Tuesday, October 13

झारखंड लोक सेवा आयोग की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा में गड़बड़ी की जांच अब सिर्फ आयोग और उससे जुड़े लोगों तक सीमित नहीं रह गई है। केंद्रीय जांच एजेंसी CBI की जांच का दायरा अब कोचिंग संस्थानों तक पहुंच गया है। रांची और हजारीबाग में दो कोचिंग संचालकों के ठिकानों पर हुई छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों ने जांच की दिशा को और गंभीर बना दिया है।

अब CBI यह पता लगाने में जुटी है कि क्या कोचिंग संस्थानों के जरिए अभ्यर्थियों को परीक्षा में अनुचित तरीके से फायदा पहुंचाया गया था?

कोचिंग संस्थानों में मिले दस्तावेजों ने बढ़ाई जांच की रफ्तार

छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेज और साक्ष्य अब CBI की जांच के केंद्र में हैं। एजेंसी इन दस्तावेजों के जरिए कोचिंग संचालकों, अभ्यर्थियों और मामले में सामने आए अन्य आरोपियों के बीच संभावित संपर्कों की कड़ियां जोड़ रही है।

इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इन संस्थानों से जुड़े लोगों का TDPL के निदेशक और मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी अथवा कथित सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों के साथ किस तरह का संपर्क था।

इंटरव्यू में सफलता के लिए 15 लाख रुपये की डील

जांच के दौरान अभय तिवारी से पूछताछ में एक बड़ा दावा सामने आया है। बताया गया है कि 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा के साक्षात्कार में अभ्यर्थियों को सफल कराने के लिए प्रति अभ्यर्थी 15 लाख रुपये तक की रकम लिए जाने की बात पूछताछ में सामने आई।

जांच के घेरे में कई नाम, अब कड़ियां जोड़ रही एजेंसी

इस पूरे प्रकरण में पतंजलि कोचिंग के रवि कुमार, TDPL के निदेशक रामवीर सिंह और कोचिंग संचालक आदित्य पांडेय समेत कई नाम जांच के दौरान सामने आए हैं।

CBI अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि इन लोगों के बीच वास्तविक संबंध क्या थे और परीक्षा से जुड़े कथित नेटवर्क में उनकी भूमिका कितनी थी।

जांच में JPSC की पूर्व सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य का नाम भी सामने आया है। आरोप है कि इंटरव्यू में अभ्यर्थियों को सफल कराने के लिए उनके पीए ब्रजराम के माध्यम से पैसे लिए जाते थे।

पूर्व JPSC अध्यक्ष से लेकर कंप्यूटर ऑपरेटर तक कनेक्शन की पड़ताल

मामले की जांच में JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते का नाम भी सामने आया है। जांच एजेंसी के समक्ष यह आरोप सामने आया है कि उनके स्तर तक पैसे पहुंचाने के लिए मुख्य सचिव के आवासीय कार्यालय में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र का इस्तेमाल किया गया।

अब CBI इन तमाम दावों को सिर्फ बयानों के आधार पर नहीं छोड़ना चाहती। छापेमारी में मिले दस्तावेज, वित्तीय लेनदेन, कॉल डिटेल, संपर्क और अन्य साक्ष्यों के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कौन किसके संपर्क में था और कथित नेटवर्क में किसकी क्या भूमिका थी।

Share.
Next Story
नेपाल में बाढ़ की तबाही के बीच भारत का ‘ऑपरेशन मदद’, काठमांडू पहुंची राहत की खेप
Exit mobile version