रांची: झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन की कार्यवाही के दौरान वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पहला अनुपूरक बजट पटल पर रखा गया। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सदन में कुल 8,399 करोड़ 31 लाख 11 हजार रुपए का पहला अनुपूरक बजट पेश किया।
इस अनुपूरक बजट में राज्य के बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। बजट में ग्रामीण विकास विभाग को सबसे अधिक 4,258.67 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जबकि राजभाषा विभाग को सबसे कम 0.01 करोड़ रुपए (1.00 लाख रुपए) का प्रावधान मिला है।
विभागवार वित्तीय प्रावधान
- पशुपालन विभाग: 0.05 करोड़ रुपए (05 लाख रुपए)
- भवन निर्माण विभाग: 2.05 करोड़ रुपए (205 लाख रुपए)
- मंत्रिमंडल सचिवालय: 21.75 करोड़ रुपए (2175 लाख रुपए)
- राज्यपाल सचिवालय: 0.05 करोड़ रुपए (05 लाख रुपए)
- मंत्रिमंडल निर्वाचन विभाग: 86.77 करोड़ रुपए (8677.65 लाख रुपए)
- निगरानी विभाग: 1.25 करोड़ रुपए (125.5 लाख रुपए)
- नागर विमानन विभाग: 27.07 करोड़ रुपए (2707 लाख रुपए)
- सहकारिता विभाग: 0.04 करोड़ रुपए (04 लाख रुपए)
- ऊर्जा विभाग: 1.43 करोड़ रुपए (143.57 लाख रुपए)
- उत्पाद विभाग: 0.91 करोड़ रुपए (91 लाख रुपए)
- वित्त विभाग: 5.69 करोड़ रुपए (569.58 लाख रुपए)
- ब्याज भुगतान: 152.00 करोड़ रुपए (15200.00 लाख रुपए)
- ऋण अदायगी: 31.08 करोड़ रुपए (3108 लाख रुपए)
- वित्त अंकेक्षण विभाग: 0.23 करोड़ रुपए (23.79 लाख रुपए)
- वाणिज्य कर विभाग: 8.85 करोड़ रुपए (885.20 लाख रुपए)
- वन विभाग: 23.55 करोड़ रुपए (2355.00 लाख रुपए)
- स्वास्थ्य चिकित्सा एवं परिवार कल्याण विभाग: 218.16 करोड़ रुपए (21816.90 लाख रुपए)
- गृह कारा विभाग: 144.16 करोड़ रुपए (14416.93 लाख रुपए)
- सूचना एवं जनसंपर्क विभाग: 16.95 करोड़ रुपए (1695.50 लाख रुपए)
- कोषागार विभाग: 0.59 करोड़ रुपए (59.49 लाख रुपए)
- श्रम नियोजन विभाग: 1.99 करोड़ रुपए (199.66 लाख रुपए)
- विधि विभाग: 29.54 करोड़ रुपए (2954.00 लाख रुपए)
- हाईकोर्ट: 19.20 करोड़ रुपए (1920.00 लाख रुपए)
- खान विभाग: 173.65 करोड़ रुपए (17365.00 लाख रुपए)
- अल्पसंख्यक कल्याण विभाग: 0.22 करोड़ रुपए (22.24 लाख रुपए)
- संसदीय कार्य विभाग: 0.20 करोड़ रुपए (20.00 लाख रुपए)
- विधानसभा विभाग: 1.45 करोड़ रुपए (145.00 लाख रुपए)
- कार्मिक विभाग: 33.20 करोड़ रुपए (3320.77 लाख रुपए)
- योजना विकास विभाग: 0.20 करोड़ रुपए (20.00 लाख रुपए)
- पेयजल स्वच्छता विभाग: 271.61 करोड़ रुपए (27161.04 लाख रुपए)
- राजभाषा विभाग: 0.01 करोड़ रुपए (1.00 लाख रुपए)
- निबंधन विभाग: 2.00 करोड़ रुपए (200.00 लाख रुपए)
- आपदा प्रबंधन विभाग: 490.68 करोड़ रुपए (49068.69 लाख रुपए)
- भू राजस्व विभाग: 16.29 करोड़ रुपए (1629.11 लाख रुपए)
- पथ निर्माण विभाग: 0.04 करोड़ रुपए (4.00 लाख रुपए)
- ग्रामीण विकास विभाग: 4,258.67 करोड़ रुपए (425867.35 लाख रुपए)
- स्कूली शिक्षा विभाग: 0.15 करोड़ रुपए (15.00 लाख रुपए)
- सूचना प्रौद्योगिकी विभाग: 66.52 करोड़ रुपए (6652.50 लाख रुपए)
- पर्यटन विभाग: 36.76 करोड़ रुपए (3676.15 लाख रुपए)
- नगर विकास विभाग: 20.20 करोड़ रुपए (2020.94 लाख रुपए)
- जलसंसाधन विभाग: 18.06 करोड़ रुपए (1806.25 लाख रुपए)
- एसटी-एससी पिछड़ा वर्ग विभाग: 91.24 करोड़ रुपए (9124.50 लाख रुपए)
- कला संस्कृति विभाग: 0.50 करोड़ रुपए (50.72 लाख रुपए)
- डेयरी विभाग: 7.06 करोड़ रुपए (706.24 लाख रुपए)
- ग्रामीण कार्य विभाग: 885.83 करोड़ रुपए (88583.00 लाख रुपए)
- पंचायती राज विभाग: 244.80 करोड़ रुपए (24480.20 लाख रुपए)
- माध्यमिक शिक्षा विभाग: 25.05 करोड़ रुपए (2505.67 लाख रुपए)
- प्राथमिक शिक्षा विभाग: 946.30 करोड़ रुपए (94630.95 लाख रुपए)
- महिला बाल विकास विभाग: 14.79 करोड़ रुपए (1479.10 लाख रुपए)
इस पहले अनुपूरक बजट से स्पष्ट है कि राज्य सरकार ने ग्रामीण विकास, प्राथमिक शिक्षा, ग्रामीण कार्य, आपदा प्रबंधन, पेयजल, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना से जुड़े क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया है। वहीं दूसरी ओर, कुछ विभागों को प्रतीकात्मक या सीमित राशि का ही प्रावधान किया गया है। इससे आगामी वित्तीय वर्ष में सरकार की विकास संबंधी प्राथमिकताओं की स्पष्ट तस्वीर सामने आती है।
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