रांची: अपर बाजार की गलियों में भीड़ इतनी कि प्रशासन को चार पहिया गाड़ियों की एंट्री बंद करनी पड़ी, लेकिन दुकानों पर खड़ा हर ग्राहक एक सवाल से जूझ रहा है: इस बार कितना खर्च करें?
देश भर से आ रहे आंकड़े बताते हैं कि इस दिवाली लोग खरीदारी तो कर रहे हैं, लेकिन सोच-समझकर। महंगाई बढ़ी है, लोन महंगा हुआ है, और ज्यादातर परिवार अपनी बचत से त्योहार का खर्च निकाल रहे हैं। इसी बीच झारखंड में धनतेरस से ठीक पहले लाखों महिलाओं के खाते में मंईयां सम्मान योजना की किस्त पहुंची है।

देश की तस्वीर: खर्च 6% कम, बचत पर बोझ
सोशल प्लेटफॉर्म LocalCircles के “मूड ऑफ द कंज्यूमर 2026” सर्वे में देश के 307 जिलों के 67,000 से ज्यादा शहरी परिवारों ने हिस्सा लिया। इसके मुताबिक:
- इस त्योहारी सीजन में शहरी भारत का कुल खर्च करीब 1.97 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 2.10 लाख करोड़ से करीब 6% कम है।
- औसतन एक परिवार करीब 20,000 रुपये खर्च करेगा।
- खर्च करने वाले 83% परिवार कम से कम कुछ हिस्सा अपनी बचत से निकालेंगे, और 16% पूरा खर्च बचत से ही करेंगे।
इसकी वजह भी साफ है। सितंबर में खुदरा महंगाई 5.54% और खाने-पीने की चीजों की महंगाई 7.74% तक पहुंच गई। अक्टूबर में रिजर्व बैंक ने रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% कर दिया, जिससे लोन और EMI महंगे होने का असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है। सर्वे के मुताबिक लोग त्योहार से मुंह नहीं मोड़ रहे, बस ज्यादा चुनिंदा होकर खरीद रहे हैं।
क्या खरीद रहे हैं लोग? : सर्वे में खरीदारी की योजना बना रहे परिवारों की पसंद इस तरह सामने आई:
- कपड़े, जूते-चप्पल और एक्सेसरीज: 72%, सबसे बड़ी पसंद
- घरेलू उपकरण और फर्नीचर: 45%
- घूमना-फिरना: 45%
- मिठाइयां, खाने-पीने की चीजें और गिफ्ट: 39%
- मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स: 22%
- गहने: सिर्फ 6%, सोने की ऊंची कीमतों की वजह से
दिलचस्प बात यह है कि ऑनलाइन शॉपिंग का ट्रेंड इसके उलट दिख रहा है। रिसर्च फर्म Redseer के हवाले से आई रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दिवाली ऑनलाइन त्योहारी बिक्री करीब 25% बढ़कर 1.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। यानी लोग कुल खर्च भले कम करें, डिस्काउंट और ऑफर के लिए मोबाइल पर ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं।
झारखंड: धनतेरस से पहले महिलाओं के खाते में किस्त
झारखंड में इस तस्वीर का एक अलग पहलू भी है। मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना की अक्टूबर की किस्त धनतेरस से ठीक पहले भेजी गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक सिर्फ रांची जिले में 3,94,007 महिलाओं के खाते में आधार आधारित DBT के जरिए 2,500-2,500 रुपये पहुंचे। कुल रकम करीब 98.5 करोड़ रुपये है। त्योहार से ठीक पहले आई यह रकम कई परिवारों, खासकर ग्रामीण और कम आय वाले घरों के लिए दिवाली का बजट संभालने में मददगार हो सकती है।
दिये, कपड़े, पूजा का सामान और गुड़-आटा जैसी चीजों पर खर्च का फायदा सीधे स्थानीय दुकानदारों तक भी पहुंचता है। रांची के उपायुक्त ने खुद कुम्हार बस्ती से दीये खरीदकर लोगों से कारीगरों को सही दाम देने की अपील भी की है।
हालांकि, राज्य के बाजारों में इस बार बिक्री पिछले साल से कितनी कम या ज्यादा है, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है राष्ट्रीय सर्वे शहरी परिवारों पर आधारित है, जबकि झारखंड की बड़ी आबादी गांवों में रहती है, इसलिए यहां की तस्वीर कुछ अलग भी हो सकती है।
महंगाई में स्मार्ट दिवाली: 7 बजट टिप्स
- पहले लिस्ट, फिर बाजार: जरूरी सामान की सूची बनाएं और कुल बजट तय कर लें। ऑफर देखकर बिना जरूरत की खरीदारी से बचें।
- पूरी बचत न तोड़ें: सर्वे की चेतावनी है कि अभी बचत खत्म की तो शादी-ब्याह के सीजन और आगे के खर्चों के लिए कम पैसे बचेंगे। मेडिकल इमरजेंसी का फंड अलग रखें।
- EMI और “अभी खरीदो, बाद में चुकाओ” से सावधान: ब्याज दर बढ़ी है। छोटी चीजों के लिए EMI लेने से पहले कुल भुगतान जरूर जोड़ें।
- ऑनलाइन और ऑफलाइन दाम मिलाएं: कई बार लोकल दुकान पर मोलभाव से बेहतर सौदा मिल जाता है।
- मिट्टी के दीये और लोकल सामान: कीमत भी कम, और आपका पैसा अपने ही शहर के कारीगरों तक
पहुंचता है। - घर की मिठाई: बाजार की महंगी और मिलावट के खतरे वाली मिठाइयों की जगह घर पर ठेकुआ, लड्डू या खीर बनाएं।
- ऑनलाइन ठगी से बचें: “दिवाली कैशबैक” वाले लिंक और अनजान QR कोड से दूर रहें। किसी को OTP न बताएं।
कुल मिलाकर, इस बार की दिवाली खर्च से ज्यादा समझदारी की दिवाली है। रौशनी का त्योहार दिखावे से नहीं, परिवार के साथ और मन की खुशी से मनता है। शुभ दीपावली!


