की ओर जाने से बचने को कहा है।
गिरिडीह में हाथियों की गतिविधियां सिर्फ डुमरी तक सीमित नहीं हैं। गावां प्रखंड में भी जंगली हाथियों की मौजूदगी ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। धनेता गांव में हाथियों ने धान और मक्का की फसल को नुकसान पहुंचाया। वहीं हाथियों के गावां बाजार के करीब पहुंचने की खबर ने चिंता और बढ़ा दी। पीरटांड़ के कर्णपुरा गांव में भी हाथियों के झुंड ने दस्तक दी और फसलों के साथ चहारदीवारी को नुकसान पहुंचाने की सूचना सामने आई।
खूंटी और गोमिया में भी हाथियों का डेरा
पिछले कुछ महीनों की बात करें तो खूंटी जिले में भी हाथियों की आवाजाही लगातार बनी हुई है। रनिया से लेकर तोरपा सीमा तक करीब नौ हाथियों का झुंड घूमता रहा है। इससे पहले रनिया के बोंगतेल समेत आसपास के गांवों में करीब 10 हाथियों ने धान की फसल को नुकसान पहुंचाया था। वहीं बोकारो के गोमिया में करीब 30 हाथियों के झुंड की मौजूदगी ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी थी। हाथियों की गतिविधियों को देखते हुए इलाके में हाई अलर्ट तक जारी किया गया था।
लातेहार में करंट से हाथी की मौत
इसी बीच करीब दो दिन पहले लातेहार के बालूमाथ से मानव-हाथी संघर्ष की बेहद गंभीर तस्वीर सामने आई। कोमर गांव में करंट की चपेट में आने से एक वयस्क हाथी की मौत हो गई। यह घटना बताती है कि हाथियों और इंसानी आबादी के बीच बढ़ता टकराव अब सिर्फ फसल नुकसान तक सीमित नहीं है।
बड़ा सवाल आखिर क्यों बढ़ रहा संघर्ष?
गिरिडीह, खूंटी, बोकारो और लातेहार समेत झारखंड के कई जिलों में हाथियों की बढ़ती आवाजाही ने एक बड़े सवाल को जन्म दिया है। आखिर जंगलों से निकलकर हाथी लगातार आबादी वाले इलाकों की ओर क्यों बढ़ रहे हैं? फसल नुकसान, ग्रामीणों में डर और हाथियों की मौत की घटनाएं इस संघर्ष की गंभीरता को सामने ला रही हैं।
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