झारखंड अब अपनी पारंपरिक कोयला आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ते हुए महत्वपूर्ण और उच्च मूल्य वाले खनिजों पर फोकस बढ़ाने की तैयारी में है। खान एवं भू-तत्व विभाग के सचिव अरवा राजकमल ने खनिज अन्वेषण से जुड़े अधिकारियों, विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा में इस बदलाव की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पर्यावरण अनुकूल और कम कार्बन उत्सर्जन वाले खनन को प्राथमिकता देनी होगी।
सचिव ने क्या कहा ?
सचिव ने कहा कि झारखंड फिलहाल कोयला उत्पादन में बेहतर स्थिति में है, लेकिन यह वृद्धि हमेशा इसी गति से जारी नहीं रह सकती। भविष्य में कोयला उत्पादन एक स्तर पर पहुंचकर घट सकता है। इसलिए अभी से कोयले के बाद की खनिज अर्थव्यवस्था की तैयारी जरूरी है।
राज्य में लिथियम, पन्ना, यूरेनियम समेत अन्य खनिजों के अन्वेषण को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। पिछले एक दशक में विभिन्न केंद्रीय और राज्य एजेंसियों ने प्रमुख खनिजों के भंडार की पहचान और आकलन का काम किया है। इस दौरान कई खनिज ब्लॉक तैयार किए गए हैं, जिनमें लौह अयस्क, मैंगनीज, चूना पत्थर, डोलोमाइट, बॉक्साइट, तांबा और ग्रेफाइट शामिल हैं।
पन्ना और यूरेनियम के क्षेत्र में भी प्रगति
राज्य में पन्ना के दो ब्लॉकों में भूवैज्ञानिक अन्वेषण पूरा हो चुका है। वहीं, बानाडूंगरी यूरेनियम ब्लॉक के सीमांकन और भूमि वर्गीकरण का काम भी पूरा किया गया है। विभाग अब खनिजों के अन्वेषण से लेकर नीलामी और खनन तक की प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बनाने पर जोर दे रहा है।
बैठक में खनिज खोज के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। तकनीक की मदद से अन्वेषण को तेज, सटीक और कम खर्चीला बनाने की कोशिश होगी। अधिकारियों ने कहा कि अगले 10, 20 वर्षों और उससे आगे की जरूरतों को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक खनिज नीति तैयार करना जरूरी है।
इसे भी पढ़े – बैंक के नाम से आया SMS असली है या फर्जी? मिनटों में ऐसे करें पहचान


