रांची: नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति दिनेश सिंह पर करोड़ों के घोटाले के आरोप लगे हैं । वित्तीय लेनदेन से जुड़ी गड़बड़ियों को लेकर राजभवन से बड़ा फैसला सामने आया है। राज्यपाल ने उनकी वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां जब्त कर ली हैं। इतना ही नहीं, उन्हें अपने पद से त्यागपत्र देने का निर्देश भी दिया गया है।
लेकिन सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि कुलपति की शक्तियां तक जब्त करनी पड़ीं?
राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, अगर कुलपति ने त्यागपत्र नहीं दिया, तो उन्हें पद से हटाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
विशेष ऑडिट के बाद हुई कार्रवाई
दरअसल, नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितता की शिकायतें मिलने के बाद राज्यपाल के आदेश पर विश्वविद्यालय का विशेष ऑडिट कराया गया था।
दिए गए इनपुट के मुताबिक, ऑडिट में दिनेश सिंह के कार्यकाल के दौरान करोड़ों रुपये की गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। इसके अलावा राज्यपाल के आदेश के खिलाफ परीक्षा नियंत्रक समेत अन्य पदों पर नियुक्तियां किए जाने का मामला भी सामने आया था।
यही वे बिंदु हैं, जिनके आधार पर अब राज्यपाल ने कुलपति की वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां जब्त करने का फैसला लिया है।
रांची यूनिवर्सिटी में भी उठे थे सवाल
दिनेश सिंह का नाम इससे पहले भी विश्वविद्यालय प्रशासन में अनियमितताओं की शिकायतों को लेकर सामने आ चुका है। उन्हें रांची विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति के पद से भी विभिन्न प्रकार की अनियमितताओं की शिकायतों के बाद हटाया गया था।
रांची विश्वविद्यालय में प्रभारी कुलपति रहते हुए उन पर खूंटी के एक प्राचार्य पर एक खास ठेकेदार से किताब, फर्नीचर आदि खरीदने का आदेश देने के लिए दबाव बनाने का आरोप भी लगा था।
अब नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में विशेष ऑडिट के बाद हुई कार्रवाई ने एक बार फिर विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसे भी पढ़े – मैदान में उतरीं बेटियां, फुटबॉल से लेकर खो-खो तक में दिखाया अपना दम


